मध्य प्रदेश में सुगम परिवहन सेवा: सीएम मोहन यादव का आरोप, कांग्रेस ने बंद की थी बस सेवा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जून 2025 को भोपाल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को ध्वस्त करने का काम पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने किया था। यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी सरकार मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत प्रदेश में बस संचालन पुनः शुरू करने की तैयारी में है।
मुख्यमंत्री का बयान और कांग्रेस पर आरोप
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, 'कांग्रेस शासनकाल में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बंद करने का कार्य किया गया था, लेकिन हमारी सरकार न सिर्फ प्रदेश में बेहतर और आधुनिक सड़कों का तेजी से निर्माण कर रही है, बल्कि जल्द ही नागरिकों को राज्य परिवहन की विशेष सुविधाओं का लाभ भी मिलने जा रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि जनसुविधाओं के विस्तार और प्रदेश के समग्र विकास के लिए उनकी सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्यरत है।
बोर्ड बैठक और योजना का खाका
सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संचालक मंडल की बैठक संपन्न हुई। बोर्ड के प्रबंध संचालक मनीष सिंह द्वारा विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। बैठक में संपूर्ण मध्य प्रदेश को 7 क्षेत्रों — इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा — में विभाजित करते हुए इन शहरों में पूर्व से क्रियाशील शहरी परिवहन कंपनियों की जानकारी साझा की गई।
इंदौर से होगी शुरुआत, जुलाई का लक्ष्य
पीएम ई-बस सेवा और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों का संचालन सर्वप्रथम इंदौर क्षेत्र से प्रारंभ किया जाएगा। इंदौर संभाग के समस्त जिले इस योजना के दायरे में आएंगे और अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड संपूर्ण इंदौर संभाग में बसों के संचालन का कार्यभार संभालेगी। इंदौर क्षेत्र से तीन श्रेणी की बसों का संचालन जुलाई 2025 से प्रारंभ किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में वर्षों से सुचारु सार्वजनिक बस सेवा का अभाव रहा है, जिसे लेकर आम नागरिकों में असंतोष रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मोहन यादव सरकार इस मुद्दे को कांग्रेस की विफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों से पहले जनसुविधाओं के विस्तार की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। सुगम परिवहन सेवा के सफल क्रियान्वयन से लाखों यात्रियों को किफायती और व्यवस्थित परिवहन का विकल्प मिल सकता है।