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इजरायल-ईरान संघर्ष पर ट्रंप का दबाव तय करेगा अगला कदम: पूर्व राजनयिक केपी फैबियन

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इजरायल-ईरान संघर्ष पर ट्रंप का दबाव तय करेगा अगला कदम: पूर्व राजनयिक केपी फैबियन

सारांश

सीजफायर के दो महीने बाद इजरायल-ईरान फिर आमने-सामने हैं। पूर्व राजनयिक केपी फैबियन का कहना है कि ट्रंप इस संकट को रोकने की चाबी रखते हैं — लेकिन अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया, तो बाब अल-मंदेब और होर्मुज के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लग सकता है।

मुख्य बातें

सीजफायर के दो महीने बाद इजरायल और ईरान के बीच फिर सैन्य टकराव शुरू हुआ; लेबनान में हिज्बुल्लाह पर इजरायली हमले को ईरान ने मुख्य कारण बताया।
पूर्व राजनयिक केपी फैबियन के अनुसार, ट्रंप दोनों पक्षों को संघर्ष रोकने के लिए कह सकते हैं, और नेतन्याहू को मानना पड़ेगा क्योंकि इजरायल अमेरिकी हथियारों व कूटनीति पर निर्भर है।
हूती ने भी इजरायल पर रॉकेट दागे, जिससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ा।
बाब अल-मंदेब और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोनों बाधित हुए तो वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
फैबियन के अनुसार, ट्रंप का हस्तक्षेप न होने पर युद्ध जारी रहने और वैश्विक आर्थिक नुकसान की आशंका है।

सीजफायर के ठीक दो महीने बाद इजरायल और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव शुरू हो गया है। तेहरान ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के विरुद्ध इजरायली कार्रवाई को नए संघर्ष का मुख्य कारण बताते हुए हमला बोला, जिसके जवाब में इजरायली सेना ने भी ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल अवीव को जवाबी हमला न करने की सलाह दी है, जिससे कूटनीतिक हलकों में उनकी भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

ट्रंप का स्टैंड और इजरायल पर दबाव

पूर्व राजनयिक केपी फैबियन के अनुसार, मौजूदा सैन्य कार्रवाई ट्रंप को एक अनूठा अवसर दे सकती है। उन्होंने कहा, "ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई से निश्चित तौर पर तनाव बढ़ा है, लेकिन इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह कहने का अवसर भी मिल सकता है कि दोनों पक्ष जवाबी कार्रवाई कर चुके हैं और अब संघर्ष को यहीं रोक देना चाहिए।"

फैबियन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ट्रंप इस पर जोर देते हैं, तो इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को उनकी बात माननी पड़ेगी। उनके शब्दों में, "भले ही दुनिया सोचे कि इजरायली सेना बहुत शक्तिशाली है, लेकिन एक सच यह भी है कि इजरायल की सैन्य ताकत काफी हद तक अमेरिका के हथियारों, तकनीक और कूटनीतिक समर्थन पर निर्भर है।"

हिज्बुल्लाह और नए संघर्ष की जड़

फैबियन ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली हमलों को इस नए टकराव की बुनियादी वजह बताया। उन्होंने कहा, "ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि युद्धविराम सभी मोर्चों पर लागू होना चाहिए। हिज्बुल्लाह की स्थिति स्पष्ट है — वो चाहता है कि इजरायल दक्षिणी लेबनान से पीछे हटे और बमबारी बंद करे, तभी वह युद्धविराम पर सहमत होगा।"

यह ऐसे समय में आया है जब हूती ने भी इजरायल की ओर रॉकेट दागे हैं, जिससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा और गहरा हो गया है।

वैश्विक व्यापार पर संभावित असर

पूर्व राजनयिक ने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष बढ़ता है और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद हो जाता है, तो स्वेज नहर तक समुद्री यातायात बाधित होगा। उनके अनुसार, यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब — दोनों प्रमुख समुद्री मार्ग — एक साथ बाधित होते हैं, तो वैश्विक व्यापार पर गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।

गौरतलब है कि इन दोनों जलमार्गों से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और माल ढुलाई पर निर्भर है, जिससे यह संकट केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा।

आगे क्या हो सकता है

फैबियन के अनुसार, दो संभावित परिदृश्य हैं। पहला — ट्रंप नेतन्याहू पर दबाव डालें कि दोनों पक्ष जवाबी कार्रवाई कर चुके हैं और अब संघर्ष समाप्त होना चाहिए। दूसरा — यदि ऐसा नहीं होता, तो युद्ध जारी रह सकता है और उसके आर्थिक एवं भू-राजनीतिक परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों की नजर अब वाशिंगटन की अगली कूटनीतिक चाल पर टिकी है, जो इस संघर्ष की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यही ट्रंप का असली उत्तोलन है। लेकिन जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूकती है, वह यह है कि ट्रंप खुद एक आंतरिक राजनीतिक दबाव में हैं — एक ओर इजरायल समर्थक घरेलू आधार, दूसरी ओर बढ़ती तेल कीमतों और व्यापार व्यवधान का आर्थिक जोखिम। बाब अल-मंदेब और होर्मुज का एक साथ बंद होना केवल मध्य पूर्व की नहीं, भारत सहित पूरी एशियाई अर्थव्यवस्था की समस्या बन जाएगा।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इजरायल और ईरान के बीच नया संघर्ष क्यों शुरू हुआ?
सीजफायर के दो महीने बाद लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य कार्रवाई को ईरान ने नए संघर्ष का मुख्य कारण बताते हुए हमला बोला। इजरायली सेना ने भी जवाबी हवाई हमले किए।
ट्रंप इस संघर्ष को कैसे रोक सकते हैं?
पूर्व राजनयिक केपी फैबियन के अनुसार, ट्रंप नेतन्याहू पर यह दबाव बना सकते हैं कि दोनों पक्ष जवाबी कार्रवाई कर चुके हैं और अब संघर्ष रोकना चाहिए। चूँकि इजरायल की सैन्य ताकत अमेरिकी हथियारों और कूटनीतिक समर्थन पर निर्भर है, इसलिए नेतन्याहू को ट्रंप की बात माननी पड़ेगी।
हिज्बुल्लाह युद्धविराम के लिए क्या शर्त रख रहा है?
हिज्बुल्लाह की माँग है कि इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना पीछे हटाए और बमबारी बंद करे। तभी वह युद्धविराम पर सहमत होगा — यह ईरान की उस व्यापक माँग के अनुरूप है कि संघर्षविराम सभी मोर्चों पर एक साथ लागू हो।
इस संघर्ष से वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि संघर्ष बढ़ता है और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद होता है, तो स्वेज नहर तक समुद्री यातायात बाधित होगा। फैबियन के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब — दोनों एक साथ बंद होने पर वैश्विक व्यापार पर गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।
हूती की भूमिका इस संकट में क्या है?
हूती ने इजरायल की ओर रॉकेट दागे हैं, जिससे यह संघर्ष केवल इजरायल-ईरान तक सीमित नहीं रहा। फैबियन के अनुसार, इससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा और बढ़ गया है, खासकर ऐसे समय में जब ट्रंप पहले से कठिन कूटनीतिक स्थिति में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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