28 अक्टूबर 2026
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वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम कटे: राजद के मंगनी लाल मंडल का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

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वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम कटे: राजद के मंगनी लाल मंडल का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

सारांश

राजद के मंगनी लाल मंडल का दावा — एसआईआर की आड़ में देशभर में 13 करोड़ और बिहार में 69 लाख वोटर नाम काटे गए। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल, भाजपा के मार्च को पाखंड बताया और एआई दुरुपयोग पर चेतावनी — यह महज आरोप नहीं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर बड़ा सवाल है।

मुख्य बातें

राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने 27 अक्टूबर 2026 को पटना में चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए।
उनके अनुसार देशभर में 13 करोड़ और बिहार में 69 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।
चुनाव आयोग के दो सदस्यों द्वारा लिखे गए 14 पत्रों — जिनमें एक कैबिनेट सचिव को — पर उन्होंने आपत्ति जताई।
भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च को मंडल ने पाखंड करार दिया और मौलिक अधिकारों की दलील दी।
अरुणाचल प्रदेश-चीन से जुड़े कथित वीडियो पर एआई दुरुपयोग की चेतावनी दी और सत्यापन की माँग की।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने 27 अक्टूबर 2026 को पटना में पत्रकारों से बात करते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और फॉर्म-6 की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि देशभर में 13 करोड़ और अकेले बिहार में 69 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो उनके अनुसार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है।

एसआईआर में गड़बड़ी के आरोप

मंडल ने कहा कि पहले की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में केवल उन्हीं नामों को हटाया जाता था जो या तो दिवंगत हो चुके हों, देश छोड़ चुके हों या पात्रता खो चुके हों। उनके अनुसार, उस समय सीमित संख्या में नाम हटते थे और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर और कथित तौर पर जानबूझकर नाम काटे जा रहे हैं।

मंडल ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों ने इस मसले पर 14 पत्र लिखे, जिनमें से एक पत्र कैबिनेट सचिव को भी संबोधित था। उनका कहना है कि यह पत्र नहीं लिखा जाना चाहिए था और इससे आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी प्रभाव के कारण आयोग के भीतर फैसले सर्वसम्मति से नहीं लिए गए और चुनाव आयुक्तों के अधिकारों में कटौती की गई है।

बिहार और पश्चिम बंगाल की स्थिति

बिहार में 69 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने के मामले को मंडल ने विशेष रूप से गंभीर बताया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह की कथित कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे मामले की वास्तविकता सार्वजनिक होनी चाहिए। गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर भी आपत्तियाँ दर्ज की गई हैं।

भाजपा के मार्च पर पलटवार

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रस्तावित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च को मंडल ने पाखंड करार दिया। उन्होंने कहा कि जुलूस निकालना, प्रदर्शन करना, धरना देना, सत्याग्रह करना और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना — ये सभी नागरिकों के संवैधानिक मौलिक अधिकार हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जिस प्रकार नागरिकों को पूजा, धर्म, आवागमन और संपत्ति के अधिकार हैं, उसी प्रकार लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार भी है। मंडल ने कहा, 'वोट नागरिकता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है और इस पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकारों का हिस्सा है।'

अरुणाचल-चीन वीडियो और एआई दुरुपयोग पर चेतावनी

अरुणाचल प्रदेश और चीन से संबंधित कथित वीडियो को लेकर मंडल ने कहा कि इस मामले में विरोधाभासी दावे सामने आ रहे हैं। उन्होंने उन दावों का उल्लेख किया जिनमें ड्रोन उड़ाए जाने, चीनी सैनिकों के भारतीय क्षेत्र में कई किलोमीटर भीतर आने और भारतीय सेना द्वारा उन्हें खदेड़ने की बात कही जा रही है। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ये दृश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से निर्मित हैं तो भ्रम की स्थिति बनी रहेगी, और यदि वास्तविक हैं तो यह सेना की कार्रवाई से जुड़ा गंभीर मामला होगा।

मंडल ने चेतावनी दी कि एआई का दुरुपयोग विनाशकारी परिणाम ला सकता है और किसी भी पक्ष द्वारा ऐसे कृत्रिम दृश्य दिखाए जा सकते हैं जिनसे सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल हो जाए। राजनीतिक दलों और मीडिया दोनों से उन्होंने सत्यापन पर जोर देने का आग्रह किया।

आगे क्या

राजद की ओर से एसआईआर के खिलाफ कानूनी और संसदीय मंचों पर आवाज उठाने के संकेत मिले हैं। चुनाव आयोग ने इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दायर किया है, और आने वाले दिनों में इस पर सुनवाई होने की संभावना है। विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की बुनियाद पर सीधा प्रहार है। असली सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग ने हटाए गए नामों का सार्वजनिक और पारदर्शी ऑडिट कराया? आयोग के भीतर असहमति और कैबिनेट सचिव को पत्र लिखने जैसे दावे संस्थागत स्वायत्तता की चिंता को और गहरा करते हैं। पश्चिम बंगाल और बिहार दोनों में एक साथ यही प्रक्रिया लागू होना और विपक्ष की एकजुट आपत्ति — यह संयोग नहीं, नीतिगत जवाबदेही की माँग है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों को अद्यतन करता है — अपात्र नाम हटाता है और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ता है। विवाद इसलिए है क्योंकि राजद सहित कई विपक्षी दलों का आरोप है कि इस बार बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरनाक है।
बिहार में कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं?
राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के दावे के अनुसार बिहार में 69 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उनका यह आँकड़ा 13 करोड़ बताया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
मंडल ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए हैं?
मंडल ने आरोप लगाया कि आयोग के दो सदस्यों ने 14 पत्र लिखे, जिनमें एक कैबिनेट सचिव को भी था। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रभाव में आयोग के भीतर फैसले सर्वसम्मति से नहीं लिए गए और चुनाव आयुक्तों के अधिकारों में कटौती की गई है।
भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च पर राजद का क्या रुख है?
राजद प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा के इस मार्च को पाखंड करार दिया है। उनका कहना है कि विरोध, धरना और प्रदर्शन नागरिकों के संवैधानिक मौलिक अधिकार हैं, और विपक्ष के विरोध के जवाब में ऐसा मार्च निकालना लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण प्रवृत्ति है।
अरुणाचल प्रदेश-चीन वीडियो पर मंडल ने क्या कहा?
मंडल ने कहा कि इस मामले में विरोधाभासी दावे आ रहे हैं और यदि ये वीडियो एआई से निर्मित हैं तो भ्रम बना रहेगा, यदि वास्तविक हैं तो यह सेना की कार्रवाई से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने एआई के दुरुपयोग से सच और झूठ में फर्क करना कठिन होने की चेतावनी दी।
राष्ट्र प्रेस
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