मन की बात एपिसोड 137: PM मोदी ने सराहा यूपी के आकाश-रोहन का संकल्प, अमरनाथ में 400 मीट्रिक टन कचरा प्रबंधन
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अगस्त को प्रसारित 'मन की बात' के 137वें एपिसोड में देशभर से स्वच्छता के प्रेरक उदाहरण साझा किए और कहा कि जब स्वच्छता किसी स्थान के निवासियों का सामूहिक संकल्प बन जाती है, तो उस जगह की पूरी पहचान बदल जाती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के एक गाँव से लेकर अमरनाथ यात्रा तक — स्वच्छता को सेवा और आस्था के रूप में परिभाषित करने वाले जनभागीदारी के उदाहरण प्रस्तुत किए।
पटवई गाँव के दो दोस्तों की मिसाल
प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पटवई गाँव के युवाओं आकाश और रोहन की कहानी सुनाई। इन दोनों दोस्तों ने अपने आसपास बढ़ती गंदगी को देखकर खुद कचरे के बैग उठाए और सफाई अभियान शुरू किया। धीरे-धीरे अन्य युवा भी इस मुहिम से जुड़ते गए और 'क्लीन-अप पटवई' नाम से एक सक्रिय टीम तैयार हो गई।
मोदी ने बताया कि इस टीम ने अब तक चार गंगा घाटों की सफाई की है और एक टन से अधिक प्लास्टिक कचरा हटाया है। इसके अलावा कई तालाबों और सार्वजनिक स्थलों को भी स्वच्छ किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में युवा नेतृत्व में सामुदायिक स्वच्छता अभियानों की माँग लगातार बढ़ रही है।
अमरनाथ यात्रा में स्वच्छता की अनूठी मिसाल
प्रधानमंत्री ने इस वर्ष की श्री अमरनाथ यात्रा में स्वच्छता प्रबंधन को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कठिन पहाड़ी रास्तों पर हजारों स्वच्छता कर्मी दिन-रात सेवा में लगे रहे। यात्रा के दौरान 400 मीट्रिक टन से अधिक कचरे को एकत्र और प्रोसेस किया गया — जो इस पवित्र यात्रा के इतिहास में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।
मोदी ने कहा, 'स्वच्छता के इस अभियान में श्रद्धालु भी भागीदार बने। 16,000 से अधिक यात्रियों ने स्वच्छता का संकल्प लिया। 10,000 से अधिक यात्रियों को 'रिस्पॉन्सिबल यात्री सर्टिफिकेट' भी दिया गया।'
गोबर से बायोगैस — आस्था और पर्यावरण का संगम
यात्रा के दौरान एक अभिनव प्रयोग भी किया गया जिसका प्रधानमंत्री ने विशेष उल्लेख किया। घोड़ों और खच्चरों के गोबर को बायोगैस में परिवर्तित किया गया और उसी स्वच्छ ऊर्जा से स्वच्छ ज्योत प्रज्वलित की गई। मोदी ने इसे बाबा बर्फानी की पवित्र यात्रा में स्वच्छता के सेवा और आस्था का रूप लेने का प्रतीक बताया। गौरतलब है कि यह प्रयोग अपशिष्ट प्रबंधन और धार्मिक पर्यटन को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।
स्वच्छता को व्यवहार का हिस्सा बनाने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि गाँव हों या शहर, नदियाँ हों या तीर्थ स्थल — इन सभी की पहचान वहाँ के लोगों के व्यवहार से भी बनती है। उनका मानना है कि जब स्वच्छता इस व्यवहार का स्वाभाविक हिस्सा बन जाती है, तो उस स्थान की गरिमा और बढ़ जाती है। यह संदेश स्वच्छ भारत मिशन की व्यापक भावना से जुड़ता है, जो नागरिक भागीदारी को सरकारी प्रयासों जितना ही महत्वपूर्ण मानता है।