7 अगस्त 2026
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ममता बनर्जी ही मेरी एकमात्र नेता — शत्रुघ्न सिन्हा; अभिषेक को बताया संसद का बेहतरीन वक्ता

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ममता बनर्जी ही मेरी एकमात्र नेता — शत्रुघ्न सिन्हा; अभिषेक को बताया संसद का बेहतरीन वक्ता

सारांश

बंगाल चुनाव में TMC की सीटें घटने और बागी नेताओं के पार्टी छोड़ने के बीच सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता बनर्जी के प्रति अपनी वफ़ादारी का खुलकर ऐलान किया। 2019 की हार में ममता के फोन कॉल से लेकर आसनसोल की रिकॉर्ड जीत तक — सिन्हा का यह बयान TMC के भीतर एकजुटता का एक अहम राजनीतिक संदेश है।

मुख्य बातें

TMC सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने 7 अगस्त 2026 को पटना में कहा कि ममता बनर्जी ही उनकी एकमात्र नेता हैं।
सिन्हा ने अभिषेक बनर्जी को सहयोगी बताते हुए उन्हें राहुल गांधी और संजय सिंह की तरह संसद के सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं में गिना।
2019 में पटना से हार के बाद केवल ममता बनर्जी ने व्यक्तिगत फोन किया — सिन्हा ने इसे वफ़ादारी की वजह बताया।
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत को सिन्हा ने 'जनता की ताकत' करार दिया और 'बाहरी' के आरोप को राजनीतिक दोहरापन बताया।
परीक्षा पेपर लीक पर छात्रों के आंदोलन को सिन्हा ने जायज बताया और सरकार से ठोस कार्रवाई की माँग की।
बंगाल में SIR के दौरान कथित तौर पर 60 से 65 लाख नाम हटाए गए — सिन्हा ने इसे TMC की वोट हिस्सेदारी में गिरावट की एक वजह बताया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने 7 अगस्त 2026 को पटना में स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी ही उनकी एकमात्र राजनीतिक नेता हैं और वे हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी को एक सक्षम नेता और संसद के सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं में से एक बताया, भले ही उन्होंने साफ किया कि अभिषेक उनके नेता नहीं, बल्कि सहयोगी हैं।

ममता के साथ वफ़ादारी की वजह

सिन्हा ने बताया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में जब वे पटना से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में हार गए थे, तब किसी ने उनका हालचाल नहीं पूछा। उन्होंने कहा, 1996 से संसद में रहने के बावजूद उस कठिन दौर में केवल ममता बनर्जी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया, जिससे उन्हें उनके विश्वास का एहसास हुआ।

उन्होंने आसनसोल लोकसभा उपचुनाव का भी ज़िक्र किया, जब बाबुल सुप्रियो के भाजपा छोड़ने के बाद ममता बनर्जी ने बिना पूछे उनका नाम घोषित कर दिया। सिन्हा ने कहा कि उस समय उन्हें उपचुनाव की भी जानकारी नहीं थी, फिर भी वे गए, नामांकन भरा और रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की।

बागी नेताओं और अभिषेक पर रुख

सिन्हा ने कहा कि जो नेता पहले अभिषेक बनर्जी की बात सुनते थे और संगठन संभालते थे, वही बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के करीब एक महीने बाद उनके खिलाफ शिकायतें करने लगे। उन्होंने इसे हार से उपजी घबराहट और निराशा का नतीजा बताया।

उन्होंने आई-पैक का भी ज़िक्र करते हुए कहा कि अच्छा हुआ कि तब तक प्रशांत किशोर आई-पैक से अलग हो चुके थे, अन्यथा बागी नेता उन्हें भी बदनाम करते। सिन्हा ने कहा, 'जब नाव डूबने लगती है, तो कई लोग उसे छोड़कर भाग जाते हैं।'

प्रशांत किशोर की बांकीपुर जीत पर प्रतिक्रिया

बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की जीत पर सिन्हा ने कहा कि वे शुरू से ही किशोर को एक सक्षम, परिपक्व और पढ़े-लिखे व्यक्ति मानते आए हैं। उन्होंने कहा कि किशोर को 'बाहरी' कहना उचित नहीं था — ठीक वैसे ही जैसे उन्हें आसनसोल से चुनाव लड़ते वक्त कहा गया था।

सिन्हा ने तर्क दिया कि यदि इंदिरा गांधी रायबरेली से, सुषमा स्वराज कर्नाटक से, जॉर्ज फर्नांडिस मुजफ्फरपुर से और नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ सकते हैं, तो किशोर पर 'बाहरी' का ठप्पा लगाना राजनीतिक दोहरापन है।

परीक्षा पेपर लीक और छात्र आंदोलन

जंतर-मंतर और झारखंड में जारी छात्र आंदोलनों पर सिन्हा ने कहा कि छात्रों की मांगें बिल्कुल जायज हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बार-बार लीक हुए हैं और सरकार केवल आश्वासन देती रही है। उनके अनुसार, यदि सरकार ठोस कार्रवाई नहीं करती, तो लोगों का सड़क पर उतरना स्वाभाविक है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार से अपेक्षाएँ

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के संदर्भ में सिन्हा ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी दोनों से उम्मीद है कि वे राज्य में कानून का राज, शांति और सौहार्द बनाए रखेंगे। उन्होंने आसनसोल को भाईचारे का शहर बताते हुए कहा कि वहाँ सभी धर्मों के लोग आपसी सम्मान के साथ रहते हैं।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब TMC के भीतर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं और बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की सीटें घटने के बाद कई नेताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया है। सिन्हा का यह सार्वजनिक समर्थन ममता बनर्जी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सहयोगी' कहकर TMC की आंतरिक शक्ति-संरचना पर एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। SIR के दौरान कथित तौर पर 60-65 लाख नाम हटाए जाने का उनका दावा अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है — मुख्यधारा की कवरेज इस आँकड़े को बिना जाँचे उद्धृत कर रही है। प्रशांत किशोर की तारीफ और 'बाहरी' बनाम 'स्थानीय' की बहस पर सिन्हा का तर्क भारतीय राजनीति की एक पुरानी विडंबना को सामने रखता है — जहाँ नेता खुद दूसरे राज्यों से लड़ते हैं, पर विरोधियों पर 'बाहरी' का ठप्पा लगाते हैं।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता बनर्जी को अपना नेता क्यों बताया?
सिन्हा ने कहा कि 2019 में पटना से लोकसभा चुनाव हारने के बाद केवल ममता बनर्जी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था, जबकि 1996 से संसद में रहने के बावजूद कोई और उनके पास नहीं आया। इस अनुभव ने उन्हें ममता के साथ जोड़ा और तब से वे उनके साथ काम कर रहे हैं।
शत्रुघ्न सिन्हा ने अभिषेक बनर्जी के बारे में क्या कहा?
सिन्हा ने स्पष्ट किया कि अभिषेक बनर्जी उनके नेता नहीं बल्कि सहयोगी हैं। साथ ही उन्होंने अभिषेक को एक सक्षम, अच्छे इंसान और मजबूत नेता बताया और राहुल गांधी व संजय सिंह की तरह उन्हें संसद के सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं में गिना।
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत पर सिन्हा का क्या कहना है?
सिन्हा ने प्रशांत किशोर को पढ़े-लिखे, परिपक्व और सक्षम व्यक्ति बताते हुए उनकी जीत को 'जनता की ताकत' करार दिया। उन्होंने 'बाहरी' के आरोप को नकारते हुए कहा कि इंदिरा गांधी से लेकर नरेंद्र मोदी तक सभी बड़े नेता अपने गृह राज्य से बाहर चुनाव लड़े हैं।
TMC के बागी नेताओं के बारे में शत्रुघ्न सिन्हा ने क्या कहा?
सिन्हा ने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के करीब एक महीने बाद ही वही लोग अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के खिलाफ हो गए, जो पहले उन्हें 'मां समान' बताते थे। उन्होंने इसे हार से पैदा हुई घबराहट और निराशा का नतीजा बताया।
परीक्षा पेपर लीक और छात्र आंदोलन पर सिन्हा का क्या रुख है?
सिन्हा ने छात्रों की मांगों को बिल्कुल जायज बताया। उन्होंने कहा कि विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र बार-बार लीक हुए हैं और सरकार केवल आश्वासन देती रही है — जंतर-मंतर हो या झारखंड, यदि ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो लोग अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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