केरल वन मंत्री शिबू बेबी जॉन का ऐलान: सौर बाड़ 3,000 किमी तक बढ़ेगी, किसानों की सुरक्षा प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
केरल के वन मंत्री शिबू बेबी जॉन ने 5 जून 2026 को तिरुवनंतपुरम में स्पष्ट किया कि वन विभाग किसानों और वन-सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का विश्वास अर्जित करते हुए आगे बढ़ेगा। मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने और ग्रामीण आबादी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने कई ठोस कदमों की घोषणा की है।
सौर बाड़ का विस्तार
राज्य सरकार के सौ दिवसीय विशेष कार्यक्रम के अंतर्गत वन विभाग केरल में सौर बाड़ की लंबाई चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। वर्तमान में राज्य में लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी सौर बाड़ स्थापित है। पहले चरण में इसे 2,500 किलोमीटर और दूसरे चरण में 3,000 किलोमीटर तक विस्तारित किया जाएगा। यह कदम जंगली जानवरों को आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोकने और किसानों की फसलों को नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वायनाड में बाघ-मानव संघर्ष पर विशेष अध्ययन
मंत्री ने बताया कि वायनाड जिले में बाघों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़े हमलों की घटनाओं को लेकर विशेष अध्ययन कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक बाघ को सामान्यतः लगभग 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है, जबकि वायनाड में उपलब्ध वन क्षेत्र अपेक्षाकृत सीमित है। यही कारण है कि बाघों और मनुष्यों के बीच टकराव की घटनाएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वायनाड में पिछले कुछ वर्षों में वन्यजीव हमलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विस्तृत अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
त्वरित प्रतिक्रिया दल और बीमा सुरक्षा
शिबू बेबी जॉन ने स्वीकार किया कि वन्यजीव आपात स्थितियों से निपटने के लिए मौजूदा त्वरित प्रतिक्रिया दलों की संख्या पर्याप्त नहीं है। इन दलों को मजबूत और विस्तारित करने की योजना है। इसके साथ ही जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक विशेष बीमा सुरक्षा योजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है। सरकारी बीमा कंपनियों के साथ इस संबंध में बातचीत जारी है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु वन क्षेत्र के भीतर या वन्यजीव हमले में होती है, तो पीड़ित परिवार को उचित सहायता और मुआवजा प्रदान किया जाएगा। पंचायतों के सहयोग से पहाड़ी इलाकों में यह विशेष बीमा योजना लागू की जाएगी।
सलाहकार समिति और घास मैदान पुनर्विकास
मंत्री ने बताया कि राज्य स्तर पर एक सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा, जो वन्यजीव समस्याओं और उनके समाधान पर सुझाव देगी। जंगली हाथियों के आबादी क्षेत्रों की ओर बार-बार आने की समस्या को देखते हुए घास के मैदानों के संरक्षण और पुनर्विकास के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जंगलों में फैल रही बाहरी और हानिकारक वनस्पतियों को हटाने के लिए भी अलग कार्ययोजना बनाई जाएगी।
जंगली सूअरों पर 15 जून से विशेष अभियान
राज्य में जंगली सूअरों के बढ़ते हमलों को देखते हुए 15 जून से एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत पंचायत स्तर पर जंगली सूअरों की संख्या का आकलन किया जाएगा। आवश्यकतानुसार प्रशिक्षित और अधिकृत निशानेबाजों की सूची भी तैयार की जाएगी, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। मंत्री ने जोर देकर कहा कि वन विभाग का लक्ष्य वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना है, और इसके लिए स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।