24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रामगोपाल यादव का आरोप: सरकार इतिहास को मिटाने का कर रही प्रयास

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रामगोपाल यादव का आरोप: सरकार इतिहास को मिटाने का कर रही प्रयास

सारांश

समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पहले ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, और अब इसके पीछे की असली मंशा पर सवाल उठाए हैं।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना है।
रामगोपाल यादव ने सरकार पर बेईमानी का आरोप लगाया है।
जाति जनगणना से महिलाओं की वास्तविक संख्या का पता चलेगा।
विधेयक के विरोध में चुनावी लाभ का तर्क दिया गया है।
सरकार की मंशा पर सवाल उठाए गए हैं।

नई दिल्ली, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण का कानून पहले ही सर्वसम्मति से पारित किया जा चुका है, तब जब कोई इतिहास नहीं बना था। अब उस इतिहास को मिटाने का प्रयास क्यों हो रहा है?

रामगोपाल यादव ने सरकार पर बेईमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस मुद्दे पर चर्चा हो रही हो, उस पर नोटिफिकेशन जारी करना कहीं देखने को नहीं मिलता।

महिला आरक्षण विधेयक पर समाजवादी पार्टी की नेता सुमैया राणा ने कहा कि इस पर बहुत चर्चा हो रही है। यह सुनने में आकर्षक लग सकता है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि कोई भी इसके मूल पहलुओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। मेरा सवाल है कि हम उन महिलाओं की पहचान कैसे करेंगे, जो अभी पीछे रह गई हैं। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना से यह स्पष्ट होगा कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक कितने हैं। केवल विधेयक लाने से कुछ नहीं होगा।

महिला आरक्षण विधेयक पर सदन में चर्चा करते हुए सपा सांसद इकरा हसन ने १६ अप्रैल को कहा कि यह विधेयक २०२३ में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, इसलिए अब वास्तविक मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि चुनावी फायदे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरक्षण को परिसीमन और जनगणना के पीछे छिपाने का प्रयास कर रही है, जो महिलाओं के अधिकारों के साथ धोखा है। पहले कहा गया था कि महिला आरक्षण २०३४ के बाद लागू होगा और अब इसे २०२९ में लागू करने की बात की जा रही है, जो कि विरोधाभासी है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि बिना जनगणना और ओबीसी को शामिल किए केंद्र सरकार महिला आरक्षण बिल ला रही है। जब उनके अपने मतदाता उन्हें नकार चुके हैं, तब वे तुष्टीकरण के लिए यह बिल ला रहे हैं। हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसके पक्ष में हैं, लेकिन यह बिल लाने का सही समय क्या है? वे जनगणना क्यों नहीं करवाना चाहते? यदि जनगणना हो जाती, तो कई बदलाव सामने आते।

संपादकीय दृष्टिकोण

समाजवादी पार्टी के नेताओं ने स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार की मंशाओं पर सवाल उठाए हैं। यह मामला न केवल महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि यह एक व्यापक राजनीतिक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक का क्या महत्व है?
महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में बढ़ावा देना है, ताकि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हो सकें।
रामगोपाल यादव ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया है कि सरकार पहले से पारित महिला आरक्षण कानून को दरकिनार कर रही है और इसके पीछे चुनावी लाभ की मंशा है।
इस विधेयक के विरोध में कौन-कौन से तर्क दिए गए हैं?
विरोधी नेताओं का कहना है कि बिना सही जनगणना और ओबीसी को शामिल किए यह विधेयक असंगत है और इससे महिलाओं को वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।
महिला आरक्षण का कब तक लागू होना है?
सरकार ने पहले 2034 और अब 2029 में इसे लागू करने की बात की है, जो कि विरोधाभासी है।
जाति जनगणना का क्या महत्व है?
जाति जनगणना से यह स्पष्ट होगा कि दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक कितने हैं, जो महिला आरक्षण के सही क्रियान्वयन में सहायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले