30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोयना बांध के 6 गेट शाम 5 बजे खुलेंगे, 6,129 क्यूसेक पानी कोयना नदी में छोड़ा जाएगा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोयना बांध के 6 गेट शाम 5 बजे खुलेंगे, 6,129 क्यूसेक पानी कोयना नदी में छोड़ा जाएगा

सारांश

महाराष्ट्र में भारी बारिश का असर — कोयना बांध के 6 गेट शाम 5 बजे खुलेंगे और कोयना नदी में 6,129 क्यूसेक पानी बहेगा। जलगांव का गिरना डैम महज आठ दिनों में 40% से 94% भर गया। नदी किनारे के निवासियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।

मुख्य बातें

कोयना बांध के 6 रेडियल गेट 30 जुलाई, शाम 5 बजे 1 फुट तक खोले जाएंगे, जिससे 5,079 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ा जाएगा।
केडीपीएच विद्युत गृह के ज़रिए पहले से 1,050 क्यूसेक प्रवाहित हो रहा है; कुल मिलाकर कोयना नदी में 6,129 क्यूसेक पानी आएगा।
जलगांव के गिरना डैम में 30 जुलाई सुबह तक 94% जल भंडारण; 3,000 क्यूसेक की आवक जारी।
22 जुलाई को गिरना डैम सिर्फ 40.38% भरा था; आठ दिनों में 54% की वृद्धि।
प्रशासन ने कोयना नदी किनारे के नागरिकों को सतर्क रहने और नदी में प्रवेश न करने की अपील की।
भड़गांव, पचोरा, चालीसगांव और जलगांव तालुका के किसानों को गिरना डैम भरने से राहत।

महाराष्ट्र के कोयना बांध के जलग्रहण क्षेत्र में 30 जुलाई को लगातार हो रही भारी बारिश के चलते बांध का जलस्तर तेज़ी से बढ़ा है। जलस्तर को नियंत्रण में रखने के लिए प्रशासन ने शाम 5 बजे बांध के 6 रेडियल गेट 1 फुट तक खोलने का निर्णय लिया है, जिससे 5,079 क्यूसेक पानी कोयना नदी में प्रवाहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जलगांव जिले के गिरना डैम में भी जलस्तर 94 प्रतिशत तक पहुँच गया है।

कोयना बांध से कुल जलप्रवाह

फिलहाल कोयना बांध के पाद विद्युत गृह (केडीपीएच) का एक यूनिट चालू है, जिसके ज़रिए 1,050 क्यूसेक पानी पहले से नदी में छोड़ा जा रहा है। गेट खुलने के बाद कोयना नदी में कुल 6,129 क्यूसेक पानी का प्रवाह शुरू हो जाएगा। प्रशासन के अनुसार, वर्षा की तीव्रता और बांध में आने वाले पानी की मात्रा के आधार पर आगे जलविसर्ग और बढ़ाया जा सकता है।

प्रशासन की चेतावनी और सावधानियाँ

बांध से पानी छोड़े जाने के कारण कोयना नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। इसे देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे बसे नागरिकों से सतर्क रहने और नदी में प्रवेश न करने की अपील की है। नदी तट के गाँवों के ग्राम प्रशासन तथा संबंधित विभागों को भी आवश्यक एहतियात बरतने और स्थिति पर निरंतर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गिरना डैम: आठ दिनों में 54% की उछाल

जलगांव जिले के बड़े हिस्से की जीवनरेखा माने जाने वाले गिरना डैम में 30 जुलाई की सुबह तक 94 प्रतिशत जल भंडारण हो चुका है। वर्तमान में डैम में करीब 3,000 क्यूसेक पानी आ रहा है, जिससे यह जल्द ही पूरी क्षमता तक भरकर ओवरफ्लो हो सकता है। गौरतलब है कि 22 जुलाई को गिरना डैम में जल भंडारण मात्र 40.38 प्रतिशत था, लेकिन ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण सिर्फ आठ दिनों में जलस्तर 54 प्रतिशत बढ़ गया।

किसानों को राहत, आगे का फैसला स्थिति पर निर्भर

गिरना डैम के जलस्तर में इस उल्लेखनीय वृद्धि से भड़गांव, पचोरा, चालीसगांव और जलगांव तालुका के किसानों एवं स्थानीय निवासियों को बड़ी राहत मिली है, जो गिरना प्रोजेक्ट पर सिंचाई और जल आपूर्ति के लिए निर्भर हैं। यदि डैम ओवरफ्लो की स्थिति में पहुँचता है, तो प्रशासन पानी छोड़ने का निर्णय ले सकता है। स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नज़र बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उतना ही संकेत करता है कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में वर्षा की निगरानी और डाउनस्ट्रीम गाँवों को समय पर सूचना देने की व्यवस्था कितनी चुस्त है। नदी किनारे के गाँवों को 'सतर्क रहने' की अपील पर्याप्त नहीं है — सवाल यह है कि क्या प्रशासन के पास निकासी की ठोस योजना तैयार है या यह भी हर साल की तरह प्रतिक्रियात्मक कदम ही रहेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोयना बांध से आज कितना पानी छोड़ा जाएगा?
30 जुलाई को शाम 5 बजे कोयना बांध के 6 रेडियल गेट 1 फुट तक खोलने से 5,079 क्यूसेक पानी छोड़ा जाएगा। केडीपीएच विद्युत गृह से पहले से जारी 1,050 क्यूसेक मिलाकर कोयना नदी में कुल 6,129 क्यूसेक का प्रवाह होगा।
गिरना डैम का जलस्तर इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ा?
जलगांव के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण गिरना डैम में 22 जुलाई से 30 जुलाई के बीच — महज आठ दिनों में — जलस्तर 40.38% से बढ़कर 94% हो गया। डैम में अभी भी करीब 3,000 क्यूसेक पानी आ रहा है।
क्या कोयना नदी के किनारे रहने वाले लोगों को खतरा है?
प्रशासन ने कोयना नदी तट पर बसे नागरिकों को सतर्क रहने और नदी में प्रवेश न करने की अपील की है। बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है, इसलिए नदी किनारे के गाँवों को भी निरंतर निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
गिरना डैम के ओवरफ्लो होने पर क्या होगा?
यदि गिरना डैम पूरी क्षमता तक भर जाता है, तो प्रशासन पानी छोड़ने का निर्णय ले सकता है। इससे भड़गांव, पचोरा, चालीसगांव और जलगांव तालुका के निचले इलाकों में पानी का दबाव बढ़ सकता है।
गिरना डैम किन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है?
गिरना डैम को जलगांव जिले के बड़े हिस्से की जीवनरेखा माना जाता है। भड़गांव, पचोरा, चालीसगांव और जलगांव तालुका के किसान एवं निवासी सिंचाई और जल आपूर्ति के लिए गिरना प्रोजेक्ट पर निर्भर हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले