रामगोपाल यादव का आरोप: सरकार इतिहास को मिटाने का कर रही प्रयास
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नई दिल्ली, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण का कानून पहले ही सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है, तब जब कोई इतिहास नहीं बना था। अब उस इतिहास को मिटाने का प्रयास क्यों हो रहा है?
रामगोपाल यादव ने सरकार पर बेईमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस मुद्दे पर चर्चा हो रही हो, उस पर नोटिफिकेशन जारी करना कहीं देखने को नहीं मिलता।
महिला आरक्षण विधेयक पर समाजवादी पार्टी की नेता सुमैया राणा ने कहा कि इस पर बहुत चर्चा हो रही है। यह सुनने में आकर्षक लग सकता है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि कोई भी इसके मूल पहलुओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। मेरा सवाल है कि हम उन महिलाओं की पहचान कैसे करेंगे, जो अभी पीछे रह गई हैं। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना से यह स्पष्ट होगा कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक कितने हैं। केवल विधेयक लाने से कुछ नहीं होगा।
महिला आरक्षण विधेयक पर सदन में चर्चा करते हुए सपा सांसद इकरा हसन ने १६ अप्रैल को कहा कि यह विधेयक २०२३ में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, इसलिए अब वास्तविक मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि चुनावी फायदे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण को परिसीमन और जनगणना के पीछे छिपाने का प्रयास कर रही है, जो महिलाओं के अधिकारों के साथ धोखा है। पहले कहा गया था कि महिला आरक्षण २०३४ के बाद लागू होगा और अब इसे २०२९ में लागू करने की बात की जा रही है, जो कि विरोधाभासी है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बिना जनगणना और ओबीसी को शामिल किए केंद्र सरकार महिला आरक्षण बिल ला रही है। जब उनके अपने मतदाता उन्हें नकार चुके हैं, तब वे तुष्टीकरण के लिए यह बिल ला रहे हैं। हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसके पक्ष में हैं, लेकिन यह बिल लाने का सही समय क्या है? वे जनगणना क्यों नहीं करवाना चाहते? यदि जनगणना हो जाती, तो कई बदलाव सामने आते।