लिव-इन पंजीकरण अनिवार्य हो, CSAM हटाने की SOP सराहनीय: BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने 15 जुलाई को नई दिल्ली में तीन अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी — समान नागरिक संहिता (UCC) के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य बनाना, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) हटाने की केंद्र सरकार की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी (SP) पर लगाए गए आरोप। खंडेलवाल ने कहा कि ये तीनों विषय सामाजिक व्यवस्था और कानूनी जवाबदेही से सीधे जुड़े हैं।
लिव-इन पंजीकरण: UCC का अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए
खंडेलवाल ने कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय ने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता दी है, तो ऐसे संबंधों का पंजीकरण भी उतना ही ज़रूरी है। उनके अनुसार, पंजीकरण यह सुनिश्चित करेगा कि ये रिश्ते कानून और न्यायालय की मंशा के अनुरूप स्थापित हों। इससे संबंधित पक्षों के अधिकारों की रक्षा होगी और भविष्य में उत्पन्न होने वाले कानूनी विवादों की संख्या में कमी आएगी।
उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के इस दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना की और इसे 'सकारात्मक एवं आवश्यक कदम' बताया। गौरतलब है कि UCC को लेकर देश में व्यापक बहस जारी है और उत्तराखंड इसे लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है।
CSAM हटाने की SOP: सरकार का स्वागत योग्य निर्णय
केंद्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बाल यौन शोषण सामग्री हटाने के लिए जारी SOP का खंडेलवाल ने खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सामग्री भारतीय समाज के मूल्यों और संस्कारों के सर्वथा विरुद्ध है। उनके शब्दों में, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रसार एक गंभीर सामाजिक और कानूनी अपराध है, जिसे किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
खंडेलवाल ने यह भी कहा कि इस पहल से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ेगी और डिजिटल माध्यमों को बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकार, समाज और संबंधित संस्थाओं को इस दिशा में मिलकर काम करना होगा।
समाजवादी पार्टी पर योगी के आरोप: खंडेलवाल ने किया समर्थन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी पर लगाए गए आरोपों का समर्थन करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि अतीत में SP ने भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे और हिंदू धार्मिक आस्थाओं के प्रति उनका रवैया विवादास्पद रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि SP ने राजनीतिक स्वार्थ के लिए एक विशेष वर्ग को खुश करने की कोशिश में धार्मिक भावनाओं की अनदेखी की।
खंडेलवाल ने कहा कि यदि वही दल अब राम मंदिर और आस्था की बात करता है, तो यह उसके पुराने रुख से पूरी तरह उलट है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना उस कहावत से की — '900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली' — और कहा कि जनता दलों के पुराने और मौजूदा रुख दोनों को भली-भाँति देख रही है।
आगे की राह
खंडेलवाल के बयान ऐसे समय में आए हैं जब UCC के क्रियान्वयन और डिजिटल सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत चर्चा तेज़ हो रही है। CSAM के खिलाफ SOP का प्रभावी क्रियान्वयन और लिव-इन पंजीकरण की व्यावहारिक रूपरेखा — दोनों ही आने वाले महीनों में विधायी और न्यायिक परीक्षण से गुज़रेंगे।