पेट्रोल-डीजल की दूसरी बढ़ोतरी पर खड़गे का केंद्र पर हमला: 'नाकामियों का बोझ जनता पर डाल रही सरकार'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार, 19 मई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, जब सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने एक सप्ताह से भी कम समय में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाईं। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नीतिगत विफलताओं की कीमत आम नागरिकों से वसूल रही है।
मुख्य घटनाक्रम
वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की दरें संशोधित कीं। यह बढ़ोतरी चार दिन पहले हुई पहली बढ़ोतरी के तुरंत बाद आई, जिससे आम उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक दबाव पड़ा।
खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'दाम बढ़े चार ही दिन हुए कि मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ा दिए। पूरी भूमिका बनाकर, बचत का उपदेश देकर अपनी नाकामियों का बोझ जनता पर डालने का कार्य प्रगति पर है।'
रूसी तेल और विदेश नीति पर सवाल
खड़गे ने भारत की तेल आयात नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री ने अमेरिका से अनुमति लेकर रूसी तेल खरीदने की छूट का एक महीने का विस्तार हासिल किया है। खड़गे ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से 140 करोड़ भारतीयों के स्वाभिमान को ठेस पहुँचती है और उनके अनुसार ऐसा पहले किसी पिछली सरकार ने नहीं किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रूसी तेल खरीदने की 'अनुमति' मिली हुई है, तो फिर ईंधन की ऊँची कीमतों का बोझ जनता पर क्यों डाला जा रहा है।
भाजपा नेतृत्व पर आरोप
खड़गे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) में दूरदर्शिता और नेतृत्व की कमी है। उनका आरोप है कि जब ईंधन संकट गहरा रहा था, तब सरकार चुनावी व्यस्तताओं में डूबी थी और जनता को 'मीठी-मीठी बातों' में उलझाए रखा गया।
उन्होंने कहा, 'केवल विदेशों में प्रायोजित पीआर करने से विश्वगुरु नहीं बना जाता… मोदी जी, जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करनी पड़ती है। असली सवालों से मत भागिए।' खड़गे ने यह भी कहा कि जनता को 'आम कैसे खाते हैं' या 'टॉनिक कौन सा पीते हैं' जैसे सवालों से नहीं, बल्कि संकट से निपटने की ठोस कार्ययोजना से मतलब है।
आम जनता पर असर
एक सप्ताह में दो बार ईंधन मूल्य वृद्धि से परिवहन लागत, रसोई गैस की अप्रत्यक्ष कीमतें और दैनिक उपभोक्ता वस्तुओं की महँगाई पर असर पड़ने की आशंका है। यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा मुद्रास्फीति पहले से ही आम परिवारों के बजट पर दबाव बना रही है।
क्या होगा आगे
विपक्ष की ओर से सरकार पर संसद में जवाबदेही का दबाव बढ़ने की संभावना है। कांग्रेस ने सरकार से माँग की है कि वह स्पष्ट करे कि रूसी तेल की उपलब्धता के बावजूद ईंधन की कीमतों में राहत क्यों नहीं दी जा रही। सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।