NCERT के 66वें स्थापना दिवस पर बड़ा ऐलान: कक्षा 1 से 8 तक की किताबें 22 भाषाओं में, 93 जनजातीय भाषाएँ भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार, 1 सितंबर को नई दिल्ली में घोषणा की कि कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में तैयार की जा रही हैं। इसके साथ ही 121 प्रारंभिक भाषा सामग्री भी विकसित की जा रही है, जिनमें 93 जनजातीय भाषाएँ शामिल हैं। यह ऐलान राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) के 66वें स्थापना दिवस समारोह में किया गया।
मुख्य घोषणाएँ और पहल
शिक्षा मंत्री जोशी ने बताया कि बहुभाषी पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य बच्चों को उनकी मातृभाषा में सीखने का अवसर देना है। यह पहल देश के दूरदराज़ के क्षेत्रों और आदिवासी समुदायों तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि NCERT द्वारा तैयार की जा रही नई किताबों में भारत की सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा को भी उचित स्थान दिया जा रहा है।
समारोह में जोशी ने NCERT में तीन नई सुविधाओं का उद्घाटन किया — रोबोटिक्स लर्निंग सेंटर, अनुवाद प्रयोगशाला और उन्नत टेलीविजन स्टूडियो। इन सुविधाओं के ज़रिए भारतीय भाषाओं में डिजिटल शैक्षिक सामग्री तैयार करने की क्षमता को मज़बूत किया जाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का संदर्भ
जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने स्कूली शिक्षा में व्यापक सुधारों की नींव रखी है। इस नीति में केवल किताबी ज्ञान के बजाय बच्चों के समग्र विकास, रचनात्मकता, तार्किक सोच, अनुभव आधारित शिक्षा और दक्षता आधारित सीखने पर विशेष ज़ोर दिया गया है। गौरतलब है कि NEP 2020 मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा को प्राथमिकता देती है, और यह बहुभाषी पुस्तक परियोजना उसी नीतिगत दिशा का विस्तार है।
तकनीक और मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
शिक्षा मंत्री ने कहा कि तकनीक तेज़ी से बदल रही है और शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने NCERT से आग्रह किया कि वह अपने शोध तंत्र को मज़बूत करे और विद्यार्थियों को डिजिटल साक्षरता, AI की समझ, समस्या समाधान और नवाचार जैसे कौशलों से लैस करे।
जोशी ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को भी शिक्षा व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में उचित बदलाव, मनो-सामाजिक सहायता और शिक्षकों के प्रशिक्षण के ज़रिए बच्चों के मानसिक कल्याण पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
NCERT की भूमिका और आगे की राह
शिक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि NCERT छह दशकों से अधिक समय से भारतीय शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ रही है। उन्होंने संस्थान से आग्रह किया कि वह अपने अनुभव के आधार पर और अधिक नवाचारी, समावेशी और शोध-आधारित बने। समारोह में भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष डॉ. चामू कृष्ण शास्त्री, NCERT के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी तथा शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। आने वाले वर्षों में यह बहुभाषी पुस्तक परियोजना भारत की भाषाई विविधता को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की कसौटी पर कसी जाएगी।