मध्य प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू: घरों में कचरा 4 श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार ने 7 जुलाई 2026 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए, जो राज्य के सभी शहरी निकायों और सरकारी विभागों पर लागू होंगे। इन नियमों के तहत प्रत्येक घर से निकलने वाले कचरे को संग्रहण वाहन को सौंपने से पहले चार निर्धारित श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा। शहरों में तेज़ी से बढ़ती कचरे की मात्रा और लैंडफिल पर बढ़ते दबाव को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है।
कचरे की चार श्रेणियाँ क्या हैं
नए नियमों के अनुसार, नागरिकों को अपने घरेलू कचरे को गीला कचरा (रसोई एवं खाद्य अपशिष्ट), सूखा कचरा (कागज़, प्लास्टिक, धातु आदि), सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल श्रेणी का कचरा — इन चार भागों में अलग करना होगा। अधिकृत संग्रहण वाहन के आने पर ही यह पृथक कचरा सौंपा जाए, ऐसा निर्देश दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार घरों में होम कंपोस्टिंग को प्रोत्साहित कर रही है, जिससे गीले कचरे का उपयोग जैविक खाद बनाने में किया जा सके। पुराने कपड़ों, पुस्तकों और अन्य उपयोगी घरेलू सामान के लिए रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल (RRR) केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और निर्देश
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य के स्वच्छता अभियान में जनभागीदारी की निर्णायक भूमिका रही है। उन्होंने कहा, 'ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को और अधिक मज़बूत करेंगे।'
यादव ने सभी शहरी निकायों को निर्देश दिया है कि घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और झुग्गी बस्तियों से नियमित घर-घर कचरा संग्रहण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने 'मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी' के सिद्धांत को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, स्वस्थ और टिकाऊ मध्य प्रदेश बनाया जा सकता है।
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर रोक और जागरूकता अभियान
नागरिकों से एकल उपयोग वाले प्लास्टिक (सिंगल-यूज़ प्लास्टिक) का उपयोग कम करने और इसके स्थान पर कपड़े के थैले तथा पुनः उपयोग योग्य पानी की बोतलों को अपनाने की अपील की गई है। कचरा पृथक्करण के नियमों और RRR केंद्रों के संचालन की जानकारी देने के लिए राज्यभर में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
आम जनता पर असर
ये नियम राज्य के सभी नागरिकों, संस्थाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर समान रूप से लागू होंगे। गौरतलब है कि भोपाल, इंदौर सहित मध्य प्रदेश के कई शहर पहले से स्वच्छता सर्वेक्षण में अग्रणी रहे हैं — इन नियमों से उस स्थिति को और सुदृढ़ करने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन से शहरी स्वच्छता में सुधार होगा, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा, प्रदूषण कम होगा और पूरे राज्य में एक सक्षम कचरा प्रबंधन प्रणाली स्थापित हो सकेगी।
आगे की राह
यह कदम ऐसे समय में आया है जब देशभर के शहरी निकाय लैंडफिल संकट और प्लास्टिक प्रदूषण से जूझ रहे हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन प्रणाली के ज़रिए मध्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित किया जाए। नियमों के क्रियान्वयन की निगरानी संबंधित शहरी निकाय करेंगे।