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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द करना पूर्व नियोजित षड्यंत्र : टी.एस. सिंह देव

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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द करना पूर्व नियोजित षड्यंत्र : टी.एस. सिंह देव

सारांश

छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द किए जाने को पूर्व नियोजित षड्यंत्र बताया है। उनका दावा है कि भोपाल में एक रात पहले से यह रूपरेखा तैयार थी और पीठासीन अधिकारी ने दबाव में आकर सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित निर्णयों को नजरअंदाज किया।

मुख्य बातें

सिंह देव ने 10 जून 2026 को आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द करना पूर्व नियोजित कदम था।
सिंह देव के अनुसार, भोपाल में एक रात पहले से ही इस कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही थी।
उनका तर्क है कि केवल लीगल नोटिस दिए जाने से उम्मीदवार की अयोग्यता सिद्ध नहीं होती और सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्णय इस विषय पर मौजूद हैं।
सिंह देव ने मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष न बन पाने को उन्होंने साजिश नहीं, बल्कि राजनीतिक गलतफहमी बताया।

छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह देव ने 10 जून 2026 को जांजगीर-चांपा में कहा कि मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द किया जाना एक पूर्व नियोजित कदम था और इसके पीछे सुनियोजित षड्यंत्र की आशंका को नकारा नहीं जा सकता। उनके अनुसार, यह कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और स्थापित कानूनी नियमों के सर्वथा विपरीत है।

नामांकन रद्द करने की पूर्व तैयारी का आरोप

सिंह देव ने दावा किया कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि भोपाल में इस संबंध में पहले से ही रूपरेखा तैयार की जा रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नामांकन निरस्त करने का निर्णय अचानक नहीं लिया गया, बल्कि एक रात पहले से ही इसकी योजना बनाई जा रही थी।

सिंह देव के अनुसार, जिस आधार पर नामांकन रद्द किया गया, वह कानूनी दृष्टि से पर्याप्त नहीं था। उन्होंने कहा कि केवल किसी व्यक्ति द्वारा लीगल नोटिस दिए जाने मात्र से किसी उम्मीदवार की अयोग्यता सिद्ध नहीं होती।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों की अनदेखी का आरोप

सिंह देव ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्णय पहले से मौजूद हैं और ऐसे कई मामले पूर्व में भी सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद संबंधित पीठासीन अधिकारी ने कथित तौर पर दबाव में आकर और किसी विशेष पक्ष को लाभ पहुँचाने की दृष्टि से नामांकन रद्द कर दिया।

उन्होंने माँग की कि यह निर्णय नियमों और प्रावधानों की भावना के विपरीत दिखाई देता है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

अशोक गहलोत प्रकरण पर सिंह देव का रुख

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष न बन पाने के सवाल पर सिंह देव ने कहा कि इसे किसी साजिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह एक राजनीतिक गलतफहमी का परिणाम था।

सिंह देव ने कहा कि गहलोत एक अनुभवी और परिपक्व नेता हैं। जब पार्टी नेतृत्व द्वारा निर्णय लिया जा चुका था, तब उन्हें अन्य राजनीतिक परिस्थितियों को अलग रखते हुए सीधे नामांकन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी।

क्या होगा आगे

सिंह देव की माँग के बाद अब यह देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस मामले को किस दिशा में ले जाता है। नामांकन रद्द किए जाने को लेकर कानूनी विकल्पों की संभावना भी बनी हुई है, जबकि पार्टी के भीतर इस प्रकरण को लेकर असंतोष उभरता दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह संगठनात्मक कमज़ोरी का संकेत है। गौरतलब है कि नामांकन रद्द किए जाने के कानूनी आधार पर सर्वोच्च न्यायालय की स्थापित व्याख्याएँ मौजूद हैं, फिर भी यदि पीठासीन अधिकारी पर दबाव के आरोप सही हैं, तो यह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अशोक गहलोत प्रकरण के साथ जोड़कर देखें तो यह पैटर्न बताता है कि कांग्रेस में उच्च-स्तरीय निर्णय प्रक्रिया अभी भी पारदर्शी नहीं है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन क्यों रद्द किया गया?
टी.एस. सिंह देव के अनुसार, नामांकन रद्द करने का आधार कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं था। उनका कहना है कि केवल लीगल नोटिस दिए जाने से उम्मीदवार की अयोग्यता सिद्ध नहीं होती और पीठासीन अधिकारी ने कथित तौर पर दबाव में आकर यह निर्णय लिया।
टी.एस. सिंह देव ने षड्यंत्र का आरोप किस आधार पर लगाया?
सिंह देव ने कहा कि विश्वसनीय सूत्रों से उन्हें पता चला कि भोपाल में एक रात पहले से ही नामांकन रद्द करने की रूपरेखा तैयार की जा रही थी। इसी आधार पर उन्होंने इसे पूर्व नियोजित कदम बताया।
सर्वोच्च न्यायालय के किन निर्णयों का हवाला दिया गया?
सिंह देव ने कहा कि इस प्रकार के नामांकन विवादों में सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्णय पहले से मौजूद हैं, हालाँकि उन्होंने किसी विशेष मामले का नाम नहीं लिया। उनके अनुसार, इन्हीं मिसालों के बावजूद नामांकन रद्द किया गया।
अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष न बन पाने पर सिंह देव का क्या कहना है?
सिंह देव ने इसे किसी साजिश का हिस्सा मानने से इनकार किया और कहा कि यह एक राजनीतिक गलतफहमी का परिणाम था। उनके अनुसार, गहलोत को पार्टी नेतृत्व का निर्णय होने के बाद अन्य परिस्थितियों को अलग रखकर नामांकन प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
सिंह देव ने निष्पक्ष जाँच की माँग की है। नामांकन रद्द किए जाने को लेकर कानूनी विकल्पों की संभावना बनी हुई है और कांग्रेस नेतृत्व का रुख इस मामले की दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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