छठी अनुसूची लागू हो, घुसपैठ के नाम पर असली नागरिकों को प्रताड़ित करना गलत: AIUDF विधायक मजीबुर रहमान
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के विधायक मजीबुर रहमान ने 14 जुलाई 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए छठी अनुसूची को तत्काल लागू करने की माँग की और साफ कहा कि घुसपैठियों के नाम पर असम के वैध नागरिकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों की संवैधानिक माँगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
छठी अनुसूची पर विधायक का रुख
विधायक मजीबुर रहमान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग लंबे समय से छठी अनुसूची लागू करने की माँग कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह ग्रामीण निवासियों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को यह अधिकार सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है, तो इस पर गंभीर विचार-विमर्श होना चाहिए।
हालाँकि, उन्होंने यह भी चेताया कि कुछ तत्व छठी अनुसूची के मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं, जो उनके अनुसार अस्वीकार्य है।
असम में बांग्लादेशी चिन्हीकरण प्रक्रिया पर सवाल
राज्य में अब तक 1,692 लोगों को बांग्लादेशी नागरिक के रूप में चिन्हित किए जाने के सवाल पर विधायक ने कहा कि असली घुसपैठियों की पहचान करने के कदम का स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन उन्होंने इस प्रक्रिया में खामियों की ओर ध्यान दिलाया।
उनके अनुसार, दस्तावेज़ों में मामूली त्रुटि मिलने पर भी वैध नागरिकों को बांग्लादेशी घोषित किया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि पात्र नागरिकों को लगातार बाहरी होने का एहसास दिलाया जा रहा है, जो मानसिक प्रताड़ना के समान है।
सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
विधायक ने इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के हालिया हस्तक्षेप का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि केवल नाम में सुधार के आधार पर किसी भी नागरिक को बांग्लादेशी नहीं ठहराया जा सकता। यह निर्णय उन हज़ारों लोगों के लिए राहत की बात है, जो दस्तावेज़ी त्रुटियों के कारण संदेह के घेरे में आ गए थे।
राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब असम में नागरिकता और घुसपैठ का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) प्रक्रिया के बाद भी राज्य में नागरिकता निर्धारण को लेकर विवाद जारी है। AIUDF लंबे समय से अल्पसंख्यक समुदायों के हितों की पैरवी करती रही है, और मजीबुर रहमान का यह बयान उसी दिशा में एक और कदम है।
आगे देखना होगा कि असम सरकार छठी अनुसूची की माँग और नागरिक चिन्हीकरण प्रक्रिया की समीक्षा के सवाल पर क्या रुख अपनाती है।