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मानसून सत्र 2026: मायावती की अपील — हंगामा छोड़ें, महंगाई-बेरोज़गारी पर हो सार्थक बहस

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मानसून सत्र 2026: मायावती की अपील — हंगामा छोड़ें, महंगाई-बेरोज़गारी पर हो सार्थक बहस

सारांश

संसद का मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले मायावती ने एक्स पर पोस्ट कर हंगामे की जगह सार्थक बहस की माँग की। महंगाई, बेरोज़गारी, अयोध्या चढ़ावा प्रकरण और रुपये के अवमूल्यन को उन्होंने सत्र के सबसे ज़रूरी मुद्दे बताया।

मुख्य बातें

बसपा अध्यक्ष मायावती ने 19 जुलाई को एक्स पर पोस्ट कर 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में सार्थक बहस की माँग की।
उन्होंने महंगाई, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, परीक्षा पत्र लीक और भ्रष्टाचार को संसद के प्रमुख एजेंडे में शामिल करने की अपील की।
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी पर व्यापक जन आक्रोश का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे संसद में उठाए जाने वाला अहम मुद्दा बताया।
अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष और रुपये के अवमूल्यन को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया।
मायावती ने चेतावनी दी कि हंगामे में सत्र बर्बाद हुआ तो 140 करोड़ की आबादी, विशेषकर बहुजनों का भविष्य और अधिक अनिश्चित होगा।

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 19 जुलाई को संसद के मानसून सत्र (जो 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है) की पूर्व संध्या पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक टकराव और हंगामे से ऊपर उठकर देश की ज्वलंत समस्याओं पर गंभीर और सार्थक चर्चा सुनिश्चित करें। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि महंगाई, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, परीक्षा पत्र लीक, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर संसद में ठोस समाधान खोजे जाने चाहिए।

मायावती का संसद से आह्वान

मायावती ने अपनी पोस्ट में लिखा कि देश और आम जनता की यह चिंता स्वाभाविक है कि क्या इस बार भी मानसून सत्र हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा, या फिर जनता की पीड़ा को शांत करने के लिए संसद में गंभीरता दिखाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जबरदस्त महंगाई, गरीबी, बेरोज़गारी और महिला असुरक्षा से उत्पन्न आक्रोश के माहौल को संसद को संजीदगी से लेना होगा।

अयोध्या चढ़ावा प्रकरण और जन आक्रोश

बसपा अध्यक्ष ने अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, हेराफेरी और गबन के मुद्दे पर व्यापक जन आक्रोश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धर्म का चुनावी स्वार्थ के लिए राजनीतिकरण करने वालों से जनता जवाबदेही माँग रही है और यह मुद्दा सड़कों से लेकर अदालतों तक गूँज रहा है। उनके अनुसार, यह मुद्दा संसद में भी गर्म रहेगा।

विभिन्न राज्यों की स्थिति पर चिंता

मायावती ने बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद के हालात, राजस्थान में सरकारी लापरवाही के कारण गर्भवती महिलाओं की मौत, विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ के बढ़ते प्रचलन और वर्षों से बसे लोगों की कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण को संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। उनका कहना था कि इन सरकारी रवैयों से संवैधानिक मूल्य चरमरा रहे हैं।

वैश्विक परिस्थितियों का भारत पर असर

बसपा प्रमुख ने अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष तथा रुपये के अवमूल्यन को भारत की अर्थव्यवस्था और जनजीवन के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर राजनीतिक द्वेष और आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता छोड़कर सत्ता और विपक्ष को एकजुट होकर समाधान खोजना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर 140 करोड़ की आबादी वाले देश में बहुजनों का भविष्य और अधिक अनिश्चित हो जाएगा।

संसद की जिम्मेदारी और सुशासन की अपेक्षा

मायावती ने स्पष्ट किया कि मानसून सत्र को बिना उत्तेजना, रोष और विद्वेष के, स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे नागरिकों की परेशानियाँ और न बढ़ें। उनके अनुसार, जनहितैषी सुशासन के लिए संसद का प्रभावी होना अनिवार्य है और इसकी शुरुआत इसी सत्र से होनी चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे केवल विपक्षी दबाव की रणनीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए — यह उस बड़े संसदीय संकट की ओर इशारा करती है जिसमें पिछले कई सत्र उत्पादक कार्यवाही के बजाय स्थगन में गँवाए गए हैं। अयोध्या चढ़ावा प्रकरण को उठाना बसपा की सोची-समझी रणनीति है, जो BJP के धार्मिक आधार को सीधे चुनौती देती है। हालाँकि, बसपा स्वयं संसद में सीमित उपस्थिति रखती है, इसलिए यह अपील नैतिक दबाव के रूप में अधिक प्रभावशाली है, व्यावहारिक संसदीय बाधा के रूप में कम।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने मानसून सत्र से पहले क्या माँग की?
बसपा अध्यक्ष मायावती ने 19 जुलाई को एक्स पर पोस्ट कर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से अपील की कि 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र में हंगामे और स्थगन की जगह महंगाई, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा और अयोध्या चढ़ावा प्रकरण जैसे मुद्दों पर सार्थक बहस हो।
बसपा ने किन मुद्दों को मानसून सत्र में उठाने की बात कही?
बसपा ने महंगाई, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, परीक्षा पत्र लीक, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण, भ्रष्टाचार, रुपये का अवमूल्यन और अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष के भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर को प्रमुख मुद्दे बताया। पार्टी ने कहा कि इन पर ठोस समाधान खोजना संसद की प्राथमिकता होनी चाहिए।
मायावती ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण पर क्या कहा?
मायावती ने कहा कि अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, हेराफेरी और गबन को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने देश को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि धर्म का चुनावी स्वार्थ के लिए राजनीतिकरण करने वालों से जनता जवाबदेही माँग रही है और यह मुद्दा सड़कों से अदालतों तक और संसद तक गूँजेगा।
संसद मानसून सत्र 2026 कब से शुरू हो रहा है?
संसद का मानसून सत्र 2026 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है। बसपा प्रमुख मायावती ने इसके एक दिन पहले, 19 जुलाई को, एक्स पर पोस्ट कर सत्र के सुचारू और उत्पादक संचालन की अपील की।
मायावती ने वैश्विक परिस्थितियों पर क्या चिंता जताई?
मायावती ने कहा कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष तथा रुपये के अवमूल्यन से भारत की अर्थव्यवस्था और 140 करोड़ की आबादी का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सत्ता और विपक्ष से राजनीतिक द्वेष छोड़कर इन मुद्दों पर एकजुट होकर समाधान खोजने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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