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लखनऊ में 200 से अधिक वकीलों के चैंबर तोड़े, हाईकोर्ट आदेश के बाद नगर निगम की कार्रवाई पर सड़क पर उतरे वकील

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लखनऊ में 200 से अधिक वकीलों के चैंबर तोड़े, हाईकोर्ट आदेश के बाद नगर निगम की कार्रवाई पर सड़क पर उतरे वकील

सारांश

लखनऊ में नगर निगम ने हाईकोर्ट आदेश के आधार पर 200 से अधिक वकीलों के चैंबर तोड़ दिए। दिवाली से पहले हुई इस कार्रवाई से करीब 2,000 वकील प्रभावित हुए, जो बिना वैकल्पिक व्यवस्था के सड़क पर उतर आए।

मुख्य बातें

लखनऊ में नगर निगम ने 25 अक्टूबर 2026 को 200 से अधिक वकीलों के चैंबर ध्वस्त किए।
कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई।
करीब 2,000 वकीलों की आजीविका प्रभावित; वकीलों ने सड़क पर धरना-प्रदर्शन किया।
अधिवक्ता बलराम जाखड़ ने माँग रखी कि पहले वैकल्पिक स्थान दिया जाए, तभी चैंबर तोड़े जाएँ।
प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने का प्रयास किया, तनाव बना रहा।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 25 अक्टूबर 2026 को सैकड़ों वकीलों ने सड़क पर धरना-प्रदर्शन किया, जब नगर निगम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 200 से अधिक वकीलों के चैंबर ध्वस्त कर दिए। वकीलों का कहना है कि तोड़फोड़ से पहले उन्हें कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई, जिससे करीब 2,000 वकीलों की रोज़ी-रोटी प्रभावित हो रही है।

मुख्य घटनाक्रम

रविवार को पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँचे और चैंबरों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की। इसके तुरंत बाद बड़ी संख्या में वकील एकत्र हो गए और सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रशासन द्वारा प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने के प्रयास के बावजूद वकील डटे रहे।

गौरतलब है कि यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश के तहत की जा रही है। वकीलों ने यह स्पष्ट किया कि वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी माँग है कि पहले उन्हें प्रैक्टिस जारी रखने के लिए उचित वैकल्पिक स्थान दिया जाए।

वकीलों की माँगें और आक्रोश

अधिवक्ता बलराम जाखड़ ने कहा, 'वे मनमानी कर रहे हैं। पहले हमें वैकल्पिक व्यवस्था दें और फिर चैंबरों को तोड़ें। कम से कम 2,000 वकील परेशान हैं। दिवाली इतना बड़ा त्योहार है, फिर भी हमें अंधेरे में रखा जा रहा है।'

उन्होंने आगे कहा, 'हमारे चैंबर हमारी आँखों के सामने छीने जा रहे हैं। पूरी तरह से मनमानी हो रही है और कोई भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। हम वकील हैं — हम समाज का एक महत्वपूर्ण वर्ग हैं जो लोगों को न्याय दिलाना सुनिश्चित करते हैं।'

जाखड़ ने यह भी कहा, 'अगर वे हमारे चैंबरों को तोड़ देंगे, तो हमें सड़कों पर प्रैक्टिस करनी पड़ेगी — इसलिए हम पहले ही सड़कों पर आ गए हैं।' उन्होंने चेतावनी दी कि वकील इस कार्रवाई को रोकने के लिए 'जो भी करना पड़ेगा, करेंगे।'

प्रशासन का रुख

प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के सीधे अनुपालन में की जा रही है। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी वकीलों को मौके से हटाने का प्रयास किया, हालाँकि इसे लेकर तनाव बना रहा। वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान तत्काल उपलब्ध नहीं हो सका।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में न्यायालय आदेशों पर आधारित ध्वंस कार्रवाइयों को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं। इससे पहले सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित एक अवैध संरचना को तोड़े जाने पर भी इसी तरह का विवाद उठा था, जब न्यायालय द्वारा एक पक्ष की अपील खारिज होने के बाद ध्वंस किया गया था।

वकीलों का यह प्रदर्शन दिवाली से ठीक पहले हुआ है, जिसने इसे और भावनात्मक रूप से संवेदनशील बना दिया है। आलोचकों का कहना है कि प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था पहले सुनिश्चित करनी चाहिए थी।

आगे की स्थिति

वकीलों ने संकेत दिया है कि जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, उनका प्रदर्शन जारी रहेगा। यह देखना होगा कि प्रशासन और वकील संघ के बीच कोई मध्यम मार्ग निकलता है या मामला उच्च न्यायालय तक फिर पहुँचता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 2,000 वकीलों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के दिवाली से पहले बेघर करना प्रशासनिक अदूरदर्शिता का प्रमाण है। विडंबना यह है कि जो वर्ग न्याय दिलाने का काम करता है, वही आज न्याय की माँग लेकर सड़क पर है। उत्तर प्रदेश में हाल के महीनों में न्यायालय-आदेश-आधारित ध्वंस कार्रवाइयों की बढ़ती संख्या यह सवाल उठाती है कि क्या पुनर्वास योजना को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ में वकीलों के चैंबर क्यों तोड़े गए?
लखनऊ नगर निगम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में 200 से अधिक वकीलों के चैंबर ध्वस्त किए। वकीलों ने इसका विरोध किया क्योंकि उन्हें तोड़फोड़ से पहले कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं दी गई।
कितने वकील इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं?
अधिवक्ता बलराम जाखड़ के अनुसार कम से कम 2,000 वकील इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं। उनकी प्रैक्टिस और आजीविका के लिए कोई वैकल्पिक स्थान अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।
वकीलों की मुख्य माँग क्या है?
वकीलों की माँग है कि चैंबर तोड़ने से पहले उन्हें प्रैक्टिस जारी रखने के लिए एक उचित वैकल्पिक स्थान दिया जाए। वे उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन कहते हैं कि बिना पुनर्वास के ध्वंस अनुचित है।
क्या यह कार्रवाई कानूनी रूप से वैध है?
हाँ, नगर निगम की यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर की जा रही है। वकीलों ने भी स्वीकार किया है कि वे न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका तर्क है कि क्रियान्वयन में संवेदनशीलता की कमी है।
उत्तर प्रदेश में इस तरह के विवाद पहले भी हुए हैं?
हाँ, इससे पहले सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में एक अवैध संरचना को न्यायालय आदेश के बाद तोड़े जाने पर भी विवाद हुआ था। उत्तर प्रदेश में न्यायालय-आधारित ध्वंस कार्रवाइयाँ हाल के समय में बढ़ी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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