लखनऊ में हिंदू महासभा का कथित धर्मांतरण के खिलाफ प्रदर्शन, SIT जांच और सख्त कानून की मांग
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारत हिंदू महासभा ने 11 अगस्त 2026 को लखनऊ में कथित धर्मांतरण गतिविधियों के विरोध में प्रदर्शन किया। संगठन के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए धर्मांतरण के आरोपों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग रखी।
प्रदर्शन की मुख्य मांगें
चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि देश में ईसाई मिशनरियों का प्रभाव बढ़ रहा है और इसके पीछे कथित तौर पर विदेशी फंडिंग की भूमिका है, जिसकी जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर, बेरोजगार और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को इलाज, आर्थिक सहायता और 'चंगाई सभा' जैसे आयोजनों के माध्यम से कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठनों को मिलने वाली विदेशी या अन्य वित्तीय सहायता के स्रोतों की जांच अनिवार्य है।
SIT गठन और मुख्यमंत्री से अपील
हिंदू महासभा प्रवक्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की जांच के लिए तत्काल SIT गठित करने की माँग की। उन्होंने कहा कि जांच के ज़रिए धर्मांतरण से जुड़े आरोपों और कथित फंडिंग के स्रोतों का पता लगाया जाना चाहिए, और यदि किसी संगठन या व्यक्ति के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधियों के प्रमाण मिलें तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
तीन मामलों का संदर्भ और निष्पक्षता पर सवाल
चतुर्वेदी ने दारा सिंह पाल, आसाराम बापू और गौतम खट्टर के मामलों का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दारा सिंह पाल को ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था, और सजा पूरी होने के बावजूद उनकी कानूनी स्थिति पर ध्यान दिया जाना चाहिए। आसाराम बापू और गौतम खट्टर के मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदूवादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई में निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं।
चर्च भूमि और निर्माण विवाद
चतुर्वेदी ने चर्चों और उनसे जुड़ी जमीनों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर चर्च, स्कूल और अन्य संस्थानों के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीनें लंबे समय से उपयोग में हैं। उन्होंने सरकार से माँग की कि ऐसी जमीनों की लीज डीड और राजस्व दस्तावेजों की जांच कराई जाए तथा जिन जमीनों की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है, उनकी कानूनी स्थिति की समीक्षा हो। इसके अलावा, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कथित रूप से बिना अनुमति बनाए जा रहे चर्चों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से सभी धार्मिक स्थलों का सर्वे कराने की माँग की।
विदेशी फंडिंग और कानूनी व्यवस्था पर जोर
प्रदर्शनकारियों ने कथित धर्मांतरण गतिविधियों के वित्तीय स्रोतों की जांच की माँग भी उठाई। चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार द्वारा विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों पर उठाए जा रहे कदमों का स्वागत किया और कहा कि धर्मांतरण को रोकने के लिए एक प्रभावी कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब देशभर में धर्मांतरण-विरोधी कानूनों को लेकर बहस तेज है और कई राज्यों में इस विषय पर विधायी कदम उठाए जा रहे हैं।