मथुरा में सपा नेता राजन रिजवी पर महिला बैंककर्मी से उत्पीड़न का आरोप, IT एक्ट समेत कई धाराओं में FIR
सारांश
मुख्य बातें
मथुरा पुलिस ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव राजन रिजवी के विरुद्ध 16 सितंबर 2026 को कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोप है कि रिजवी ने एक महिला बैंककर्मी को लगातार परेशान किया, उनके मोबाइल पर आपत्तिजनक संदेश भेजे और उनके पूरे परिवार की कथित तौर पर 'रेकी' (निगरानी) कराई। मामले में सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 की धारा 67 सहित विभिन्न गंभीर धाराओं के अंतर्गत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
मुख्य आरोप: क्या कहती है पीड़िता
पीड़ित महिला बैंक कर्मचारी के अनुसार, राजन रिजवी ग्राहक बनकर बैंक में आता था और उन पर नज़र रखता था। आरोपी ने बिना अनुमति के पीड़िता का निजी मोबाइल नंबर हासिल किया और आपत्तिजनक व अवांछित संदेश भेजने शुरू कर दिए।
जब पीड़िता ने संपर्क से स्पष्ट इनकार किया, तो रिजवी ने कथित तौर पर धमकी दी कि 'मैं तेरी निजी सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) निकलवाता हूं।' पीड़िता द्वारा नंबर ब्लॉक करने के बाद भी उत्पीड़न जारी रहने का आरोप है।
रात में कॉलोनी के बाहर घूमने और परिवार की जासूसी का आरोप
तहरीर के मुताबिक, नंबर ब्लॉक करने के बाद राजन रिजवी को रात करीब 9.30 बजे पीड़िता की आवासीय कॉलोनी के आसपास घूमते देखा गया। आरोप है कि उसने महिला के पति — जो कि एक क्षेत्रीय वन अधिकारी हैं — के साथ-साथ उनके घर, वाहन, घरेलू सहयोगी, रसोइये और चालक तक की जानकारियाँ जुटाईं।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि बैंक के बाहर खड़ी उनकी गाड़ी की तस्वीरें खींची गईं, जो कथित तौर पर सीसीटीवी फुटेज में दर्ज हैं। महिला को आशंका है कि आरोपी किसी निजी सुरक्षा एजेंसी के ज़रिए उनके परिवार की जासूसी करा रहा है और उनके पति के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराने की योजना बना रहा है।
पुलिस की प्रतिक्रिया
मथुरा कोतवाली की अधिकारी आशना चौधरी ने बताया कि महिला बैंककर्मी की शिकायत के आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने पुष्टि की कि शिकायत में पीछा करने, आपत्तिजनक संदेश भेजने और आवासीय क्षेत्र में डराने-धमकाने के आरोप शामिल हैं।
राजनीतिक विरोध
राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के स्थानीय नेताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि आरोपी के बारे में पहले भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं और वे अधिकारियों से मिलकर सख्त कार्रवाई की माँग करेंगे।
आगे क्या होगा
पुलिस ने मामले में जाँच शुरू कर दी है। IT एक्ट की धारा 67 के तहत दर्ज यह मामला अश्लील सामग्री के इलेक्ट्रॉनिक प्रसार से संबंधित है, जो एक संज्ञेय अपराध है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ दल से जुड़े नेताओं पर इस तरह के आरोपों के मामले में न्यायिक प्रक्रिया की गति पर भी नज़र रहेगी। सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड जाँच के अहम साक्ष्य बन सकते हैं।