15 अगस्त 2026
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केजरीवाल ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर जेन जी और जेन अल्फा की सराहना की, बोले — यही सच्ची आज़ादी

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केजरीवाल ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर जेन जी और जेन अल्फा की सराहना की, बोले — यही सच्ची आज़ादी

सारांश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर केजरीवाल ने जेन जी और जेन अल्फा को सलाम किया — वे बच्चे जो हमीरपुर, देहरादून और बाड़मेर में डेस्क, पानी और शिक्षकों के लिए सड़क पर उतरे हैं। उनका संदेश साफ है: सवाल पूछना ही असली आज़ादी है।

मुख्य बातें

अरविंद केजरीवाल ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर जेन जी और जेन अल्फा पीढ़ी की सराहना की।
हमीरपुर , देहरादून और बाड़मेर में बच्चे स्कूलों में डेस्क, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और शिक्षकों की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
केजरीवाल ने दावा किया कि आज़ादी के 80 वर्ष बाद भी देश के कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
AAP सरकार ने दिल्ली और पंजाब में सरकारी स्कूल सुधार का उदाहरण पेश करने का दावा किया; विद्यार्थी अब NEET और JEE में भाग ले रहे हैं।
केजरीवाल के अनुसार, बच्चों और अभिभावकों की लोकतांत्रिक भागीदारी से ही शिक्षा व्यवस्था बदलेगी।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए जेन जी और जेन अल्फा पीढ़ी की विशेष सराहना की, जो अपने बुनियादी अधिकारों और स्कूली सुविधाओं के लिए सरकारों से सवाल पूछ रही है। केजरीवाल ने कहा कि नई पीढ़ी का यह जागरूक रवैया भारतीय लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है।

नई पीढ़ी की आवाज़ और लोकतंत्र

केजरीवाल ने कहा कि जेन जी के बाद अब जेन अल्फा ने भी अपने अधिकारों के लिए मोर्चा संभाल लिया है। उनके अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जहाँ बच्चे स्कूलों की बदहाल व्यवस्था सुधारने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अब बच्चों ने अपने अधिकारों के लिए लड़ना सीख लिया है और यही सच्ची आज़ादी का अर्थ है।'

बुनियादी सुविधाओं की माँग — हमीरपुर, देहरादून, बाड़मेर

केजरीवाल ने ठोस उदाहरण देते हुए बताया कि हमीरपुर में बच्चों ने स्कूल के सामने सड़क बनवाने की माँग को लेकर धरना-प्रदर्शन शुरू किया है। देहरादून में भी बच्चे अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, जबकि बाड़मेर में विद्यार्थी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की माँग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। बच्चों की माँगों में डेस्क, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और पर्याप्त शिक्षक शामिल हैं — जिन्हें वे बुनियादी हक मानते हैं।

सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल

केजरीवाल ने कहा कि आज़ादी के 75 से 80 वर्ष बीत जाने के बाद भी देश के कई हिस्सों में सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने दावा किया कि कई जगह स्कूलों की इमारतें जर्जर हैं, दीवारें टूट रही हैं और छतों की हालत खराब है। बारिश में कक्षाओं में पानी भरना, शौचालयों की कमी और शिक्षकों की कमी जैसी समस्याएं आम हैं। उनके अनुसार, गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों के बच्चे मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, इसलिए इन स्कूलों को सुधारना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

दिल्ली और पंजाब मॉडल का हवाला

केजरीवाल ने AAP सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि दिल्ली में सरकारी स्कूलों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और अब पंजाब में भी यही प्रयास जारी है। उनके अनुसार, दोनों राज्यों के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर रहे हैं।

समाज की भागीदारी ज़रूरी

केजरीवाल ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से भी संभव है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब नई पीढ़ी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती है और व्यवस्था से सवाल पूछती है, तभी लोकतंत्र वास्तव में मजबूत होता है। उनके मुताबिक, जेन जी और जेन अल्फा का यह संघर्ष 80वें स्वतंत्रता दिवस को एक विशेष अर्थ देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह विडंबना भी उल्लेखनीय है कि दिल्ली में AAP की सरकार जाने के बाद वे अब उसी मॉडल का हवाला दे रहे हैं जिसे मतदाताओं ने नकार दिया। बाड़मेर, हमीरपुर और देहरादून के बच्चों की माँगें वास्तविक और गंभीर हैं, लेकिन इन्हें पार्टी की उपलब्धियों के साथ जोड़ना उस असली सवाल से ध्यान हटाता है कि आठ दशक बाद भी सरकारी स्कूलों में शौचालय और पीने का पानी क्यों नहीं है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केजरीवाल ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर जेन अल्फा की सराहना क्यों की?
केजरीवाल ने कहा कि जेन अल्फा पीढ़ी के बच्चे हमीरपुर, देहरादून और बाड़मेर जैसे स्थानों पर स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके अनुसार, सरकार से सवाल पूछना और अधिकारों के लिए लड़ना ही सच्ची आज़ादी का अर्थ है।
बच्चे किन सुविधाओं की माँग कर रहे हैं?
बच्चे सरकारी स्कूलों में डेस्क, स्वच्छ पेयजल, कार्यात्मक शौचालय और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की माँग कर रहे हैं। हमीरपुर में स्कूल के सामने सड़क बनवाने की माँग को लेकर भी धरना-प्रदर्शन हो रहा है।
केजरीवाल ने दिल्ली और पंजाब के सरकारी स्कूलों के बारे में क्या दावा किया?
केजरीवाल ने दावा किया कि AAP सरकार के कार्यकाल में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में सुधार हुआ और अब पंजाब में भी यही प्रयास जारी है। उनके अनुसार, इन स्कूलों के विद्यार्थी अब NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पा रहे हैं।
क्या सरकारी स्कूलों की बदहाली एक नई समस्या है?
केजरीवाल के अनुसार, आज़ादी के 80 वर्ष बाद भी देश के कई हिस्सों में सरकारी स्कूलों की इमारतें जर्जर हैं और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यह समस्या लंबे समय से चली आ रही है और गरीब तथा निम्न आय वर्ग के परिवारों के बच्चों को सबसे अधिक प्रभावित करती है।
केजरीवाल के अनुसार शिक्षा व्यवस्था में बदलाव कैसे आएगा?
केजरीवाल ने कहा कि शिक्षा सुधार केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज, अभिभावकों और विद्यार्थियों की सक्रिय लोकतांत्रिक भागीदारी से संभव है। उनके अनुसार, जब नागरिक अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते हैं तभी व्यवस्था में वास्तविक बदलाव आता है।
राष्ट्र प्रेस
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