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केरल हाईकोर्ट ने एमएससी एल्सा 3 के तीन नाविकों को राहत, बैंक गारंटी की जगह नकद जमा की अनुमति

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केरल हाईकोर्ट ने एमएससी एल्सा 3 के तीन नाविकों को राहत, बैंक गारंटी की जगह नकद जमा की अनुमति

सारांश

एक साल से अधिक समय से भारत में अटके एमएससी एल्सा 3 के तीन विदेशी नाविकों को केरल हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी — बैंक गारंटी की तकनीकी बाधा हटाकर नकद जमा का विकल्प दिया। जहाज पिछले वर्ष मई में केरल तट के पास डूबा था और तीनों किसी आपराधिक मामले में आरोपी नहीं हैं।

मुख्य बातें

केरल हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को एमएससी एल्सा 3 के तीन विदेशी नाविकों को भारत छोड़ने की शर्त में संशोधन कर राहत दी।
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने बैंक गारंटी के स्थान पर ₹1-1 लाख नकद जमा करने की अनुमति दी।
तीनों नाविक मर्चेंट शिपिंग एक्ट की वैधानिक जाँच रिपोर्ट और फोर्ट कोच्चि पुलिस के आपराधिक मामले में आरोपी नहीं हैं।
शेष चार क्रू सदस्यों में से दो को अभी देश छोड़ने की अनुमति नहीं; उनके बयान जाँच के लिए आवश्यक।
मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को निर्धारित; वैधानिक जाँच की सुनवाई 9 जुलाई को।

केरल हाईकोर्ट ने 30 जून 2026 को लाइबेरिया के झंडे तले पंजीकृत मालवाहक जहाज एमएससी एल्सा 3 के तीन विदेशी चालक दल सदस्यों को स्वदेश लौटने की राह आसान कर दी। न्यायालय ने भारत छोड़ने की पूर्व-निर्धारित शर्त में संशोधन करते हुए उन्हें बैंक गारंटी के बजाय एक-एक लाख रुपए नकद जमा करने की अनुमति प्रदान की। यह जहाज पिछले वर्ष मई में केरल तट के समीप डूब गया था, जिसके बाद से ये नाविक एक साल से अधिक समय से भारत में अटके हुए थे।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस की पीठ ने यह आदेश तब पारित किया जब याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने अदालत को अवगत कराया कि तकनीकी कारणों से तीनों क्रू सदस्य बैंक गारंटी की व्यवस्था कर पाने में असमर्थ रहे। न्यायमूर्ति थॉमस ने मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि तीनों अब तक देश नहीं छोड़ पाए हैं, जिसके बाद अदालत ने अपने पूर्व आदेश में आवश्यक संशोधन कर दिया।

ये तीनों उन सात विदेशी नाविकों में से हैं जिन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भारत छोड़ने की अनुमति माँगी थी। अदालत ने माना कि बैंक गारंटी उपलब्ध कराने में आई तकनीकी बाधाओं को देखते हुए शर्त में बदलाव उचित और न्यायसंगत है।

कानूनी स्थिति

उल्लेखनीय है कि इन तीनों क्रू सदस्यों का नाम मर्चेंट शिपिंग एक्ट के तहत चल रही वैधानिक जाँच की प्रारंभिक रिपोर्ट में शामिल नहीं है। इसके अतिरिक्त, जहाज डूबने के सिलसिले में फोर्ट कोच्चि तटीय पुलिस स्टेशन में दर्ज आपराधिक मामले में भी उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है। यही कारण रहा कि अदालत ने उनके पक्ष में राहत देना उचित समझा।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को यह भी बताया कि मर्चेंट शिपिंग एक्ट की धारा 360 के तहत क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही वैधानिक जाँच की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित है।

बाकी चार नाविकों की स्थिति

गौरतलब है कि इसी माह की शुरुआत में हाईकोर्ट ने शेष चार क्रू सदस्यों को संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत से उचित राहत लेने का निर्देश दिया था। हालाँकि, अदालत ने उनमें से दो को फिलहाल देश छोड़ने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि एमएससी एल्सा 3 के डूबने की परिस्थितियों की जाँच के लिए उनके बयान आवश्यक हैं।

आगे की सुनवाई

चल रही कानूनी कार्यवाही को देखते हुए केरल हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई के लिए निर्धारित की है। नकद जमा की अनुमति मिलने के बाद तीनों नाविकों के स्वदेश लौटने की शेष औपचारिकताएँ अब पूरी हो सकेंगी, और यह मामला उन विदेशी नाविकों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है जो भारतीय जल सीमा में हुई समुद्री दुर्घटनाओं के बाद कानूनी प्रक्रियाओं में फँसे रहते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो तकनीकी कारणों से पूरी नहीं हो सकी, ने उन लोगों को एक साल से अधिक समय तक भारत में रोके रखा जो किसी आपराधिक मामले में आरोपी तक नहीं हैं। यह प्रश्न उठता है कि क्या मर्चेंट शिपिंग एक्ट के तहत मौजूदा प्रक्रियाएँ विदेशी नाविकों के मौलिक अधिकारों और व्यावहारिक कठिनाइयों को पर्याप्त रूप से ध्यान में रखती हैं। शेष चार नाविकों का मामला अभी भी लंबित है, जो दर्शाता है कि समुद्री जाँच और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने की चुनौती अभी सुलझी नहीं है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एमएससी एल्सा 3 जहाज का मामला क्या है?
एमएससी एल्सा 3 लाइबेरिया के झंडे तले पंजीकृत एक मालवाहक जहाज था, जो पिछले वर्ष मई में केरल तट के पास डूब गया था। इस घटना के बाद जहाज के विदेशी चालक दल सदस्यों को भारत में रोका गया और मर्चेंट शिपिंग एक्ट के तहत वैधानिक जाँच शुरू हुई।
केरल हाईकोर्ट ने तीन नाविकों को क्या राहत दी?
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने तीनों नाविकों को बैंक गारंटी के स्थान पर ₹1-1 लाख रुपए नकद जमा करने की अनुमति दी, जिससे वे अपने देश लौट सकेंगे। यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि तकनीकी कारणों से वे बैंक गारंटी की व्यवस्था नहीं कर पा रहे थे।
क्या इन तीनों नाविकों पर कोई आपराधिक मामला है?
नहीं। तीनों नाविकों का नाम मर्चेंट शिपिंग एक्ट के तहत चल रही वैधानिक जाँच की प्रारंभिक रिपोर्ट में नहीं है और फोर्ट कोच्चि तटीय पुलिस स्टेशन में दर्ज आपराधिक मामले में भी उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया है।
बाकी चार नाविकों की स्थिति क्या है?
शेष चार नाविकों में से दो को हाईकोर्ट ने अभी देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी है, क्योंकि एमएससी एल्सा 3 के डूबने की परिस्थितियों की जाँच के लिए उनके बयान आवश्यक माने गए हैं। बाकी दो को मजिस्ट्रेट अदालत से राहत लेने का निर्देश दिया गया था।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
केरल हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई के लिए निर्धारित की है। इससे पहले मर्चेंट शिपिंग एक्ट की धारा 360 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही वैधानिक जाँच की सुनवाई 9 जुलाई को होगी।
राष्ट्र प्रेस
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