तमिलनाडु में 1 जुलाई से लागू होगी वीबी-जी राम जी योजना, ₹4,500–5,000 करोड़ सालाना बोझ पर चिंता
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने केंद्र की संशोधित 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन' — जिसे वीबी-जी राम जी योजना कहा जाता है — को 1 जुलाई 2026 से राज्य में लागू करने का निर्णय लिया है। हालाँकि, राज्य सरकार ने नई 60:40 फंडिंग व्यवस्था के तहत अपने खजाने पर पड़ने वाले बढ़े हुए वित्तीय दबाव को लेकर गहरी चिंता जताई है। अधिकारियों के अनुसार, नई संरचना के तहत राज्य पर सालाना ₹4,500 से ₹5,000 करोड़ तक का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है।
योजना की फंडिंग संरचना
नई व्यवस्था के अंतर्गत कुल खर्च का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत तमिलनाडु सरकार वहन करेगी। केंद्र ने इस योजना के लिए तमिलनाडु को ₹7,585.49 करोड़ आवंटित किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष के शेष नौ महीनों में योजना को क्रियान्वित करने के लिए राज्य को ₹3,034.19 करोड़ का अपना योगदान देना होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु पहले से ही राजकोषीय दबाव में है। गौरतलब है कि पिछली फंडिंग व्यवस्था में राज्य का वित्तीय योगदान वर्तमान अनुपात की तुलना में काफी कम था, जिससे यह बदलाव राज्य के बजट पर एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव बन जाता है।
राज्य की आपत्तियाँ और चिंताएँ
वित्तीय बोझ के अलावा, तमिलनाडु सरकार ने योजना के कुछ संचालन संबंधी प्रावधानों पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ जिलों में 60 दिनों तक रोजगार कार्यों पर रोक लगाने का प्रावधान ग्रामीण आजीविका और रोजगार के अवसरों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सकता है।
उनका तर्क है कि ये पाबंदियाँ स्थानीय कृषि चक्र और मौसमी रोजगार की जरूरतों को पूरी तरह नहीं दर्शातीं — खासकर उन जिलों में जहाँ खेती का पैटर्न राष्ट्रीय औसत से भिन्न है। राज्य सरकार इससे पहले भी केंद्र प्रायोजित ग्रामीण रोजगार योजनाओं की फंडिंग व्यवस्था में बदलाव को लेकर केंद्र के समक्ष अपनी आपत्तियाँ दर्ज करा चुकी है।
तमिलनाडु की ग्रामीण रोजगार में भूमिका
वरिष्ठ अधिकारियों ने रेखांकित किया कि तमिलनाडु पिछले दो दशकों से ग्रामीण रोजगार और आजीविका कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि वह ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आजीविका सहायता प्रदान करना जारी रखना चाहती है, भले ही नई फंडिंग संरचना अधिक वित्तीय जिम्मेदारी डालती हो।
प्रशासनिक तैयारियाँ
इन चिंताओं के बावजूद, राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2026 से योजना को लागू करने का निर्णय अंतिम रूप दे दिया है। विभिन्न विभाग योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना और समन्वय पर काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि नई फंडिंग व्यवस्था के अनुरूप ढलते हुए भी राज्य ग्रामीण रोजगार और आजीविका सृजन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा।
आगे की राह
राज्य और केंद्र के बीच फंडिंग के इस विवाद का असर आने वाले महीनों में योजना के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता पर पड़ सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या तमिलनाडु केंद्र के साथ फंडिंग अनुपात पर पुनर्विचार के लिए औपचारिक वार्ता आगे बढ़ाता है, या फिर मौजूदा शर्तों पर ही योजना को आगे ले जाता है।