मानसून सत्र 2026: मायावती की अपील — हंगामा छोड़ें, महंगाई-बेरोज़गारी पर हो सार्थक बहस
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 19 जुलाई को संसद के मानसून सत्र (जो 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है) की पूर्व संध्या पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक टकराव और हंगामे से ऊपर उठकर देश की ज्वलंत समस्याओं पर गंभीर और सार्थक चर्चा सुनिश्चित करें। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि महंगाई, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, परीक्षा पत्र लीक, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर संसद में ठोस समाधान खोजे जाने चाहिए।
मायावती का संसद से आह्वान
मायावती ने अपनी पोस्ट में लिखा कि देश और आम जनता की यह चिंता स्वाभाविक है कि क्या इस बार भी मानसून सत्र हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा, या फिर जनता की पीड़ा को शांत करने के लिए संसद में गंभीरता दिखाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जबरदस्त महंगाई, गरीबी, बेरोज़गारी और महिला असुरक्षा से उत्पन्न आक्रोश के माहौल को संसद को संजीदगी से लेना होगा।
अयोध्या चढ़ावा प्रकरण और जन आक्रोश
बसपा अध्यक्ष ने अयोध्या श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, हेराफेरी और गबन के मुद्दे पर व्यापक जन आक्रोश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि धर्म का चुनावी स्वार्थ के लिए राजनीतिकरण करने वालों से जनता जवाबदेही माँग रही है और यह मुद्दा सड़कों से लेकर अदालतों तक गूँज रहा है। उनके अनुसार, यह मुद्दा संसद में भी गर्म रहेगा।
विभिन्न राज्यों की स्थिति पर चिंता
मायावती ने बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद के हालात, राजस्थान में सरकारी लापरवाही के कारण गर्भवती महिलाओं की मौत, विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ के बढ़ते प्रचलन और वर्षों से बसे लोगों की कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण को संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया। उनका कहना था कि इन सरकारी रवैयों से संवैधानिक मूल्य चरमरा रहे हैं।
वैश्विक परिस्थितियों का भारत पर असर
बसपा प्रमुख ने अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष तथा रुपये के अवमूल्यन को भारत की अर्थव्यवस्था और जनजीवन के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर राजनीतिक द्वेष और आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता छोड़कर सत्ता और विपक्ष को एकजुट होकर समाधान खोजना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर 140 करोड़ की आबादी वाले देश में बहुजनों का भविष्य और अधिक अनिश्चित हो जाएगा।
संसद की जिम्मेदारी और सुशासन की अपेक्षा
मायावती ने स्पष्ट किया कि मानसून सत्र को बिना उत्तेजना, रोष और विद्वेष के, स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे नागरिकों की परेशानियाँ और न बढ़ें। उनके अनुसार, जनहितैषी सुशासन के लिए संसद का प्रभावी होना अनिवार्य है और इसकी शुरुआत इसी सत्र से होनी चाहिए।