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NCERT का स्पष्टीकरण: 'कृष्णा' कन्नड़ पाठ्यपुस्तक का नाम जीवनदायिनी नदी से, कोई विवाद नहीं

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NCERT का स्पष्टीकरण: 'कृष्णा' कन्नड़ पाठ्यपुस्तक का नाम जीवनदायिनी नदी से, कोई विवाद नहीं

सारांश

NCERT ने साफ किया कि 'कृष्णा' नाम धर्म से नहीं, नदी-परंपरा से जुड़ा है — जैसे हिंदी की 'गंगा', अंग्रेजी की 'कावेरी'। भोजन अध्याय पर भी परिषद ने कहा: शाकाहार-मांसाहार दोनों शामिल हैं, लक्ष्य सिर्फ संतुलित आहार की समझ।

मुख्य बातें

NCERT ने 25 जून 2026 को कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक 'कृष्णा' के नाम पर उठे विवाद को खारिज किया।
पुस्तक का नाम कृष्णा नदी पर रखा गया है — उसी परंपरा के तहत जिसमें हिंदी की 'गंगा' , अंग्रेजी की 'कावेरी' और उर्दू की 'जमुना' हैं।
अध्याय 'स्वास्थ्य ही धन है' में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों खाद्य पदार्थों को शामिल किया गया है; किसी एक पद्धति का समर्थन नहीं।
पाठ्यपुस्तकों का नामकरण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के स्थानीय-संस्कृति सिद्धांत पर आधारित है।
NCERT ने शिक्षकों, अभिभावकों और विशेषज्ञों से रचनात्मक सुझावों का स्वागत करने की बात कही।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 25 जून 2026 को कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक 'कृष्णा' को लेकर उठे विवाद पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया। परिषद ने कहा कि पुस्तक का नाम किसी धार्मिक संदर्भ या विचारधारा से नहीं, बल्कि भारत की महान नदियों के नाम पर भाषा पाठ्यपुस्तकों का नामकरण करने की सुस्थापित परंपरा से जुड़ा है।

नदियों के नाम पर पाठ्यपुस्तकें — एक स्थापित परंपरा

NCERT ने स्पष्ट किया कि नई पाठ्यपुस्तक श्रृंखला में हिंदी की पुस्तक 'गंगा', अंग्रेजी की 'कावेरी', उर्दू की 'जमुना' और कन्नड़ की 'कृष्णा' नाम से प्रकाशित की गई है। कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान और कृषि जीवन से गहराई से जुड़ी कृष्णा नदी के नाम को अपनाना स्थानीय संदर्भों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक स्वाभाविक और सुविचारित कदम है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 दोनों में शिक्षा को स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और विद्यार्थियों के जीवन से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया है। इसी नीतिगत सोच के तहत भाषा पुस्तकों को नदियों के नाम दिए गए हैं।

भोजन अध्याय पर उठे सवाल और NCERT का जवाब

कुछ रिपोर्टों में पाठ्यपुस्तक के अध्याय 'स्वास्थ्य ही धन है' पर यह आरोप लगाया गया था कि उसमें किसी विशेष प्रकार के भोजन को प्रोत्साहित किया गया है। NCERT ने इन आशंकाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस अध्याय का एकमात्र उद्देश्य स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आहार के महत्व को समझाना है।

परिषद के अनुसार, अध्याय में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और स्वच्छता — तीनों समान रूप से आवश्यक हैं। दूध, फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों की भूमिका को रेखांकित किया गया है।

शाकाहार और मांसाहार — दोनों को स्थान

NCERT ने विशेष रूप से यह भी स्पष्ट किया कि पुस्तक के चित्रों में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के खाद्य पदार्थों को शामिल किया गया है। भोजन को किसी एक दायरे में सीमित करने के बजाय संतुलित और पोषणयुक्त आहार की व्यापक अवधारणा प्रस्तुत की गई है। अध्याय में देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजनों का उल्लेख करके यह संदेश दिया गया है कि भारत की खाद्य संस्कृति बेहद विविध और समृद्ध है।

परिषद ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'पुस्तक में कहीं भी शाकाहार को श्रेष्ठ साबित करने या मांसाहार का विरोध करने का प्रयास नहीं किया गया है।'

आगे की राह — सुझावों का स्वागत

NCERT ने कहा कि वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और शिक्षकों, अभिभावकों, विशेषज्ञों तथा समाज के अन्य वर्गों से मिलने वाले रचनात्मक सुझावों और आलोचनाओं का सदैव स्वागत करती है। परिषद का कहना है कि पाठ्यपुस्तक का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्थानीय संस्कृति से जोड़ते हुए स्वास्थ्य, पोषण और भारतीय विविधता की समझ विकसित करना है — न कि किसी विशेष विचार या खान-पान की पद्धति का समर्थन करना। यह विवाद एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि पाठ्यक्रम सुधारों के दौरान सार्वजनिक संवाद और पारदर्शिता कितनी ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि पाठ्यपुस्तकें जारी होने से पहले इतना बुनियादी संवाद क्यों नहीं हुआ। नदियों के नाम पर पुस्तकें रखने की परंपरा तार्किक और सांस्कृतिक दृष्टि से सुदृढ़ है, लेकिन इसे पहले से सार्वजनिक करने से विवाद टाला जा सकता था। NEP 2020 के बाद पाठ्यक्रम सुधारों को लेकर राजनीतिक संवेदनशीलता बढ़ी है, ऐसे में NCERT को हर नई पुस्तक के साथ उसके शैक्षणिक तर्क का सार्वजनिक दस्तावेज़ीकरण अनिवार्य बनाना चाहिए — ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित हों।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NCERT की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक 'कृष्णा' का नाम विवादास्पद क्यों माना जा रहा था?
कुछ रिपोर्टों में यह आशंका जताई गई थी कि पुस्तक का नाम किसी धार्मिक संदर्भ से जुड़ा है। NCERT ने स्पष्ट किया कि 'कृष्णा' नाम कर्नाटक की प्रमुख नदी कृष्णा पर आधारित है और यह भाषा पुस्तकों को नदियों के नाम देने की परंपरा का हिस्सा है।
NCERT की पाठ्यपुस्तकों को नदियों के नाम देने की परंपरा क्या है?
NCERT ने नई श्रृंखला में हिंदी की पुस्तक 'गंगा', अंग्रेजी की 'कावेरी', उर्दू की 'जमुना' और कन्नड़ की 'कृष्णा' नाम से प्रकाशित की है। यह परंपरा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के स्थानीय संस्कृति से जोड़ने के सिद्धांत पर आधारित है।
'स्वास्थ्य ही धन है' अध्याय पर क्या आरोप लगाए गए थे?
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अध्याय में किसी विशेष प्रकार के भोजन को बढ़ावा दिया गया है। NCERT ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अध्याय में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों खाद्य पदार्थ शामिल हैं और लक्ष्य केवल संतुलित आहार की समझ विकसित करना है।
क्या NCERT की पाठ्यपुस्तक में मांसाहारी भोजन को स्थान दिया गया है?
हाँ, NCERT के अनुसार पुस्तक के चित्रों और सामग्री में शाकाहारी के साथ-साथ मांसाहारी खाद्य पदार्थों को भी शामिल किया गया है। परिषद ने स्पष्ट किया कि पुस्तक में शाकाहार को श्रेष्ठ या मांसाहार को हीन नहीं बताया गया है।
इस पाठ्यपुस्तक विवाद का NEP 2020 से क्या संबंध है?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 में शिक्षा को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने पर बल दिया गया है। इसी नीतिगत ढाँचे के तहत भाषा पुस्तकों को नदियों के नाम दिए गए हैं, जिसे NCERT ने अपने स्पष्टीकरण में रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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