केरल विधानसभा में महंगाई पर घमासान: विजयन के नेतृत्व में वाम विपक्ष का वॉकआउट, सतीशन ने पूर्व सरकार पर डाली जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
केरल विधानसभा के नए सत्र में मंगलवार, 2 जून 2026 को पहली बड़ी राजनीतिक भिड़ंत देखने को मिली, जब आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर सत्तारूढ़ यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार और वामपंथी विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विवाद इतना गहरा गया कि विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में वाम दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
वॉकआउट की पृष्ठभूमि
विधानसभा उपाध्यक्ष पद पर शानीमोल उस्मान के निर्विरोध चुनाव के तुरंत बाद विपक्ष ने कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का तर्क था कि पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें राज्य में महंगाई की मुख्य वजह बन चुकी हैं और सरकार इस पर तत्काल राहत देने में विफल रही है।
पूर्व वित्त मंत्री के.एन. बालगोपाल ने प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को उनके अपने पुराने बयानों की याद दिलाई। बालगोपाल ने कहा, 'हम जानना चाहते हैं कि क्या मुख्यमंत्री अब वही करेंगे, जिसकी मांग वे विपक्ष में रहते हुए करते थे और लोगों को राहत देंगे?' — यह इशारा उस दौर की ओर था जब सतीशन स्वयं तत्कालीन वाम सरकार से ईंधन पर टैक्स घटाने की माँग करते थे।
सतीशन का पलटवार: श्वेत पत्र का ऐलान
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने जवाब में पिछले 10 वर्षों के वाम शासन की विरासत को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति गंभीर दबाव में है और तत्काल बड़े राहत पैकेज देना व्यावहारिक रूप से कठिन है।
सतीशन ने बताया कि उनकी सरकार केरल की वित्तीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) तैयार कर रही है, जो बीते एक दशक की आर्थिक तस्वीर सामने रखेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन) पर लगभग ₹2,800 करोड़ का बकाया छोड़ गई है, जिससे बाजार में हस्तक्षेप करने की सरकार की क्षमता सीमित हो गई है।
विजयन का आरोप: असली मुद्दे से ध्यान भटकाया
मुख्यमंत्री के बयानों पर विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के उठाए सवालों का जवाब देने के बजाय चर्चा को दूसरी दिशा में मोड़ रही है। विजयन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बावजूद आम जनता को पर्याप्त राहत नहीं दी गई और इसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाला जा रहा है।
उन्होंने केंद्र सरकार की पेट्रोलियम मूल्य निर्धारण नीति की भी आलोचना की और कहा कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर विस्तृत बहस से बच रही है। इसके विरोध में वाम विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
भाजपा विधायक को बोलने की अनुमति पर नया विवाद
वॉकआउट के बाद सदन में एक और तनाव उभरा जब विधानसभा अध्यक्ष तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक गोपाकुमार को बोलने की अनुमति दी। वामपंथी सदस्यों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि परंपरा के अनुसार पहले विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों को बोलने का अवसर मिलना चाहिए। विरोध बढ़ने पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप कर स्थिति को सामान्य किया।
आगे क्या होगा
सरकार द्वारा प्रस्तावित श्वेत पत्र आने वाले सत्रों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इसमें पिछले दशक के वित्तीय प्रबंधन की पड़ताल होगी। महंगाई का मुद्दा केरल की राजनीति में आगे भी केंद्रीय रहेगा, खासकर तब जब ईंधन की कीमतें वैश्विक बाजार से जुड़ी हैं और राज्य सरकार के पास सीमित नीतिगत विकल्प हैं।