पुणे के मोशी में तीन मंजिला इमारत हादसा: तीन दिन बाद भी मलबा हटाने का काम जारी, पीड़ित परिजन ने लगाया लापरवाही का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पुणे के मोशी इलाके में 8 जुलाई को एक तीन मंजिला इमारत के अचानक ढह जाने से मची तबाही के तीन दिन बाद भी मलबा हटाने का कार्य 11 जुलाई तक जारी है। इमारत के मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए बचाव दल लगातार काम कर रहा है, जबकि एक फंसे हुए व्यक्ति के भाई ने प्रशासन पर बचाव अभियान में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।
परिजन का लापरवाही का आरोप
मलबे में फंसे एक पीड़ित के भाई ने कहा कि बचाव कार्य की गति बेहद धीमी रही। उनके अनुसार, हादसे के शुरुआती 8 घंटों में प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अंदर फंसे लोगों की स्थिति और गंभीर होती गई। उन्होंने कहा, 'इतने घंटे हो गए कि अब वे जीवित हैं या नहीं, इसको लेकर भी संदेह बढ़ गया है। किसी भी अधिकारी की ओर से कुछ बताया नहीं जा रहा है। बीते तीन दिन से हम यहीं खड़े हैं।' परिजनों की यह पीड़ा उस अनिश्चितता को दर्शाती है जो लंबे बचाव अभियानों में अक्सर सामने आती है।
प्रशासन का पक्ष: तेज़ बचाव का दावा
पिंपरी-चिंचवड़ म्युनिसिपल कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने बताया कि बचाव कार्य तेज़ गति से चल रहा है। उन्होंने कहा, 'हम दो नई मशीनें लाए हैं, जो कंक्रीट के स्लैब, कॉलम और बीम को आसानी से तोड़ने में मदद कर रही हैं।' उन्होंने जानकारी दी कि 15 पोकलेन मशीनें बचाव कार्य में लगी हुई हैं और ऊपरी मंजिल के स्लैब को तोड़ने में सफलता मिल चुकी है।
बचाव की जटिलता
म्युनिसिपल कमिश्नर ने स्वीकार किया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के अनुसार यह अभियान काफी कठिन है। इमारत के गिरने के तरीके के कारण बचाव दल को अंदर प्रवेश करने में बड़ी मुश्किल हो रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही निचले फ्लोर के स्लैब को तोड़ने का काम शुरू होगा, जिसके बाद फंसे हुए लोगों तक पहुँचा जा सकेगा। यह ऐसे समय में आया है जब बचाव अभियानों में देरी को लेकर देशभर में प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठते रहे हैं।
जाँच और कार्रवाई का आश्वासन
म्युनिसिपल कमिश्नर विजय सूर्यवंशी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल पूरा ध्यान फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान समाप्त होने के बाद पूरे मामले की जाँच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि इमारत गिरने की घटनाएँ महाराष्ट्र में पुरानी और अनधिकृत निर्माण के सवाल को एक बार फिर सामने ला देती हैं।
आगे की स्थिति
बचाव दल के निचले फ्लोर तक पहुँचने के बाद ही फंसे लोगों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। परिजन घटनास्थल पर डटे हुए हैं और हर अपडेट का इंतज़ार कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, बचाव अभियान के साथ-साथ इमारत के ढहने के कारणों की भी जाँच की जाएगी।