महाराष्ट्र पीपीपी नीति 2026 में 11 बड़े संशोधन मंजूर, ₹200 करोड़ VGF से इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने 27 अक्टूबर 2026 को 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) नीति 2026' में 11 प्रमुख संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक संशोधनों को मंजूरी दी, जो राज्यभर में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाए गए हैं। यह अद्यतन नीति 'विकसित महाराष्ट्र 2047' विजन दस्तावेज़ के बिंदु 100 पर आधारित है और वित्तीय वर्ष 2026-27 में ₹200 करोड़ की 'वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF)' का प्रावधान करती है।
नीति में क्यों हुए बदलाव
महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (MITRA) ने मौजूदा PPP ढाँचे में स्पष्टता और सरलीकरण की आवश्यकता रेखांकित की थी, जिसके बाद यह नीतिगत समीक्षा की गई। गौरतलब है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स अक्सर बहुस्तरीय अनुमोदन प्रक्रिया के कारण देरी का शिकार होते रहे हैं। यह संशोधन उन्हीं अड़चनों को दूर करने की कोशिश है।
नई नीति में VGF को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और जिन मामलों में यह नीति लागू नहीं होती, वहाँ डेवलपर्स तथा प्रोजेक्ट अथॉरिटी के स्वामित्व व जोखिम वितरण से संबंधित अद्यतन दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं।
प्रमुख संरचनात्मक बदलाव
प्रशासनिक बाधाएँ घटाने के लिए परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी देने की प्रक्रिया से नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप समिति की जाँच का एक स्तर हटाया गया है। अब PPP परियोजनाओं की मंजूरी के दौरान MITRA के CEO को 'कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमिटी' की बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा।
जिन परियोजनाओं में सरकारी सहायता, भूमि या ₹25 करोड़ तक का प्रीमियम शामिल है, उनके लिए 'एम्पावर्ड कमिटी' से औपचारिक अनुमोदन अनिवार्य होगा। ₹25 करोड़ या उससे अधिक मूल्य की परियोजनाओं को एम्पावर्ड कमिटी की सिफारिश के आधार पर 'कैबिनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कमिटी (CCI)' से भी मंजूरी लेनी होगी।
एसेट मोनेटाइजेशन — नई नीतिगत अवधारणा
इस संशोधित ढाँचे की सबसे उल्लेखनीय विशेषता क्लॉज 13 के अंतर्गत जोड़ी गई एसेट मोनेटाइजेशन की नई नीतिगत अवधारणा है। इसके तहत सार्वजनिक संपत्तियों — जैसे भूमि और इमारतें — का आर्थिक मूल्य बढ़ाकर राजस्व अर्जित किया जाएगा, विशेषकर उन संपत्तियों के लिए जो सामान्य PPP मॉडल के अंतर्गत व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं हैं।
यह प्रावधान 'विकसित महाराष्ट्र 2047' के दीर्घकालिक राजस्व लक्ष्यों के अनुरूप है और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
परियोजना अनुमोदन की नई प्रक्रिया
अद्यतन दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रत्येक परियोजना शुरुआत से पूर्णता तक एक व्यवस्थित चरणबद्ध प्रक्रिया का पालन करेगी। संबंधित विभाग द्वारा प्रारंभिक व्यवहार्यता अध्ययन, जनहित मूल्यांकन और 'वैल्यू फॉर मनी' आकलन किया जाएगा; आवश्यकता होने पर 'प्रोजेक्ट डेवलपमेंट फंड (PDF)' से सहायता ली जा सकेगी।
तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता रिपोर्ट, RFP मसौदे और रियायती समझौते ट्रांजेक्शन सलाहकारों और लॉ फर्मों के सहयोग से तैयार होंगे। बाज़ार में उतारने से पूर्व आवश्यक प्रारंभिक मंजूरियाँ ली जाएँगी, इसके बाद एकल वित्तीय मानदंड पर आधारित पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया होगी। ₹5 करोड़ से अधिक के मामलों के लिए एक समर्पित शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित किया जाएगा।
आगे की राह
नीति के लागू होने के साथ ही महाराष्ट्र के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करने और सार्वजनिक-निजी साझेदारी को अधिक पूर्वानुमानयोग्य बनाने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य 2047 तक 'विकसित महाराष्ट्र' के लक्ष्य को साकार करने के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचा निर्माण की योजना बना रहा है। इस संशोधित PPP नीति का क्रियान्वयन कितनी कुशलता से होता है, यही इसकी असली परीक्षा होगी।