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मध्य प्रदेश कैबिनेट ने विकसित भारत-जी राम जी योजना को दी मंजूरी, हर जिले में लोकपाल नियुक्ति का फैसला

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मध्य प्रदेश कैबिनेट ने विकसित भारत-जी राम जी योजना को दी मंजूरी, हर जिले में लोकपाल नियुक्ति का फैसला

सारांश

मोहन यादव कैबिनेट का यह बैठक महज़ बजट-अनुमोदन नहीं था — ₹41,000 करोड़ से अधिक के फैसलों में ग्रामीण विकास, सड़क, शिक्षा, डेयरी और स्वास्थ्य सब एक साथ। हर जिले में लोकपाल की नियुक्ति और बायोमेट्रिक निगरानी योजना को जवाबदेह बनाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

मोहन यादव कैबिनेट ने 1 सितंबर 2026 को ₹41,000 करोड़ से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी।
विकसित भारत-जी राम जी योजना के लिए ₹29,619 करोड़ स्वीकृत; राज्यांश ₹10,574 करोड़ (60-40 अनुपात)।
प्रत्येक जिले में लोकपाल नियुक्त होगा; डिजिटल प्लेटफॉर्म से शिकायत निवारण।
ग्राम पंचायतें क, ख, ग श्रेणियों में वर्गीकृत; बायोमेट्रिक उपस्थिति और 6 माह में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य।
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का पुनर्गठन; भोपाल, उज्जैन, जबलपुर में 3 नए तकनीकी विश्वविद्यालय।
ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन सीमा 25% से बढ़ाकर 60% ; NDDB के साथ ₹2,973 करोड़ की डेयरी योजना।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में 1 सितंबर 2026 को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्य प्रदेश सरकार ने 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' के क्रियान्वयन के लिए ₹29,619 करोड़ के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया। इसके साथ ही शिकायत निवारण को तेज़ और पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति का निर्णय भी लिया गया। कुल मिलाकर इस बैठक में ₹41,000 करोड़ से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति दी गई।

विकसित भारत-जी राम जी योजना: वित्तीय ढाँचा

योजना में ₹29,619 करोड़ का वित्तीय प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें राज्य और केंद्र के बीच 60-40 का अनुपात निर्धारित है। राज्यांश के रूप में ₹10,574 करोड़ मध्य प्रदेश सरकार वहन करेगी। इसके अतिरिक्त पाँच वर्षों के प्रशासनिक व्यय के लिए ₹946 करोड़ भी राज्य शासन द्वारा दिए जाएँगे।

भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ग्राम पंचायतों को विकास मानदंडों के आधार पर क, ख और ग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा, ताकि वित्तीय आवंटन आवश्यकता-आधारित और पारदर्शी हो। योजना में बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य किया गया है।

जिला स्तर पर लोकपाल और डिजिटल शिकायत निवारण

त्वरित शिकायत निवारण के लिए प्रत्येक जिले में एक 'लोकपाल' नियुक्त किया जाएगा, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों का निराकरण करेंगे। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण योजनाओं में भ्रष्टाचार और देरी को लेकर राज्यभर में शिकायतें सामने आती रही हैं। गौरतलब है कि डिजिटल निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण का संयोजन योजना को जवाबदेह बनाने का प्रयास है।

सड़क, शिक्षा और डेयरी: अन्य प्रमुख निर्णय

राज्य की सड़क कनेक्टिविटी को बल देने के लिए पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन निर्माण हेतु ₹3,774 करोड़ और मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथोन मार्ग के लिए ₹3,272 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का पुनर्गठन करते हुए भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया। दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण और 'सांची' ब्रांड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से ₹2,973 करोड़ की डेयरी विकास योजना को भी मंजूरी दी गई।

स्वास्थ्य, किसान और नए जिले

स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए चिकित्सा उपकरणों और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण हेतु ₹1,400 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई। किसानों के हित में पंजीकृत कृषकों से ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के निर्णय का अनुसमर्थन किया गया।

नवगठित जिलों — मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी — में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सामाजिक न्याय और आयुष विभागों में नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई। इन निर्णयों से राज्य के दूरदराज़ क्षेत्रों में शासन की पहुँच और मजबूत होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

619 करोड़ की यह स्वीकृति और हर जिले में लोकपाल की घोषणा कागज़ पर ठोस दिखती है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। ग्राम पंचायतों को श्रेणियों में बाँटना और सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य करना सही दिशा है, पर मध्य प्रदेश में इससे पहले भी ग्रामीण योजनाओं में डिजिटल निगरानी के वादे हुए हैं जो ज़मीन पर पूरी तरह नहीं उतरे। लोकपाल की स्वतंत्रता और उनकी जवाबदेही का ढाँचा अभी स्पष्ट नहीं है — बिना इसके, यह पद एक और प्रशासनिक परत बनकर रह सकता है। एक बैठक में ₹41,000 करोड़ के फैसलों की व्यापकता प्रभावशाली है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर समन्वय और निगरानी की चुनौती को कम नहीं आँकना चाहिए।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित भारत-जी राम जी योजना क्या है और इसके लिए कितना बजट मंजूर हुआ?
विकसित भारत-जी राम जी योजना मध्य प्रदेश में ग्रामीण विकास और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने की केंद्र-राज्य साझा योजना है। मोहन यादव कैबिनेट ने 1 सितंबर 2026 को इसके लिए ₹29,619 करोड़ के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया, जिसमें राज्यांश ₹10,574 करोड़ है।
हर जिले में लोकपाल की नियुक्ति से क्या बदलेगा?
प्रत्येक जिले में नियुक्त लोकपाल डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों का त्वरित निराकरण करेंगे। यह व्यवस्था योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाई गई है।
ग्राम पंचायतों को श्रेणियों में क्यों बाँटा जाएगा?
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ग्राम पंचायतों को विकास मानदंडों के आधार पर क, ख और ग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। इसका उद्देश्य वित्तीय आवंटन को आवश्यकता-आधारित और पारदर्शी बनाना है, ताकि पिछड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता मिल सके।
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पुनर्गठन का क्या मतलब है?
कैबिनेट ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का पुनर्गठन कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन अलग-अलग नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह कदम उच्च तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय संतुलन और गुणवत्ता विस्तार के लिए उठाया गया है।
किसानों के लिए ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन सीमा में क्या बदलाव हुआ?
पंजीकृत कृषकों से ग्रीष्मकालीन मूंग की उपज के उपार्जन की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है। इससे अधिक किसानों को सरकारी खरीद का लाभ मिल सकेगा और उनकी आय में सुधार की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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