मौलाना साजिद रशीदी की इस्लामिक कानून की वकालत: 'सख्त दंड से ही रुकेंगे दुष्कर्म के मामले'
सारांश
मुख्य बातें
मौलाना साजिद रशीदी ने 31 अगस्त को नई दिल्ली में एक बार फिर इस्लामिक कानून की कठोरता का समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की माँग नहीं कर रहे, बल्कि उनका तर्क है कि इस्लामिक कानूनों में निहित सख्त दंड-व्यवस्था ही अपराधों पर अंकुश लगाने में सक्षम है।
महिला सुरक्षा पर मौलाना का बयान
केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के महिलाओं संबंधी विवादास्पद बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना रशीदी ने कहा कि यदि महिलाएँ अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत होती हैं, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, महिलाओं के सार्वजनिक आचरण और पहनावे पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्दे की अवधारणा को महिलाओं की स्वतंत्रता का हनन बताना उचित नहीं है।
कांवड़ यात्रा और सामाजिक मर्यादा
कांवड़ यात्रा का संदर्भ देते हुए मौलाना ने कहा कि यह एक धार्मिक आयोजन है और सरकार की ओर से जगह-जगह टेंट लगाए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे स्थलों पर अमर्यादित व्यवहार देखने को मिलता है। उनका कहना था कि लड़कियों को अपनी सुरक्षा और सम्मान के लिए सावधानियाँ बरतनी चाहिए।
दुष्कर्म के मामलों पर चिंता और सख्त कानून की माँग
एक स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ गैंगरेप की घटना को मौलाना रशीदी ने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि निर्भया कांड के बाद भी हालात नहीं बदले हैं और छोटी बच्चियों के साथ दुराचार की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई मामलों में आरोपी जमानत पाकर बाहर आ जाते हैं, जो न्याय-व्यवस्था की कमज़ोरी को दर्शाता है।
इस्लामिक कानून का संदर्भ
मौलाना रशीदी ने दावा किया कि इस्लामिक देशों में कठोर दंड-विधान के कारण बलात्कार और चोरी जैसी घटनाएँ नगण्य हैं। उन्होंने कहा, 'मैं भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की बात नहीं कर रहा, लेकिन सख्त कानून बनाए जाएँ तो बच्चियों की हिफाज़त होगी।' गौरतलब है कि इस्लामिक देशों में अपराध-दर को लेकर उनका यह दावा विशेषज्ञों के बीच विवादित है और इसके लिए स्वतंत्र आँकड़ों का अभाव है।
मदरसों पर कार्रवाई का विरोध
उत्तराखंड में मदरसों के विरुद्ध हो रही कार्रवाई पर मौलाना रशीदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बाद अब वहाँ भी मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे सांप्रदायिक भेदभाव करार दिया और कहा कि किसी एक समुदाय को बार-बार निशाना बनाना उचित नहीं है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।