शौर्य चक्र से सम्मानित मेजर भार्गव कलिता: A++ आतंकवादी को मार गिराया, 7 हत्याओं का था जिम्मेदार
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय राइफल्स की 50वीं बटालियन, कुमाऊं रेजिमेंट के मेजर भार्गव कलिता को आतंकवाद विरोधी अभियानों में असाधारण वीरता, अनुकरणीय नेतृत्व और उत्कृष्ट परिचालन उपलब्धियों के लिए भारत के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कारों में से एक शौर्य चक्र से नवाज़ा गया है। 8 जून 2026 को की गई इस घोषणा के साथ मेजर कलिता की वह साहसिक कार्रवाई राष्ट्रीय स्तर पर पहचान पा गई, जिसमें उन्होंने 2 दिसंबर 2024 को एक A++ श्रेणी के खूँखार आतंकवादी को मार गिराया था।
मुख्य घटनाक्रम
अक्टूबर 2022 से मेजर कलिता ने कई सफल अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाई, जिसके परिणामस्वरूप तीन कुख्यात आतंकवादी मारे गए और चार कट्टर ओवर ग्राउंड वर्कर्स गिरफ्तार किए गए। उनकी अटूट प्रतिबद्धता और परिचालन कुशलता ने क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाई।
2 दिसंबर 2024 को अल्प सूचना पर कार्रवाई करते हुए मेजर कलिता ने एक कट्टर आतंकवादी के विरुद्ध सुनियोजित घात ऑपरेशन को अंजाम दिया। असाधारण क्षेत्र-कौशल और सामरिक सूझबूझ का परिचय देते हुए उन्होंने अपनी टीम को इस प्रकार तैनात किया कि आतंकवादी को पूरी तरह अचंभे में डाल दिया गया, और धैर्यपूर्वक उसके निर्धारित हत्या-स्थल में प्रवेश करने की प्रतीक्षा की।
भीषण मुठभेड़ और वीरता का प्रदर्शन
नज़दीकी मुठभेड़ में घिरे आतंकवादी ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी और भागने का प्रयास किया। मेजर कलिता ने बिना विचलित हुए सटीक गोलीबारी की और अपनी टीम को कुशलतापूर्वक तैनात करते हुए भागने के सभी रास्ते बंद कर दिए। उन्होंने घात दल को निरंतर निगरानी और जवाबी गोलीबारी जारी रखने का निर्देश दिया, जिससे आतंकवादी वहीं फंसा रह गया।
इसके बाद अपनी जान की परवाह किए बिना मेजर कलिता गंभीर खतरे के बीच छिपे हुए आतंकवादी की ओर रेंगते हुए बढ़े। अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय का परिचय देते हुए उन्होंने आतंकवादी पर हमला किया और भीषण मुठभेड़ में उसे मार गिराया। बाद में मारे गए आतंकवादी की पहचान A++ श्रेणी के आतंकवादी के रूप में हुई, जो सात निर्दोष नागरिकों की हत्या और सुरक्षा बलों पर कई घातक हमलों का जिम्मेदार था।
सम्मान का महत्व
शौर्य चक्र भारत का तीसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है, जो विशिष्ट वीरता, साहसिक कार्य या बलिदान के लिए प्रदान किया जाता है। गौरतलब है कि यह पुरस्कार प्रायः उन सैन्य कर्मियों को दिया जाता है जो सीधे युद्ध क्षेत्र में नहीं, बल्कि आंतरिक सुरक्षा अभियानों में असाधारण साहस का प्रदर्शन करते हैं। मेजर कलिता का यह सम्मान भारतीय सेना की उस परंपरा को रेखांकित करता है जिसमें कर्तव्य और राष्ट्र-सेवा सर्वोपरि है।
आम जनता और सुरक्षा पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों की तीव्रता बढ़ी है। A++ श्रेणी के आतंकवादी की मौत से स्थानीय नागरिकों को राहत मिली है, क्योंकि वह सात निर्दोष नागरिकों की हत्या का आरोपी था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के लक्षित ऑपरेशन आतंकी नेटवर्क को कमज़ोर करने में सहायक होते हैं।
क्या होगा आगे
मेजर कलिता को शौर्य चक्र प्रदान किए जाने से सेना के अन्य जवानों और अधिकारियों में प्रेरणा का संचार होगा। भारतीय सेना के अनुसार, ऐसे पुरस्कार आतंकवाद विरोधी अभियानों में तत्परता और उत्कृष्टता की संस्कृति को मजबूत करते हैं। आने वाले समय में इस क्षेत्र में और अभियानों की संभावना बनी रहेगी।