इजरायल-ईरान संघर्ष पर ट्रंप का दबाव तय करेगा अगला कदम: पूर्व राजनयिक केपी फैबियन
सारांश
मुख्य बातें
सीजफायर के ठीक दो महीने बाद इजरायल और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव शुरू हो गया है। तेहरान ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के विरुद्ध इजरायली कार्रवाई को नए संघर्ष का मुख्य कारण बताते हुए हमला बोला, जिसके जवाब में इजरायली सेना ने भी ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल अवीव को जवाबी हमला न करने की सलाह दी है, जिससे कूटनीतिक हलकों में उनकी भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
ट्रंप का स्टैंड और इजरायल पर दबाव
पूर्व राजनयिक केपी फैबियन के अनुसार, मौजूदा सैन्य कार्रवाई ट्रंप को एक अनूठा अवसर दे सकती है। उन्होंने कहा, "ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य कार्रवाई से निश्चित तौर पर तनाव बढ़ा है, लेकिन इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह कहने का अवसर भी मिल सकता है कि दोनों पक्ष जवाबी कार्रवाई कर चुके हैं और अब संघर्ष को यहीं रोक देना चाहिए।"
फैबियन ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ट्रंप इस पर जोर देते हैं, तो इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को उनकी बात माननी पड़ेगी। उनके शब्दों में, "भले ही दुनिया सोचे कि इजरायली सेना बहुत शक्तिशाली है, लेकिन एक सच यह भी है कि इजरायल की सैन्य ताकत काफी हद तक अमेरिका के हथियारों, तकनीक और कूटनीतिक समर्थन पर निर्भर है।"
हिज्बुल्लाह और नए संघर्ष की जड़
फैबियन ने लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली हमलों को इस नए टकराव की बुनियादी वजह बताया। उन्होंने कहा, "ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि युद्धविराम सभी मोर्चों पर लागू होना चाहिए। हिज्बुल्लाह की स्थिति स्पष्ट है — वो चाहता है कि इजरायल दक्षिणी लेबनान से पीछे हटे और बमबारी बंद करे, तभी वह युद्धविराम पर सहमत होगा।"
यह ऐसे समय में आया है जब हूती ने भी इजरायल की ओर रॉकेट दागे हैं, जिससे क्षेत्रीय युद्ध का खतरा और गहरा हो गया है।
वैश्विक व्यापार पर संभावित असर
पूर्व राजनयिक ने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष बढ़ता है और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद हो जाता है, तो स्वेज नहर तक समुद्री यातायात बाधित होगा। उनके अनुसार, यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब — दोनों प्रमुख समुद्री मार्ग — एक साथ बाधित होते हैं, तो वैश्विक व्यापार पर गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।
गौरतलब है कि इन दोनों जलमार्गों से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और माल ढुलाई पर निर्भर है, जिससे यह संकट केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा।
आगे क्या हो सकता है
फैबियन के अनुसार, दो संभावित परिदृश्य हैं। पहला — ट्रंप नेतन्याहू पर दबाव डालें कि दोनों पक्ष जवाबी कार्रवाई कर चुके हैं और अब संघर्ष समाप्त होना चाहिए। दूसरा — यदि ऐसा नहीं होता, तो युद्ध जारी रह सकता है और उसके आर्थिक एवं भू-राजनीतिक परिणाम पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों की नजर अब वाशिंगटन की अगली कूटनीतिक चाल पर टिकी है, जो इस संघर्ष की दिशा तय करेगी।