24 जुलाई 2026
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देवगौड़ा राज्यसभा विवाद: विजयेंद्र का कांग्रेस पर पलटवार — 'गठबंधन पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं'

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देवगौड़ा राज्यसभा विवाद: विजयेंद्र का कांग्रेस पर पलटवार — 'गठबंधन पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं'

सारांश

देवगौड़ा को राज्यसभा टिकट न मिलने की खबरों पर कांग्रेस की आलोचना के जवाब में कर्नाटक BJP अध्यक्ष विजयेंद्र ने पलटवार किया। उन्होंने AAP के साथ कांग्रेस के कथित दोहरे रवैये, देवगौड़ा के खुले पत्र और पूर्व मुख्यमंत्रियों से बुरे व्यवहार का हवाला देते हुए कांग्रेस के 'नैतिक अधिकार' पर ही सवाल खड़े कर दिए।

मुख्य बातें

कर्नाटक BJP अध्यक्ष बी.
विजयेंद्र ने 8 जून 2026 को कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि गठबंधन राजनीति पर बोलने का उसे 'नैतिक अधिकार' नहीं है।
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पूर्व PM एच.
देवेगौड़ा को राज्यसभा टिकट न मिलने की खबरों को 'चौंकाने वाला' बताया था।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सहयोगी AAP की दिल्ली हार का जश्न मनाया था।
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे देवगौड़ा के खुले पत्र का संदर्भ दिया।
कुमारस्वामी ने भी सुरजेवाला को 'वसूलीवाला' कहते हुए पलटवार किया।

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने 8 जून 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा को कथित तौर पर राज्यसभा उम्मीदवार न बनाए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना का करारा जवाब दिया। विजयेंद्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गठबंधन की राजनीति पर टिप्पणी करने का कांग्रेस के पास कोई 'नैतिक अधिकार' नहीं है।

सुरजेवाला की टिप्पणी पर सीधा जवाब

कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को देवगौड़ा को राज्यसभा टिकट न मिलने की खबरों को 'चौंकाने वाला और आंखें खोलने वाला' करार देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) नेतृत्व की आलोचना की थी। इस पर विजयेंद्र ने कहा कि कांग्रेस को गठबंधन पर बोलने से पहले अपने स्वयं के आचरण का आत्मावलोकन करना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने गठबंधन सहयोगी आम आदमी पार्टी (AAP) की दिल्ली में हार का जश्न मनाया था — और कुछ स्थानों पर कांग्रेस मुख्यालयों में BJP कार्यालयों से भी अधिक उत्साह देखा गया।

देवगौड़ा के खुले पत्र का संदर्भ

विजयेंद्र ने सुरजेवाला को सलाह दी कि वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखे गए देवगौड़ा के खुले पत्र को ध्यान से पढ़ें, जिसमें देवगौड़ा ने कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के साथ अपने अनुभवों का विस्तार से उल्लेख किया था।

उन्होंने कहा कि देवगौड़ा के साथ कैसा व्यवहार हुआ, इसका सबसे प्रामाणिक विवरण स्वयं देवगौड़ा ही दे सकते हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों का जिक्र करते हुए विजयेंद्र ने विधायक राजन्ना के बयान का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर उन परिस्थितियों का वर्णन था जिनमें देवगौड़ा चुनाव हार गए थे।

ऐतिहासिक उदाहरणों से कांग्रेस पर हमला

कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में भी अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ उचित व्यवहार नहीं किया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों देवराज उर्स और वीरेंद्र पाटिल के साथ हुए कथित व्यवहार को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

विजयेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता और मंत्री पद हासिल करने के लिए रातोंरात अपने राजनीतिक समीकरण बदले हैं और गठबंधन के मामलों में हमेशा दोहरा रवैया अपनाया है। उन्होंने विपक्षी इंडी गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के इतिहास को देखते हुए उसके सहयोगी दलों को उसके व्यवहार की पहले से जानकारी होनी चाहिए थी।

राज्य सरकार की अंदरूनी खींचतान पर निशाना

विजयेंद्र ने NDA के राज्यसभा नामांकन पर टिप्पणी करने के बजाय कांग्रेस को अपनी राज्य सरकार में मंत्रिमंडल के पदों और विभागों को लेकर जारी अंदरूनी गुटबाजी पर ध्यान देने की नसीहत दी। उनका कहना था कि इस तरह की आंतरिक कलह का सीधा असर कर्नाटक के प्रशासन और शासन पर पड़ रहा है।

कुमारस्वामी का भी पलटवार

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने भी कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए सुरजेवाला को 'वसूलीवाला' बताया। यह विवाद ऐसे समय में गहरा हो रहा है जब कर्नाटक में राजनीतिक तापमान पहले से ही ऊँचा है और राज्यसभा नामांकन को लेकर NDA के भीतर भी अटकलों का दौर जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह NDA और इंडी गठबंधन — दोनों के भीतर सहयोगी दलों के साथ व्यवहार की पुरानी और बार-बार दोहराई जाने वाली समस्या को उजागर करता है। विजयेंद्र का देवराज उर्स और वीरेंद्र पाटिल का उदाहरण देना रणनीतिक है, लेकिन यह भी सच है कि BJP ने खुद अपने वरिष्ठ नेताओं को हाशिये पर रखने के आरोप झेले हैं। देवगौड़ा का खुला पत्र — जिसे विजयेंद्र ने हथियार की तरह इस्तेमाल किया — वास्तव में गठबंधन की राजनीति में छोटे दलों की कमज़ोर स्थिति का प्रमाण है, चाहे साथी कोई भी हो। कर्नाटक की मौजूदा कांग्रेस सरकार में मंत्रिमंडल की अंदरूनी खींचतान पर विजयेंद्र का इशारा एक वैध प्रशासनिक सवाल है, जिस पर मुख्यधारा की कवरेज अपेक्षाकृत कम ध्यान देती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवगौड़ा राज्यसभा विवाद क्या है?
पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा को NDA की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार कथित तौर पर नहीं बनाए जाने की खबरों के बाद कांग्रेस ने BJP और JD(S) नेतृत्व की आलोचना की, जिस पर BJP ने पलटवार किया। यह विवाद कर्नाटक की राजनीति में गठबंधन धर्म और वरिष्ठ नेताओं के सम्मान को लेकर बड़ी बहस का रूप ले चुका है।
विजयेंद्र ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने गठबंधन सहयोगी AAP की दिल्ली हार का जश्न मनाया, सत्ता के लिए रातोंरात राजनीतिक समीकरण बदले, और अतीत में देवराज उर्स तथा वीरेंद्र पाटिल जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ भी उचित व्यवहार नहीं किया। उन्होंने कांग्रेस के 'नैतिक अधिकार' पर सवाल उठाया।
देवगौड़ा के खुले पत्र में क्या था?
पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के साथ अपने राजनीतिक अनुभवों का उल्लेख किया था। विजयेंद्र ने इसी पत्र को आधार बनाते हुए सुरजेवाला को इसे पढ़ने की सलाह दी।
कुमारस्वामी ने सुरजेवाला को 'वसूलीवाला' क्यों कहा?
केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए उन्हें 'वसूलीवाला' की संज्ञा दी। यह प्रतिक्रिया सुरजेवाला द्वारा देवगौड़ा को राज्यसभा टिकट न मिलने को 'चौंकाने वाला' बताने के बाद आई।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में राज्यसभा नामांकन को लेकर NDA के भीतर अटकलें हैं और राज्य की कांग्रेस सरकार में मंत्रिमंडल के पदों को लेकर अंदरूनी खींचतान की खबरें भी हैं। विजयेंद्र के अनुसार यह गुटबाजी राज्य के प्रशासन को प्रभावित कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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