22 अगस्त 2026
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मध्य प्रदेश शराब टेंडर विवाद: जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से माँगी उच्चस्तरीय जाँच

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मध्य प्रदेश शराब टेंडर विवाद: जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से माँगी उच्चस्तरीय जाँच

सारांश

कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर शराब टेंडर में चार समूहों के कथित 70% एकाधिकार और 2012 से जारी पैटर्न की जाँच माँगी — यह सवाल सीधे राज्य राजस्व और प्रतिस्पर्धा नीति की पारदर्शिता पर है।

मुख्य बातें

जीतू पटवारी ने 22 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर शराब टेंडर की उच्चस्तरीय जाँच की माँग की।
दावों के अनुसार चार समूहों के पास मध्य प्रदेश के शराब बाज़ार का लगभग 70% हिस्सा है।
यह कथित एकाधिकार वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक यानी करीब 14 वर्षों से चला आ रहा है।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की 2022 की कार्रवाई के बावजूद पुराना पैटर्न जारी रहने का आरोप है।
पटवारी ने सभी टेंडरों का स्वतंत्र ऑडिट, कंपनियों की जानकारी सार्वजनिक करने और कार्टेल जाँच की माँग की है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 22 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य की शराब टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जाँच कराने की माँग की है। पटवारी का आरोप है कि वर्ष 2012-13 से 2026-27 तक चुनिंदा कंपनियाँ इस कारोबार पर एकाधिकार बनाए हुए हैं और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

मुख्य आरोप और दावे

पटवारी ने अपने पत्र में दावा किया कि सामने आई जानकारियों के अनुसार मध्य प्रदेश के शराब बाज़ार में चार समूहों के पास लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उनके अनुसार कई जिलों में वर्षों से उन्हीं कंपनियों को लगातार टेंडर मिलते रहे हैं, जो महज संयोग नहीं हो सकता।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था लागू होने के बावजूद यदि परिणामों में पुराने पैटर्न की पुनरावृत्ति हो रही है, तो सरकार को प्रदेश की जनता के समक्ष इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की कार्रवाई का संदर्भ

पटवारी ने याद दिलाया कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की कार्रवाई के बाद वर्ष 2022 में कथित तौर पर इस पैटर्न के टूटने की बात सामने आई थी। आलोचकों का कहना है कि यदि उसके बाद भी वही स्थिति दोबारा दिखाई दे रही है, तो यह निष्पक्ष जाँच की माँग को और अधिक प्रासंगिक बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में शराब नीति और राजस्व प्रबंधन पहले से ही चर्चा में है।

पटवारी की प्रमुख माँगें

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से निम्नलिखित कदम उठाने की अपील की है:

पहली — वर्ष 2012-13 से अब तक प्रदेश में हुए सभी प्रमुख शराब टेंडरों का स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय ऑडिट कराया जाए। दूसरी — किन कंपनियों ने किन जिलों में कितने वर्षों तक लगातार टेंडर प्राप्त किए, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। तीसरी — प्रत्येक टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों, उनकी बोली, पात्रता और अंतिम चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।

इसके अलावा पटवारी ने माँग की है कि यदि किसी कंपनी या समूह द्वारा बाज़ार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने, मिलीभगत, कार्टेल या अधिकारी-कंपनी गठजोड़ की आशंका हो, तो उसकी स्वतंत्र जाँच की जाए।

सरकार पर सवाल

पटवारी ने मुख्यमंत्री से सीधे पूछा कि सरकार हज़ारों करोड़ रुपये का राजस्व देने वाले कारोबारियों के हितों की रक्षा कर रही है या प्रदेश की जनता और राजस्व के हितों की? उनका कहना है कि सरकार का दायित्व किसी कारोबारी समूह को संरक्षण देना नहीं, बल्कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।

आगे क्या

अभी तक मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। गौरतलब है कि यह माँग विधानसभा सत्र के निकट आने के समय उठाई गई है, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक तीखा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्यापित हो, तो यह राज्य की प्रतिस्पर्धा नीति की विफलता को उजागर करता है। असली परीक्षा यह है कि BJP सरकार इसे महज विपक्षी आरोप मानकर खारिज करती है या पारदर्शी ऑडिट से जनता का भरोसा जीतती है — क्योंकि शराब राजस्व मध्य प्रदेश के बजट की एक बड़ी धुरी है और उसमें अपारदर्शिता जनहित का सीधा नुकसान है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीतू पटवारी ने मध्य प्रदेश शराब टेंडर जाँच की माँग क्यों की?
पटवारी का आरोप है कि 2012-13 से 2026-27 तक चार समूहों ने शराब बाज़ार के करीब 70% पर एकाधिकार बनाए रखा और कई जिलों में वर्षों तक उन्हीं कंपनियों को टेंडर मिलते रहे। उनका कहना है कि ऑनलाइन टेंडर व्यवस्था लागू होने के बाद भी यही पैटर्न जारी रहना सरकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) का इस मामले से क्या संबंध है?
कथित तौर पर 2022 में CCI की कार्रवाई के बाद शराब टेंडर के पुराने पैटर्न के टूटने की बात सामने आई थी। पटवारी का आरोप है कि उसके बाद भी वही स्थिति दोबारा दिखाई दे रही है, जो स्वतंत्र जाँच को और अधिक जरूरी बनाती है।
पटवारी ने मुख्यमंत्री से क्या-क्या माँगें की हैं?
उन्होंने 2012-13 से अब तक के सभी प्रमुख शराब टेंडरों का उच्चस्तरीय ऑडिट, कंपनियों और उनकी बोलियों की जानकारी सार्वजनिक करना, तथा मिलीभगत, कार्टेल या अधिकारी-कंपनी गठजोड़ की आशंका पर स्वतंत्र जाँच की माँग की है।
मध्य प्रदेश सरकार ने इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अभी तक मुख्यमंत्री मोहन यादव के कार्यालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रदेश इकाई का भी कोई बयान उपलब्ध नहीं है।
यह मामला आम जनता और राज्य के राजस्व को कैसे प्रभावित करता है?
शराब से मध्य प्रदेश को हज़ारों करोड़ रुपये का सालाना राजस्व मिलता है। यदि टेंडर प्रक्रिया में एकाधिकार या मिलीभगत साबित होती है, तो इसका सीधा असर प्रतिस्पर्धा की कमी, संभावित राजस्व हानि और जनता के हितों पर पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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