25 अक्टूबर 2026
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वित्त और नियोजन विभाग पर NCP का दावा: अनिल पाटिल बोले — यह हक है, मांग नहीं

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वित्त और नियोजन विभाग पर NCP का दावा: अनिल पाटिल बोले — यह हक है, मांग नहीं

सारांश

महाराष्ट्र में बजट सत्र से पहले NCP (अजित पवार गुट) ने वित्त और नियोजन विभाग पर दावा दोहराया। विधायक अनिल पाटिल ने साफ कहा — यह मांग नहीं, 2024 के चुनाव-पूर्व फॉर्मूले के तहत पार्टी का हक है। CM फडणवीस से मुलाकात हुई, लेकिन नतीजा अभी सामने नहीं आया।

मुख्य बातें

NCP (अजित पवार गुट) ने 25 अक्टूबर 2026 को वित्त विभाग और नियोजन विभाग पर अपना दावा फिर दोहराया।
NCP विधायक अनिल पाटिल ने कहा — यह कोई नई मांग नहीं, बल्कि 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद तय हुए फॉर्मूले पर आधारित पार्टी का 'हक' है।
देवगिरी बंगले पर कोर कमेटी की बैठक के बाद NCP प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की।
मुलाकात में विधान परिषद चुनाव , जिला सहकारी बैंक चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों पर भी चर्चा संभव बताई गई।
महाराष्ट्र बजट सत्र से पहले महायुति के भीतर विभाग-बंटवारे को लेकर तनाव बना हुआ है।

महाराष्ट्र में बजट सत्र से पहले महायुति गठबंधन के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 25 अक्टूबर 2026 को देवगिरी बंगले पर हुई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP, अजित पवार गुट) की कोर कमेटी की बैठक के बाद पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इसके बाद NCP ने वित्त विभाग और नियोजन विभाग पर अपना दावा एक बार फिर दोहराया है।

NCP का तर्क: चुनाव-पूर्व फॉर्मूले पर आधारित है दावा

NCP विधायक और पूर्व मंत्री अनिल पाटिल ने जलगांव से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह कोई नया या एकतरफा दावा नहीं, बल्कि पार्टी का संवैधानिक हक है। उन्होंने कहा, 'यह कोई नया दावा नहीं है, बल्कि पार्टी का हक है।' पाटिल के अनुसार, 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद जब मंत्रिमंडल गठन के दौरान विभागों का बंटवारा हुआ था, तब वित्त और नियोजन दोनों विभाग NCP के हिस्से में आए थे।

उनका तर्क है कि चुनाव-पूर्व जो फॉर्मूला तय हुआ था, उसी के आधार पर वर्तमान मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी ये विभाग NCP को मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को वित्त विभाग और नियोजन विभाग मिला था। अब मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह पोर्टफोलियो दोबारा NCP को मिलना चाहिए।'

कोर कमेटी की बैठक: नियमित प्रक्रिया या रणनीतिक संकेत?

अनिल पाटिल ने देवगिरी बंगले पर हुई बैठक को 'नियमित प्रक्रिया' बताया। उन्होंने कहा, 'आज कोर कमेटी की बैठक हुई है और यह एक नियमित प्रक्रिया है। हर पार्टी की तरह हमारी पार्टी की भी आठ दिन, पंद्रह दिन या एक महीने में कोर कमेटी की बैठक होती रहती है।' हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि बैठक में हुई विस्तृत चर्चा की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में बजट सत्र नजदीक है और महायुति के तीनों घटक दलों — भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और NCP (अजित पवार गुट) — के बीच प्रमुख विभागों पर तनातनी की खबरें सामने आ रही हैं।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के अन्य एजेंडे

पाटिल ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात केवल विभागों के बंटवारे तक सीमित नहीं थी। उनके अनुसार, विधान परिषद चुनाव, जिला सहकारी बैंकों के चुनाव और आगामी जिला परिषद एवं पंचायत समिति के स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में आने वाले महीनों में कई स्थानीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं, जिनमें गठबंधन की एकजुटता और सीट-बंटवारे पर सहमति महायुति के सभी तीन दलों के लिए रणनीतिक रूप से अहम है।

महायुति में विभाग-बंटवारे की पृष्ठभूमि

यह Nवीं बार नहीं है जब महायुति के भीतर विभागों पर असहमति सार्वजनिक हुई हो। 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति को बड़ी जीत मिली थी, लेकिन मंत्रिमंडल गठन के दौरान भी सीटों और विभागों को लेकर लंबी वार्ता हुई थी। आलोचकों का कहना है कि वित्त विभाग जैसे शक्तिशाली पोर्टफोलियो पर नियंत्रण रखना किसी भी गठबंधन सहयोगी के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।

आने वाले दिनों में बजट सत्र से पहले यह विवाद महायुति की आंतरिक एकता की असली परीक्षा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि गठबंधन की आंतरिक शक्ति-संरचना की परीक्षा है। महायुति में BJP सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, ऐसे में NCP के लिए वित्त जैसे 'हाई-प्रोफाइल' विभाग को बनाए रखना उसकी राजनीतिक प्रासंगिकता के लिए अहम है। गौरतलब है कि गठबंधन सरकारों में विभाग-बंटवारे के विवाद अक्सर बजट तैयारियों और स्थानीय निकाय चुनावों के ठीक पहले उभरते हैं — यह संयोग नहीं, रणनीति है। असली सवाल यह है कि क्या CM फडणवीस NCP की इस माँग को मान कर गठबंधन में संतुलन बनाए रखेंगे या भाजपाई दबाव में विभाग अपने पाले में रखेंगे।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

NCP वित्त और नियोजन विभाग पर क्यों दावा कर रही है?
NCP (अजित पवार गुट) का कहना है कि 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद महायुति के भीतर जो विभाग-बंटवारे का फॉर्मूला तय हुआ था, उसके तहत वित्त और नियोजन दोनों विभाग पार्टी को मिले थे। विधायक अनिल पाटिल के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी यही फॉर्मूला लागू होना चाहिए।
देवगिरी बंगले पर NCP की कोर कमेटी बैठक का क्या उद्देश्य था?
अनिल पाटिल ने इसे एक नियमित बैठक बताया जो हर आठ से तीस दिनों पर होती है। हालाँकि, बैठक के बाद CM फडणवीस से मुलाकात होने से संकेत मिलता है कि विभाग-बंटवारे सहित आगामी चुनावों पर रणनीतिक चर्चा भी हुई।
क्या NCP को वित्त विभाग मिलना तय है?
अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अनिल पाटिल ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें CM से हुई चर्चा के विस्तृत नतीजों की जानकारी नहीं है। मामला अभी वार्ता के स्तर पर है।
महायुति सरकार में विभाग-बंटवारे का विवाद क्यों उठा है?
महाराष्ट्र में बजट सत्र नजदीक है और साथ ही विधान परिषद, जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव भी आने वाले हैं। इन परिस्थितियों में गठबंधन के सभी दल प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण वाले विभागों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
CM फडणवीस से NCP की मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
अनिल पाटिल के अनुसार, वित्त और नियोजन विभाग के अलावा विधान परिषद चुनाव, जिला सहकारी बैंक चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों पर भी चर्चा संभावित थी। हालाँकि मुलाकात के विस्तृत ब्यौरे सार्वजनिक नहीं किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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