PM मोदी: भारत की नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता 400% बढ़ी, दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स' को संबोधित करते हुए भारत की पर्यावरण और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में हुई उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि भारत आज क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और यह एक नए युग की शुरुआत है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों पर गहन विमर्श जारी है।
हाइड्रोजन ट्रेन और क्लीन मोबिलिटी
मोदी ने सम्मेलन में बताया कि हाल ही में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का परिचालन शुरू हुआ है, जो कथित तौर पर दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन भी है। उन्होंने इसे क्लीन मोबिलिटी के एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उनके अनुसार, 2014 से पहले देश में सालाना केवल 3,000 इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बिकते थे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या बढ़कर लगभग 25 लाख हो गई — जो एक असाधारण वृद्धि है।
उन्होंने फास्टैग का ज़िक्र करते हुए कहा कि इससे टोल बूथों पर प्रतीक्षा समय और ईंधन की बर्बादी में उल्लेखनीय कमी आई है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार का उल्लेख करते हुए मोदी ने बताया कि 2014 तक देश के केवल 5 शहरों में 250 किलोमीटर से कम का मेट्रो नेटवर्क था, जो अब 20 से अधिक शहरों में फैल चुका है और भारत उन देशों में शामिल हो गया है जिनके पास 1,000 किलोमीटर से अधिक का मेट्रो नेटवर्क है।
नवीकरणीय ऊर्जा में उपलब्धियाँ
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत की विंड एनर्जी क्षमता तीन गुना बढ़ी है और हाइड्रो-एनर्जी क्षमता में भी मज़बूत वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार न्यूक्लियर एनर्जी पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है और इन सभी क्षेत्रों में निजी क्षेत्र (प्राइवेट प्लेयर्स) के लिए भी अवसर खोले जा रहे हैं। इन समेकित प्रयासों के परिणामस्वरूप देश की नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रेलवे के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इससे करोड़ों लीटर डीजल की बचत हुई है, जिसका सीधा लाभ पर्यावरण को मिला है। गौरतलब है कि रेलवे विद्युतीकरण भारत के कार्बन उत्सर्जन में कटौती के सबसे बड़े एकल उपायों में से एक माना जाता है।
जल संरक्षण और प्राकृतिक कृषि
जल संरक्षण के मोर्चे पर प्रधानमंत्री ने बताया कि देशभर में 70,000 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए हैं। इसके अलावा 'कैच द रेन' पहल के तहत करीब 1.5 करोड़ जल संचयन संरचनाएँ स्थापित की गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत का विकास तेज़ भी है और टिकाऊ (सस्टेनेबल) भी।
नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत 12.5 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती के क्लस्टर विकसित किए गए हैं। इसके साथ ही जलवायु के अनुकूल करीब 3,000 किस्म की फसलें तैयार की गई हैं। एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने के प्रयासों के चलते पिछले 12 वर्षों में देश का अत्यंत घना वन क्षेत्र 22 प्रतिशत बढ़ा है।
प्लास्टिक प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी
मोदी ने प्लास्टिक कचरे की चुनौती पर बात करते हुए कहा कि भारत ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया है। 'रिड्यूस, रीयूज़ और रीसाइकल' के सिद्धांत पर चलते हुए सर्कुलर इकोनॉमी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज देश में प्रतिदिन हज़ारों टन कचरे को पुनर्चक्रित (रीसाइकल) किया जा रहा है। गोबरधन योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदला जा रहा है।
वैश्विक संदर्भ और आगे की राह
यह भाषण ऐसे समय में आया है जब भारत 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर अपनी प्रतिबद्धता को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार दोहरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की नवीकरणीय ऊर्जा में तेज़ बढ़ोतरी उत्साहजनक है, लेकिन जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की गति और रोज़गार सृजन के आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि भविष्य में महत्वपूर्ण होगी। प्रधानमंत्री के इस संबोधन से स्पष्ट है कि भारत अपनी हरित अर्थव्यवस्था की कहानी को वैश्विक मंच पर और अधिक सक्रियता से प्रस्तुत करने की रणनीति अपना रहा है।