स्विट्जरलैंड वार्ता में ईरान के पास 'मजबूत साधन': उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा अरेफ का दावा
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा अरेफ ने रविवार, 21 जून को तेहरान में एक सरकारी बैठक के दौरान कहा कि स्विट्जरलैंड में चल रही बर्गेनस्टॉक वार्ताओं से 'सकारात्मक परिणाम' की उम्मीद है। उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्रीय कूटनीति में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है, जिसमें किसी भी देश को अलग-थलग करने की नीति अब व्यावहारिक विकल्प नहीं रहेगी।
ईरान का 'मजबूत साधन' क्या है
अरेफ ने दावा किया कि ईरान एक ऐसे 'मजबूत साधन' का उपयोग कर रहा है जिसे अब तक पूरी तरह आज़माया नहीं गया था और जो अन्य वार्ताकार पक्षों की तुलना में अधिक प्रभावशाली है। हालाँकि, उन्होंने इस 'साधन' का कोई विशेष उल्लेख नहीं किया, जिससे कूटनीतिक हलकों में अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान कूटनीतिक प्रक्रिया एक ऐसे राजनीतिक वातावरण की ओर बढ़ रही है, जहाँ क्षेत्रीय देशों के बीच अलगाव की नीति समाप्त होगी और सहयोग की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की चेतावनी
अरेफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान का है' और ऐतिहासिक रूप से ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा के लिए भारी बलिदान दिए हैं। उन्होंने चेताया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को हल्के में लेना उचित नहीं होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब होर्मुज को लेकर तनाव पहले से ही बना हुआ है। गौरतलब है कि वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से गुज़रता है, और इस पर किसी भी प्रतिबंध का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ारों पर सीधे पड़ सकता है।
होर्मुज और लेबनान संघर्षविराम का संबंध
ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने रविवार को एक सूत्र के हवाले से रिपोर्ट दी कि यदि लेबनान में संघर्षविराम का पालन नहीं किया जाता, तो होर्मुज को पूरी तरह खोला नहीं जाएगा।
वार्ता टीम के नज़दीकी सूत्र के अनुसार, यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग तब तक प्रतिबंधित रह सकता है जब तक ईरानी तेल की बिक्री के लिए आवश्यक छूट जारी नहीं की जाती। कथित तौर पर ईरान अपनी आर्थिक और कूटनीतिक माँगों को मनवाने के लिए इस रणनीतिक मार्ग को एक दबाव उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
क्षेत्रीय कूटनीति पर व्यापक असर
विश्लेषकों का मानना है कि बर्गेनस्टॉक वार्ताओं में ईरान की यह सक्रिय भागीदारी पश्चिम एशिया की बदलती कूटनीतिक गतिशीलता को दर्शाती है। यह Nवीं ऐसी स्थिति है जब ईरान ने होर्मुज को वार्ता में एक लीवर के रूप में उपयोग करने के संकेत दिए हैं।
आगे की वार्ताओं का नतीजा न केवल ईरान और पश्चिमी देशों के संबंधों, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।