मध्य प्रदेश कैबिनेट ने विकसित भारत-जी राम जी योजना को दी मंजूरी, हर जिले में लोकपाल नियुक्ति का फैसला
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में 1 सितंबर 2026 को हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्य प्रदेश सरकार ने 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' के क्रियान्वयन के लिए ₹29,619 करोड़ के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया। इसके साथ ही शिकायत निवारण को तेज़ और पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति का निर्णय भी लिया गया। कुल मिलाकर इस बैठक में ₹41,000 करोड़ से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति दी गई।
विकसित भारत-जी राम जी योजना: वित्तीय ढाँचा
योजना में ₹29,619 करोड़ का वित्तीय प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें राज्य और केंद्र के बीच 60-40 का अनुपात निर्धारित है। राज्यांश के रूप में ₹10,574 करोड़ मध्य प्रदेश सरकार वहन करेगी। इसके अतिरिक्त पाँच वर्षों के प्रशासनिक व्यय के लिए ₹946 करोड़ भी राज्य शासन द्वारा दिए जाएँगे।
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ग्राम पंचायतों को विकास मानदंडों के आधार पर क, ख और ग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा, ताकि वित्तीय आवंटन आवश्यकता-आधारित और पारदर्शी हो। योजना में बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य किया गया है।
जिला स्तर पर लोकपाल और डिजिटल शिकायत निवारण
त्वरित शिकायत निवारण के लिए प्रत्येक जिले में एक 'लोकपाल' नियुक्त किया जाएगा, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों का निराकरण करेंगे। यह कदम ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण योजनाओं में भ्रष्टाचार और देरी को लेकर राज्यभर में शिकायतें सामने आती रही हैं। गौरतलब है कि डिजिटल निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण का संयोजन योजना को जवाबदेह बनाने का प्रयास है।
सड़क, शिक्षा और डेयरी: अन्य प्रमुख निर्णय
राज्य की सड़क कनेक्टिविटी को बल देने के लिए पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन निर्माण हेतु ₹3,774 करोड़ और मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथोन मार्ग के लिए ₹3,272 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई।
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का पुनर्गठन करते हुए भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया। दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण और 'सांची' ब्रांड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से ₹2,973 करोड़ की डेयरी विकास योजना को भी मंजूरी दी गई।
स्वास्थ्य, किसान और नए जिले
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए चिकित्सा उपकरणों और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण हेतु ₹1,400 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई। किसानों के हित में पंजीकृत कृषकों से ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के निर्णय का अनुसमर्थन किया गया।
नवगठित जिलों — मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी — में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सामाजिक न्याय और आयुष विभागों में नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई। इन निर्णयों से राज्य के दूरदराज़ क्षेत्रों में शासन की पहुँच और मजबूत होने की उम्मीद है।