पूर्वी सूडान में पाँच खदानें ढहीं, 10 मजदूरों की मौत; 21 घायल, बचाव अभियान जारी
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वी सूडान के रेड सी स्टेट के ओनी इलाके में शनिवार को पाँच खदानें एक के बाद एक ढह जाने से 10 खनिकों की मौत हो गई और 21 अन्य घायल हो गए। स्वयंसेवी संगठन 'दार हमार इमरजेंसी रूम' और घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों ने इसकी पुष्टि की है। खदानों के भीतर अब भी कुछ मजदूरों के फँसे होने की आशंका है और बचाव अभियान जारी है।
हादसे का घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा शनिवार को उस समय हुआ जब मजदूर जमीन के नीचे काम कर रहे थे। आसपास की खदानें क्रमशः ढह गईं और श्रमिक चट्टानों तथा मिट्टी के नीचे दब गए। नाम न जाहिर करने की शर्त पर एक खनिक ने बताया कि वहाँ मौजूद मजदूरों ने तुरंत उपलब्ध उपकरणों से फँसे साथियों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी, और मलबा हटाने के लिए बुलडोजर भी बुलाए गए।
घटनास्थल के कुछ हिस्सों तक पहुँचना बेहद मुश्किल बताया जा रहा है, जिसके कारण अभी तक लापता मजदूरों की सटीक संख्या का पता नहीं चल पाया है। कई घायल श्रमिकों को खदान से करीब 300 किलोमीटर दूर स्थित पोर्ट सूडान के अस्पतालों में भेजा गया है।
सरकारी पुष्टि और आधिकारिक रुख
सूडानी मिनरल रिसोर्सेज कंपनी ने रविवार को एक अलग बयान जारी कर ओनी इलाके में खदानें ढहने की पुष्टि की। हालाँकि, कंपनी ने मृतकों या घायलों की कोई आधिकारिक संख्या सार्वजनिक नहीं की। मृतकों और घायलों की संख्या 'दार हमार इमरजेंसी रूम' के रविवार को जारी बयान पर आधारित है।
कुछ ही दिन पहले हुई थी एक और दुर्घटना
यह हादसा वेस्ट कोर्डोफान स्टेट में अल-नुहुद के पास स्थित अल-जारा खदान के ढहने की घटना के कुछ ही दिन बाद हुआ है। उस हादसे में दर्जनों खनिकों की मौत हुई थी। यह ऐसे समय में आया है जब सूडान में खनन सुरक्षा पहले से ही गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
सूडान में खनन का संकटग्रस्त ढाँचा
छोटे स्तर पर और पारंपरिक तरीकों से होने वाला खनन सूडान में लाखों लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है। आँकड़ों के अनुसार, देश में निकाले जाने वाले कुल सोने का करीब 80 प्रतिशत इसी प्रकार के खनन से आता है। उत्तरी और पश्चिमी सूडान में 800 से अधिक खनन स्थल हैं, जहाँ 15 लाख से ज्यादा खनिक काम करते हैं।
सोना सूडान के लिए विदेशी मुद्रा अर्जन का एक प्रमुख जरिया है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, सूडान ने 2025 में 70 टन सोने का उत्पादन किया था। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजामों का अभाव और बुनियादी ढाँचे की खराब स्थिति मजदूरों के लिए जोखिम को लगातार बढ़ाती है।
आगे क्या होगा
बचाव दल अभी भी मलबे में फँसे संभावित जीवितों की तलाश में जुटे हैं। खदानों तक दुर्गम पहुँच के चलते अभियान में देरी हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सूडान में पारंपरिक खनन स्थलों पर सुरक्षा मानक लागू नहीं किए जाते, इस तरह की दुर्घटनाएँ जारी रहेंगी।