11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पुणे के मोशी में तीन मंजिला इमारत हादसा: तीन दिन बाद भी मलबा हटाने का काम जारी, पीड़ित परिजन ने लगाया लापरवाही का आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पुणे के मोशी में तीन मंजिला इमारत हादसा: तीन दिन बाद भी मलबा हटाने का काम जारी, पीड़ित परिजन ने लगाया लापरवाही का आरोप

सारांश

पुणे के मोशी में 8 जुलाई को तीन मंजिला इमारत ढहने के तीन दिन बाद भी मलबे में लोग फंसे हैं। 15 पोकलेन और NDRF की टीम काम में जुटी है, लेकिन पीड़ित के परिजन पहले 8 घंटे की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं। प्रशासन ने जाँच और सख्त कार्रवाई का वादा किया है।

मुख्य बातें

पुणे के मोशी इलाके में 8 जुलाई को एक तीन मंजिला इमारत ढह गई; 11 जुलाई तक मलबा हटाने का काम जारी है।
एक पीड़ित के भाई ने आरोप लगाया कि हादसे के शुरुआती 8 घंटे में प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पिंपरी-चिंचवड़ म्युनिसिपल कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने बताया कि 15 पोकलेन और 2 नई मशीनें बचाव में लगी हैं।
NDRF ने इसे कठिन अभियान बताया; ऊपरी मंजिल का स्लैब तोड़ा जा चुका है, निचले फ्लोर पर काम जल्द शुरू होगा।
म्युनिसिपल कमिश्नर ने बचाव अभियान के बाद पूरे मामले की जाँच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

पुणे के मोशी इलाके में 8 जुलाई को एक तीन मंजिला इमारत के अचानक ढह जाने से मची तबाही के तीन दिन बाद भी मलबा हटाने का कार्य 11 जुलाई तक जारी है। इमारत के मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव दल लगातार काम कर रहा है, जबकि एक फंसे हुए व्यक्ति के भाई ने प्रशासन पर बचाव अभियान में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।

परिजन का लापरवाही का आरोप

मलबे में फंसे एक पीड़ित के भाई ने कहा कि बचाव कार्य की गति बेहद धीमी रही। उनके अनुसार, हादसे के शुरुआती 8 घंटों में प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अंदर फंसे लोगों की स्थिति और गंभीर होती गई। उन्होंने कहा, 'इतने घंटे हो गए कि अब वे जीवित हैं या नहीं, इसको लेकर भी संदेह बढ़ गया है। किसी भी अधिकारी की ओर से कुछ बताया नहीं जा रहा है। बीते तीन दिन से हम यहीं खड़े हैं।' परिजनों की यह पीड़ा उस अनिश्चितता को दर्शाती है जो लंबे बचाव अभियानों में अक्सर सामने आती है।

प्रशासन का पक्ष: तेज़ बचाव का दावा

पिंपरी-चिंचवड़ म्युनिसिपल कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने बताया कि बचाव कार्य तेज़ गति से चल रहा है। उन्होंने कहा, 'हम दो नई मशीनें लाए हैं, जो कंक्रीट के स्लैब, कॉलम और बीम को आसानी से तोड़ने में मदद कर रही हैं।' उन्होंने जानकारी दी कि 15 पोकलेन मशीनें बचाव कार्य में लगी हुई हैं और ऊपरी मंजिल के स्लैब को तोड़ने में सफलता मिल चुकी है।

बचाव की जटिलता

म्युनिसिपल कमिश्नर ने स्वीकार किया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के अनुसार यह अभियान काफी कठिन है। इमारत के गिरने के तरीके के कारण बचाव दल को अंदर प्रवेश करने में बड़ी मुश्किल हो रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही निचले फ्लोर के स्लैब को तोड़ने का काम शुरू होगा, जिसके बाद फंसे हुए लोगों तक पहुँचा जा सकेगा। यह ऐसे समय में आया है जब बचाव अभियानों में देरी को लेकर देशभर में प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठते रहे हैं।

जाँच और कार्रवाई का आश्वासन

म्युनिसिपल कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल पूरा ध्यान फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान समाप्त होने के बाद पूरे मामले की जाँच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि इमारत गिरने की घटनाएँ महाराष्ट्र में पुरानी और अनधिकृत निर्माण के सवाल को एक बार फिर सामने ला देती हैं।

आगे की स्थिति

बचाव दल के निचले फ्लोर तक पहुँचने के बाद ही फंसे लोगों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। परिजन घटनास्थल पर डटे हुए हैं और हर अपडेट का इंतज़ार कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, बचाव अभियान के साथ-साथ इमारत के ढहने के कारणों की भी जाँच की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

महाराष्ट्र में आपदा प्रतिक्रिया की पुरानी कमज़ोरियों को फिर उजागर करता है। प्रशासन 'तेज़ बचाव' का दावा कर रहा है, लेकिन तीन दिन बाद भी लोगों का मलबे में होना इस दावे पर सवाल खड़े करता है। इमारत गिरने के कारणों — अनधिकृत निर्माण, संरचनात्मक खामियाँ, या निगरानी की विफलता — की जाँच बचाव के बाद होगी, लेकिन महाराष्ट्र में ऐसे हादसों के बाद जाँच की घोषणाएँ अक्सर नतीजों तक नहीं पहुँचतीं। जवाबदेही तय करने की असली परीक्षा अब शुरू होती है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे के मोशी में इमारत कब और कैसे गिरी?
पुणे के मोशी इलाके में 8 जुलाई को एक तीन मंजिला इमारत अचानक ढह गई, जिसमें कई लोग मलबे में दब गए। हादसे के कारणों की जाँच बचाव अभियान पूरा होने के बाद की जाएगी।
मोशी बिल्डिंग कोलैप्स में बचाव अभियान कितना आगे बढ़ा है?
11 जुलाई तक ऊपरी मंजिल के स्लैब को तोड़ा जा चुका है और 15 पोकलेन मशीनें मलबा हटाने में जुटी हैं। NDRF के अनुसार यह अभियान काफी कठिन है और निचले फ्लोर तक पहुँचने के बाद ही फंसे लोगों की स्थिति स्पष्ट होगी।
पीड़ित के परिजन ने किस लापरवाही का आरोप लगाया?
एक पीड़ित के भाई ने कहा कि हादसे के शुरुआती 8 घंटों में प्रशासन की ओर से कोई बचाव कार्य नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि तीन दिन बाद भी कोई अधिकारी परिजनों को अंदर फंसे लोगों की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं दे रहा।
पिंपरी-चिंचवड़ म्युनिसिपल कमिश्नर ने क्या कहा?
म्युनिसिपल कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने कहा कि बचाव कार्य तेज़ गति से चल रहा है और दो नई मशीनें कंक्रीट तोड़ने में मदद कर रही हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बचाव अभियान समाप्त होने के बाद पूरे मामले की जाँच होगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मोशी इमारत हादसे में आगे क्या होगा?
बचाव दल जल्द ही निचले फ्लोर के स्लैब को तोड़ने का काम शुरू करेगा, जिसके बाद फंसे हुए लोगों तक पहुँचा जा सकेगा। इसके साथ ही प्रशासन ने इमारत गिरने के कारणों और ज़िम्मेदारी की जाँच का भी वादा किया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 2 दिन पहले
  7. 5 दिन पहले
  8. 6 दिन पहले