11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लखनऊ में हिंदू महासभा का कथित धर्मांतरण के खिलाफ प्रदर्शन, SIT जांच और सख्त कानून की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लखनऊ में हिंदू महासभा का कथित धर्मांतरण के खिलाफ प्रदर्शन, SIT जांच और सख्त कानून की मांग

सारांश

अखिल भारत हिंदू महासभा ने 11 अगस्त को लखनऊ में कथित धर्मांतरण के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने CM योगी आदित्यनाथ से SIT गठन, विदेशी फंडिंग की जांच और सख्त धर्मांतरण-विरोधी कानून बनाने की मांग रखी।

मुख्य बातें

अखिल भारत हिंदू महासभा ने 11 अगस्त 2026 को लखनऊ में कथित धर्मांतरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल SIT गठित करने की माँग की।
संगठन ने कथित विदेशी फंडिंग के स्रोतों की जांच और धर्मांतरण रोकने के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था की माँग रखी।
चतुर्वेदी ने चर्च भूमि की लीज डीड और ग्रामीण क्षेत्रों में कथित अनधिकृत धार्मिक निर्माण की जांच की भी माँग उठाई।
दारा सिंह पाल , आसाराम बापू और गौतम खट्टर के मामलों का हवाला देते हुए प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए।

अखिल भारत हिंदू महासभा ने 11 अगस्त 2026 को लखनऊ में कथित धर्मांतरण गतिविधियों के विरोध में प्रदर्शन किया। संगठन के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए धर्मांतरण के आरोपों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग रखी।

प्रदर्शन की मुख्य मांगें

चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि देश में ईसाई मिशनरियों का प्रभाव बढ़ रहा है और इसके पीछे कथित तौर पर विदेशी फंडिंग की भूमिका है, जिसकी जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर, बेरोजगार और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को इलाज, आर्थिक सहायता और 'चंगाई सभा' जैसे आयोजनों के माध्यम से कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठनों को मिलने वाली विदेशी या अन्य वित्तीय सहायता के स्रोतों की जांच अनिवार्य है।

SIT गठन और मुख्यमंत्री से अपील

हिंदू महासभा प्रवक्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की जांच के लिए तत्काल SIT गठित करने की माँग की। उन्होंने कहा कि जांच के ज़रिए धर्मांतरण से जुड़े आरोपों और कथित फंडिंग के स्रोतों का पता लगाया जाना चाहिए, और यदि किसी संगठन या व्यक्ति के विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधियों के प्रमाण मिलें तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।

तीन मामलों का संदर्भ और निष्पक्षता पर सवाल

चतुर्वेदी ने दारा सिंह पाल, आसाराम बापू और गौतम खट्टर के मामलों का उल्लेख करते हुए प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दारा सिंह पाल को ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था, और सजा पूरी होने के बावजूद उनकी कानूनी स्थिति पर ध्यान दिया जाना चाहिए। आसाराम बापू और गौतम खट्टर के मामलों का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदूवादी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई में निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं।

चर्च भूमि और निर्माण विवाद

चतुर्वेदी ने चर्चों और उनसे जुड़ी जमीनों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर चर्च, स्कूल और अन्य संस्थानों के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीनें लंबे समय से उपयोग में हैं। उन्होंने सरकार से माँग की कि ऐसी जमीनों की लीज डीड और राजस्व दस्तावेजों की जांच कराई जाए तथा जिन जमीनों की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है, उनकी कानूनी स्थिति की समीक्षा हो। इसके अलावा, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में कथित रूप से बिना अनुमति बनाए जा रहे चर्चों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से सभी धार्मिक स्थलों का सर्वे कराने की माँग की।

विदेशी फंडिंग और कानूनी व्यवस्था पर जोर

प्रदर्शनकारियों ने कथित धर्मांतरण गतिविधियों के वित्तीय स्रोतों की जांच की माँग भी उठाई। चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार द्वारा विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों पर उठाए जा रहे कदमों का स्वागत किया और कहा कि धर्मांतरण को रोकने के लिए एक प्रभावी कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब देशभर में धर्मांतरण-विरोधी कानूनों को लेकर बहस तेज है और कई राज्यों में इस विषय पर विधायी कदम उठाए जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी SIT और नए कानून की माँग यह संकेत देती है कि संगठन मौजूदा कानूनी ढाँचे को अपर्याप्त मानता है। विदेशी फंडिंग और भूमि उपयोग जैसे मुद्दों को एक साथ उठाना इस आंदोलन को विधायी दबाव से परे एक व्यापक प्रशासनिक एजेंडे की दिशा में ले जाता है, जिसके निहितार्थों पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श जरूरी है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदू महासभा ने लखनऊ में किस मुद्दे पर प्रदर्शन किया?
अखिल भारत हिंदू महासभा ने 11 अगस्त 2026 को लखनऊ में कथित धर्मांतरण गतिविधियों के विरोध में प्रदर्शन किया। संगठन ने SIT जांच, विदेशी फंडिंग की पड़ताल और सख्त धर्मांतरण-विरोधी कानून बनाने की माँग रखी।
शिशिर चतुर्वेदी ने SIT गठन की माँग क्यों की?
हिंदू महासभा प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी का आरोप है कि कथित धर्मांतरण नेटवर्क छोटे इलाकों में इलाज, आर्थिक सहायता और 'चंगाई सभा' के माध्यम से संचालित हो रहा है। उन्होंने CM योगी आदित्यनाथ से SIT बनाकर इन आरोपों और विदेशी फंडिंग के स्रोतों की जांच कराने की अपील की।
प्रदर्शन में चर्च भूमि का मुद्दा क्यों उठाया गया?
चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर चर्च और शैक्षणिक संस्थानों के नाम पर जमीनें लंबे समय से उपयोग में हैं और कुछ की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने सरकार से लीज डीड और राजस्व दस्तावेजों की जांच कराने की माँग की।
प्रदर्शन में दारा सिंह पाल का नाम क्यों लिया गया?
चतुर्वेदी ने दारा सिंह पाल का उल्लेख इस संदर्भ में किया कि वे ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए थे। उन्होंने आसाराम बापू और गौतम खट्टर के मामलों के साथ इसे जोड़ते हुए हिंदूवादी नेताओं के मामलों में प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण-विरोधी कानून की क्या स्थिति है?
उत्तर प्रदेश में पहले से ही धर्मांतरण-विरोधी कानून लागू है। हिंदू महासभा का मानना है कि यह कानून पर्याप्त नहीं है और इसे और प्रभावी बनाने की जरूरत है, इसीलिए संगठन ने नए सख्त कानूनी प्रावधानों की माँग रखी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 4 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले