मणिपुर में खरीफ सीजन से पहले किसानों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम, बिष्णुपुर-चुराचंदपुर में विशेष बैठक
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर सरकार ने खरीफ सीजन 2026 से पहले घाटी और पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों में किसानों पर हुई पिछली घटनाओं और हमलों के मद्देनज़र यह कदम उठाया गया है, ताकि मैतेई, कुकी और नागा समुदायों के किसान बिना किसी बाधा के खेती कर सकें।
बिष्णुपुर में अहम बैठक
शुक्रवार, 23 मई 2026 को बिष्णुपुर स्थित मिनी सचिवालय (डीसी कार्यालय) में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी-जोन सेकेंड) निंगशेन वोरंगम ने बैठक की अध्यक्षता की। इसमें बिष्णुपुर और चुराचंदपुर जिलों के सीमावर्ती क्षेत्रों में खरीफ धान की खेती के लिए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विस्तृत चर्चा हुई।
सुरक्षा और समन्वय की रणनीति
दोनों जिलों के जिला पुलिस प्रमुखों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उन खेती योग्य इलाकों की पहचान की, जहाँ खरीफ मौसम के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती की आवश्यकता हो सकती है। किसानों के हित में रणनीतियाँ और समन्वित योजनाएँ तैयार करने के लिए जिला स्तरीय बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं।
विस्थापितों के पुनर्वास पर जोर
बैठक में जातीय हिंसा से प्रभावित आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों (आईडीपी) के पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया गया। बिष्णुपुर जिले की उपायुक्त ने बैठक को सूचित किया कि विस्थापित परिवारों की पुनर्स्थापना को प्राथमिकता दी जा रही है।
आईजीपी वोरंगम का बयान
अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद आईजीपी वोरंगम ने कहा कि बिष्णुपुर और चुराचंदपुर में मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए दोनों जिलों के अधिकारियों के बीच घनिष्ठ समन्वय अनिवार्य है, ताकि सुरक्षा संबंधी मुद्दों को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके।
खरीफ सीजन का महत्व
खरीफ का मौसम जून से अक्टूबर तक रहता है। फसलें जून-जुलाई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं। इन फसलों को भरपूर वर्षा और गर्म, आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। मणिपुर जैसे संघर्ष-प्रभावित राज्य में खेती का मौसम किसानों की आजीविका के लिए निर्णायक है, और सुरक्षा की कमी से फसल चक्र बाधित होने का खतरा बना रहता है।