करम पर्व 2026: राष्ट्रपति मुर्मु, CM हेमंत सोरेन और राज्यपाल गंगवार ने दी शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के प्रमुख जनजातीय लोक पर्व करम पूजा के अवसर पर 22 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल संतोष गंगवार और कई अन्य नेताओं ने देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। करम पर्व प्रकृति की आराधना, अच्छी फसल की कामना और भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक है, जिसकी जड़ें झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति में गहराई से जुड़ी हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने समस्त देशवासियों को करम पूजा की बधाई देते हुए कहा, 'प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, कर्म के प्रति निष्ठा और भाईचारे की भावना से जुड़ा करम पर्व हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों की जीवंत अभिव्यक्ति है।' उन्होंने आगे कहा कि यह पर्व प्रकृति के संरक्षण और सद्भाव के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है और सभी के जीवन में सुख तथा समृद्धि का संचार करे, यही उनकी कामना है।
CM हेमंत सोरेन का संदेश
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'प्रकृति महापर्व करम पर्व की सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं और जोहार।' उन्होंने इस पर्व को झारखंड की पहचान और जीवन-पद्धति से जोड़ते हुए कहा कि यह प्रकृति और मानव जीवन के गहरे जुड़ाव, भाई-बहन के अटूट प्रेम और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है।
सोरेन ने जल, जंगल और जमीन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये केवल जीवन के आधार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर भी हैं। उन्होंने अखड़ा में करम डाली की स्थापना, मांदर की थाप, करम गीत और सामूहिक नृत्य को जीवंत लोक-संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति बताया।
कल्पना सोरेन और राज्यपाल का संदेश
गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए करम पर्व को समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ गहरे रिश्ते का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व लोगों को उनकी माटी और जड़ों से जोड़ता है, और अखड़ा में करम डाली की पूजा, मांदर की थाप तथा सामूहिक नृत्य पुरखों से मिली अनमोल विरासत की पहचान हैं।
झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने समस्त झारखंडवासियों को करमा पूजा की शुभकामनाएं देते हुए इसे प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता का पर्व बताया।
करम पर्व का सांस्कृतिक महत्व
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने बताया कि करम पर्व पवित्र करम पेड़, पारंपरिक गीतों और नृत्य के माध्यम से प्रकृति, भक्ति और समुदाय के उत्सव को एक साथ लाता है। करम देवता को शक्ति, युवावस्था और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार भादो महीने के 11वें दिन मनाया जाता है और कृषि एवं फसल चक्र से गहराई से जुड़ा हुआ है।
गौरतलब है कि करम पूजा झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों — विशेष रूप से संथाल, मुंडा, हो और ओराँव — में विशेष रूप से मनाई जाती है। यह पर्व एक ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब झारखंड में जनजातीय सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर बड़ी नीतिगत बहसें चल रही हैं।
आगे क्या
करम पर्व के मौके पर पूरे झारखंड में सामूहिक उत्सव और अखड़ा में करम डाली की स्थापना के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। नेताओं की शुभकामनाएं जनजातीय सांस्कृतिक मूल्यों को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही हैं।