वित्त और नियोजन विभाग पर NCP का दावा: अनिल पाटिल बोले — यह हक है, मांग नहीं
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में बजट सत्र से पहले महायुति गठबंधन के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। 25 अक्टूबर 2026 को देवगिरी बंगले पर हुई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP, अजित पवार गुट) की कोर कमेटी की बैठक के बाद पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। इसके बाद NCP ने वित्त विभाग और नियोजन विभाग पर अपना दावा एक बार फिर दोहराया है।
NCP का तर्क: चुनाव-पूर्व फॉर्मूले पर आधारित है दावा
NCP विधायक और पूर्व मंत्री अनिल पाटिल ने जलगांव से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह कोई नया या एकतरफा दावा नहीं, बल्कि पार्टी का संवैधानिक हक है। उन्होंने कहा, 'यह कोई नया दावा नहीं है, बल्कि पार्टी का हक है।' पाटिल के अनुसार, 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद जब मंत्रिमंडल गठन के दौरान विभागों का बंटवारा हुआ था, तब वित्त और नियोजन दोनों विभाग NCP के हिस्से में आए थे।
उनका तर्क है कि चुनाव-पूर्व जो फॉर्मूला तय हुआ था, उसी के आधार पर वर्तमान मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी ये विभाग NCP को मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को वित्त विभाग और नियोजन विभाग मिला था। अब मंत्रिमंडल विस्तार के बाद यह पोर्टफोलियो दोबारा NCP को मिलना चाहिए।'
कोर कमेटी की बैठक: नियमित प्रक्रिया या रणनीतिक संकेत?
अनिल पाटिल ने देवगिरी बंगले पर हुई बैठक को 'नियमित प्रक्रिया' बताया। उन्होंने कहा, 'आज कोर कमेटी की बैठक हुई है और यह एक नियमित प्रक्रिया है। हर पार्टी की तरह हमारी पार्टी की भी आठ दिन, पंद्रह दिन या एक महीने में कोर कमेटी की बैठक होती रहती है।' हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि बैठक में हुई विस्तृत चर्चा की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में बजट सत्र नजदीक है और महायुति के तीनों घटक दलों — भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और NCP (अजित पवार गुट) — के बीच प्रमुख विभागों पर तनातनी की खबरें सामने आ रही हैं।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के अन्य एजेंडे
पाटिल ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री फडणवीस से मुलाकात केवल विभागों के बंटवारे तक सीमित नहीं थी। उनके अनुसार, विधान परिषद चुनाव, जिला सहकारी बैंकों के चुनाव और आगामी जिला परिषद एवं पंचायत समिति के स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी चर्चा हो सकती है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में आने वाले महीनों में कई स्थानीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं, जिनमें गठबंधन की एकजुटता और सीट-बंटवारे पर सहमति महायुति के सभी तीन दलों के लिए रणनीतिक रूप से अहम है।
महायुति में विभाग-बंटवारे की पृष्ठभूमि
यह Nवीं बार नहीं है जब महायुति के भीतर विभागों पर असहमति सार्वजनिक हुई हो। 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति को बड़ी जीत मिली थी, लेकिन मंत्रिमंडल गठन के दौरान भी सीटों और विभागों को लेकर लंबी वार्ता हुई थी। आलोचकों का कहना है कि वित्त विभाग जैसे शक्तिशाली पोर्टफोलियो पर नियंत्रण रखना किसी भी गठबंधन सहयोगी के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है।
आने वाले दिनों में बजट सत्र से पहले यह विवाद महायुति की आंतरिक एकता की असली परीक्षा बन सकता है।