क्या लखनऊ के डॉ. राजेंद्र प्रसाद और केके ठकराल ने मेडिकल क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है?
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लखनऊ, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राजधानी लखनऊ के लिए यह एक गर्व का क्षण है, क्योंकि यहाँ के दो प्रसिद्ध डॉक्टरों को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। इनमें प्रसिद्ध श्वसन एवं टीबी विशेषज्ञ और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद और आयुर्वेद के शल्य तंत्र से जुड़े केके ठकराल का नाम शामिल है।
पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित डॉ. राजेंद्र प्रसाद को केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग का जनक भी माना जाता है। उन्होंने केजीएमयू में एक छात्र के रूप में कदम रखा और बाद में उसी विभाग के विभागाध्यक्ष बने। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्र प्रेस से खास बातचीत में बताया कि उनके पिता स्वर्गीय गोपीचंद कपड़े के व्यापारी थे और मां स्वर्गीय विजय लक्ष्मी गृहिणी थीं। उनके बेटे डॉ. निखित गुप्ता, डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में शिक्षक हैं, और बेटी डॉ. पल्लवी डेंटिस्ट हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपनी पत्नी मीरा गुप्ता और पूरे परिवार को दिया।
उन्होंने कहा कि लगभग पांच दशकों की प्रैक्टिस में, उन्होंने अपने मरीजों के साथ मधुर संबंध बनाए। वह आने वाली पीढ़ी के डॉक्टरों को सलाह देते हैं कि मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करें, जिससे उनकी जल्दी रिकवरी होती है।
आयुर्वेद के शल्य तंत्र से जुड़े केके ठकराल को भी पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि भारत के जिस हिस्से को आज पाकिस्तान कहा जाता है, वहाँ उनका निवास सर्वोदय जिले में था। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय वे लोग भारत आ गए और हरियाणा के यमुनानगर में बस गए। उनके पिता चिकित्सक थे और प्रैक्टिस करते थे। प्रारंभिक समय में परिस्थितियाँ कठिन थीं, लेकिन उनके पिता ने पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया।
उन्होंने बताया कि इंटरमीडिएट पास करने के बाद उनके पिता ने उन्हें लखनऊ स्थित आयुर्वेदिक कॉलेज में भेजा। वहाँ उन्होंने कड़ी मेहनत की और अपने पिता की प्रेरणा के कारण हर विषय में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उस समय एम.एस. (आयुर्वेद) की डिग्री नई थी और वह पहले बैच के टॉपर रहे।
केके ठकराल ने कहा, 'मैंने 1964 में लखनऊ से और 1968 में बनारस से शिक्षा पूर्ण की। मैंने अपने कर्तव्यों को हमेशा समयबद्धता और निष्ठा के साथ निभाया है। मेरे पास आने वाले रोगियों में लगभग 70-80 प्रतिशत गरीब वर्ग से होते हैं, जिन्हें सस्ती चिकित्सा की आवश्यकता होती है। आयुर्वेद एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जो कम खर्च में उपलब्ध हो सकती है।'
पीएम मोदी की आयुष और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, 'आजकल चिकित्सा प्रणाली में बदलाव आया है और कई जगह अत्यधिक फीस ली जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयुष और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की पहल अत्यंत सराहनीय है।'