कटनी की निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया मामले में जबलपुर हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
सारांश
मुख्य बातें
जबलपुर उच्च न्यायालय ने 28 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के कटनी जिले की निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत और प्रकरण रद्द करने की याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायाधीश आनंद पाठक और राजकुमार चौबे की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को यह सुनवाई संपन्न हुई।
मामले की पृष्ठभूमि
आरोपों के अनुसार, कटनी में एक हत्या के प्रकरण में तत्कालीन नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर न्यायालय में चालान प्रस्तुत नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ मिल गया। यह चूक जानबूझकर की गई थी या नहीं, इस पर जाँच जारी है।
इसके अतिरिक्त, उन पर जमीन के संदिग्ध लेनदेन का भी गंभीर आरोप है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कटनी के कुठला थाना क्षेत्र में ₹1 करोड़ की जमीन को मात्र ₹15 से 20 लाख में एक एजेंट मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदा गया। उल्लेखनीय है कि जमीन की खरीद से पूर्व हनफी के बैंक खाते में महज कुछ हजार रुपए ही मौजूद थे, और बाद में क्षितिज नामक व्यक्ति द्वारा उसके खाते में राशि स्थानांतरित की गई थी।
मुख्य आरोप और FIR
विभागीय जाँच के बाद नेहा पच्चीसिया सहित तीन आरोपियों के विरुद्ध कुठला थाने में धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। कटनी पुलिस ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर ₹10,000-₹10,000 का इनाम घोषित किया है। वर्तमान में नेहा पच्चीसिया फरार बताई जा रही हैं।
न्यायालय में याचिका
नेहा की ओर से उच्च न्यायालय में दो प्रमुख राहतें माँगी गई हैं — पहली, उनके विरुद्ध दर्ज प्रकरण रद्द किया जाए, और दूसरी, उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान की जाए। उन्होंने न्यायालय में एक आवेदन भी दाखिल किया है, जिसमें कथित तौर पर यह दावा किया गया है कि जमीन के संदिग्ध लेनदेन में उनकी कोई सीधी भूमिका नहीं है।
आगे क्या होगा
न्यायाधीश आनंद पाठक और राजकुमार चौबे की खंडपीठ ने सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत का आदेश आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि नेहा पच्चीसिया को अग्रिम जमानत मिलती है अथवा उनके विरुद्ध कार्यवाही आगे बढ़ती है। यह प्रकरण मध्य प्रदेश पुलिस में अनुशासन और जवाबदेही के व्यापक सवाल भी उठाता है।