मेदवेदेव का बड़ा दावा: ईरान के पास होर्मुज के अलावा बाब अल-मंदेब में भी 'बैकअप रणनीतिक ताकत'
सारांश
मुख्य बातें
रूसी सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव ने 5 जुलाई को तेहरान में आयोजित ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शिरकत के बाद एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अतिरिक्त बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में भी एक 'बैकअप रणनीतिक दबाव बिंदु' मौजूद है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार को प्रभावित करने में सक्षम है।
मेदवेदेव का मुख्य बयान
मेदवेदेव ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के लिए किसी परमाणु हथियार जितना रणनीतिक महत्व रखता है। उनके अनुसार, ईरान को यह भली-भाँति पता है कि उसके पास परमाणु हथियारों से भी अधिक मूल्यवान 'रणनीति' उपलब्ध है। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में की गई, जिसमें उन्होंने बाब अल-मंदेब को एक वैकल्पिक दबाव साधन के रूप में रेखांकित किया।
अमेरिका और इज़रायल पर आरोप
मेदवेदेव ने कहा कि वाशिंगटन के पास ईरान पर हमला करने का कोई ठोस कारण नहीं था, क्योंकि ईरान से अमेरिका को कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हवाई हमले का आदेश दिया, उस समय तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत जारी थी। उनके अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संघर्ष शुरू होने से पहले ईरानी परमाणु मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए एक रोडमैप प्रस्तावित किया था, जिसे अमेरिका और इज़रायल ने नज़रअंदाज़ कर दिया।
चेतावनी और संयम का संदेश
मेदवेदेव ने आगाह किया कि यदि क्षेत्र में बड़ा सशस्त्र संघर्ष भड़का तो इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर वैश्विक शिपिंग बाधित हो सकती है। उन्होंने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा, लेकिन क्षेत्र में संघर्ष चाहने वाले देशों को इसे याद रखना चाहिए।' साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ईरान ने संघर्ष के सबसे कठिन चरण को 'अत्यंत संयम' के साथ पार किया है।
हूती विद्रोहियों और लाल सागर का संदर्भ
गौरतलब है कि यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने इससे पहले भी बाब अल-मंदेब को बंद करने की धमकी दी है। 8 जून को उन्होंने लाल सागर में इज़रायली जहाजों पर प्रतिबंध की घोषणा की थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री व्यापार मार्गों को लेकर पहले से ही अनिश्चितता बनी हुई है।
भू-राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में तनाव अपने चरम पर है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता है। मेदवेदेव की यह टिप्पणी रूस की उस स्थिति को भी दर्शाती है जो ईरान के साथ उसके रणनीतिक संबंधों को रेखांकित करती है। आने वाले हफ्तों में इस क्षेत्र की कूटनीतिक गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नज़र टिकी रहेगी।