31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारतीय सेना और बीपीसीएल का 'एक्सट्रीम वेदर ग्रेड' डीजल लॉन्च, -42°C में भी रहेगा तरल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारतीय सेना और बीपीसीएल का 'एक्सट्रीम वेदर ग्रेड' डीजल लॉन्च, -42°C में भी रहेगा तरल

सारांश

भारतीय सेना और बीपीसीएल ने मिलकर सिर्फ एक साल में वह कर दिखाया जो दशकों की समस्या थी — -42°C पर भी न जमने वाला XWG डीजल। अब लद्दाख की कड़कड़ाती रातों में सैनिकों को टैंक बार-बार स्टार्ट करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

मुख्य बातें

भारतीय सेना और बीपीसीएल ने मिलकर एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल विकसित किया, जो -42 डिग्री सेल्सियस पर भी तरल बना रहता है।
थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने 31 जुलाई 2026 को इस विशेष ईंधन का आधिकारिक फ्लैग-ऑफ किया।
यह ईंधन मात्र एक वर्ष में विकसित किया गया; इसका फ्लैश पॉइंट लगभग 50 डिग्री सेल्सियस है, जो भंडारण सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में तैनात टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को अब रात में बार-बार स्टार्ट करने की ज़रूरत नहीं होगी।
यह ईंधन सेना के 'ए' और 'बी' श्रेणी दोनों प्रकार के सैन्य वाहनों के लिए उपयुक्त है।
जनरल सेठ ने इसे सैनिकों की ऑपरेशनल क्षमता और मनोबल दोनों के लिए 'गेम चेंजर' बताया।

भारतीय सेना और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने मिलकर एक ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धि हासिल की है — एक विशेष एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल विकसित किया गया है जो -42 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी तरल अवस्था में बना रहेगा। 31 जुलाई 2026 को थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने इस विशेष ईंधन का आधिकारिक फ्लैग-ऑफ किया। यह ईंधन लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे अत्यधिक ठंडे हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में तैनात सैन्य वाहनों की ऑपरेशनल क्षमता को बड़े पैमाने पर बेहतर बनाएगा।

समस्या क्या थी और क्यों पड़ी ज़रूरत

भारतीय सेना -50 डिग्री से +50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में सक्रिय रहती है। उत्तरी सीमाओं पर अत्यधिक ठंड के दौरान सामान्य डीजल में मौजूद पैराफिन वैक्स जमने लगता है, जिससे ऑयल फिल्टर चोक हो जाते हैं और वाहन स्टार्ट होने में गंभीर बाधा आती है। इस समस्या से निपटने के लिए टैंकों और बीएमपी (बख्तरबंद वाहनों) को पूरी रात में तीन से चार बार स्टार्ट और बंद करना पड़ता था, ताकि इंजन सिस्टम सक्रिय बना रहे। यह प्रक्रिया सैनिकों — विशेष रूप से चालकों — के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से अत्यंत थकाऊ थी।

एक साल में तैयार हुआ समाधान

थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने बताया कि भारतीय सेना ने अपनी परिचालन ज़रूरत और समस्या को बीपीसीएल के सामने स्पष्ट रूप से रखा और दोनों संस्थानों ने मिलकर मात्र एक वर्ष के भीतर इस ईंधन को विकसित कर लिया। उन्होंने इसे 'गेम चेंजर' बताते हुए कहा, "यह वास्तव में एक शानदार उपलब्धि है।" जनरल सेठ ने यह भी साझा किया कि वे स्वयं आर्मर्ड कोर से हैं और अपने सैन्य जीवन के शुरुआती करीब 20 वर्षों तक ईंधन, तेल और लुब्रिकेंट्स के इर्द-गिर्द काम करते रहे हैं, इसलिए इस ईंधन का महत्व वे व्यक्तिगत रूप से समझते हैं।

XWG डीजल की तकनीकी विशेषताएँ

बीपीसीएल द्वारा विशेष तकनीक की मदद से तैयार इस एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल का पोर पॉइंट -42 डिग्री सेल्सियस है — यानी यह इतने कम तापमान पर भी तरल रूप में प्रवाहित होता रहेगा। इसके साथ ही इसका फ्लैश पॉइंट लगभग 50 डिग्री सेल्सियस है, जो सामान्य भंडारण और परिवहन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इस प्रकार यह ईंधन अत्यधिक ठंड और गर्मी — दोनों परिस्थितियों में प्रभावी रहेगा।

सैनिकों पर असर और ऑपरेशनल लाभ

जनरल सेठ ने उस चालक की स्थिति का उल्लेख किया जिसे पूरी रात जागकर गाड़ियों को बार-बार स्टार्ट करना पड़ता था, और फिर भी अगली सुबह पूरी ऊर्जा के साथ ड्यूटी के लिए तैयार रहने की अपेक्षा की जाती थी। यह नया ईंधन सेना के 'ए' श्रेणी के वाहनों (टैंक और भारी बख्तरबंद वाहन) तथा 'बी' श्रेणी के वाहनों (ट्रक और हल्के सैन्य वाहन) — दोनों के लिए उपयोगी होगा। उनके अनुसार, यह ईंधन सैनिकों की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उनका मनोबल भी ऊँचा करेगा।

युद्धनीति और भविष्य की दृष्टि

जनरल सेठ ने रेखांकित किया कि आधुनिक युद्धकला में मोबिलिटी सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। यदि किसी सेना की गतिशीलता बाधित हो, तो प्रभावी सैन्य कार्रवाई करना अत्यंत कठिन हो जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तरी सीमाओं पर भारत की रणनीतिक तैयारियों को लगातार मज़बूत किया जा रहा है। भविष्य में इस तरह के उन्नत ईंधन भारतीय सेना को तेज़ और निर्बाध गतिशीलता प्रदान करेंगे, जो आधुनिक युद्धक्षेत्र की अनिवार्य ज़रूरत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरकारी रक्षा प्रतिष्ठान और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के बीच तेज़ और उद्देश्यपूर्ण सहयोग की मिसाल है — एक साल में समस्या से समाधान तक पहुँचना असाधारण है। गौरतलब है कि भारतीय सेना दशकों से इस समस्या के साथ काम करती रही, और समाधान तब आया जब ज़रूरत को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया। असली परीक्षा अब बड़े पैमाने पर आपूर्ति श्रृंखला की होगी — क्या यह ईंधन समय पर और पर्याप्त मात्रा में लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँच पाएगा? साथ ही, यह घटनाक्रम 'आत्मनिर्भर भारत' की उस संभावना को रेखांकित करता है जो तब साकार होती है जब सैन्य ज़रूरत और औद्योगिक क्षमता एक साथ काम करें।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल क्या है?
XWG डीजल एक विशेष सैन्य ईंधन है जिसे भारतीय सेना और बीपीसीएल ने मिलकर विकसित किया है। इसका पोर पॉइंट -42 डिग्री सेल्सियस है, यानी यह अत्यधिक ठंड में भी तरल बना रहता है और सैन्य वाहनों का इंजन बिना रुकावट चालू रह सकता है।
यह ईंधन भारतीय सेना के लिए क्यों ज़रूरी था?
लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में सर्दियों में सामान्य डीजल जम जाता था, जिससे टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को रात में बार-बार स्टार्ट करना पड़ता था। इससे सैनिकों — खासकर चालकों — की नींद और ऊर्जा दोनों प्रभावित होती थी।
XWG डीजल को विकसित करने में कितना समय लगा?
थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ के अनुसार, भारतीय सेना और बीपीसीएल ने मिलकर मात्र एक वर्ष के भीतर इस ईंधन को विकसित कर लिया। इसे 31 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया।
इस ईंधन की तकनीकी विशेषताएँ क्या हैं?
XWG डीजल का पोर पॉइंट -42 डिग्री सेल्सियस है, जिसका अर्थ है कि यह इतनी ठंड में भी प्रवाहित होता रहता है। इसका फ्लैश पॉइंट लगभग 50 डिग्री सेल्सियस है, जो सामान्य भंडारण और परिवहन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
यह ईंधन किन सैन्य वाहनों में इस्तेमाल होगा?
यह ईंधन सेना के 'ए' श्रेणी के वाहनों जैसे टैंक और भारी बख्तरबंद वाहन, तथा 'बी' श्रेणी के वाहनों जैसे ट्रक और हल्के सैन्य वाहन — दोनों के लिए उपयुक्त है। यह मुख्य रूप से उत्तरी सीमाओं और हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में तैनात वाहनों के लिए है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
    देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, BPCL मार्केटिंग डायरेक्टर ने दी जानकारी; तेल कंपनियां रोज़ ₹600-700 करोड़ का नुकसान उठा रहीं
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले