मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: वडोदरा में 2 घंटे 13 मिनट में 40 मीटर गर्डर लॉन्च, NHSRCL का बड़ा कीर्तिमान

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मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: वडोदरा में 2 घंटे 13 मिनट में 40 मीटर गर्डर लॉन्च, NHSRCL का बड़ा कीर्तिमान

सारांश

वडोदरा के व्यस्ततम कॉरिडोर में जहाँ रोज़ाना 70,000 वाहन और 100 से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं, वहाँ NHSRCL ने सिर्फ 2 घंटे 13 मिनट में 40 मीटर का गर्डर स्थापित कर दिया। मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना अब 349 किमी वायाडक्ट और 8 स्टेशनों की नींव के साथ तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ रही है।

मुख्य बातें

वडोदरा के वडसर रोड ओवर ब्रिज पर 40 मीटर लंबा गर्डर FSLM तकनीक से मात्र 2 घंटे 13 मिनट में स्थापित किया गया।
निर्माण स्थल पर प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रेनें और 70,000 वाहन गुजरते हैं, फिर भी कार्य बिना व्यवधान के पूरा हुआ।
508 किमी के कॉरिडोर में से 349 किमी वायाडक्ट और 443 पियर्स का निर्माण पूर्ण।
5.7 लाख से अधिक नॉइज़ बैरियर्स लगाए गए, जो 288 किमी को कवर करते हैं।
सभी 8 स्टेशनों — वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद-नाडियाड, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती — की नींव पूरी।
बीकेसी–शिलफाटा के बीच 21 किमी लंबी टनल में से 5 किमी का काम पूरा, शेष TBM से जारी।

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने वडोदरा के वडसर रोड ओवर ब्रिज पर 40 मीटर लंबे गर्डर को फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड (FSLM) के जरिए मात्र 2 घंटे 13 मिनट में सफलतापूर्वक स्थापित कर मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि इसलिए और भी उल्लेखनीय है क्योंकि यह कार्य एक अत्यंत व्यस्त शहरी कॉरिडोर में संपन्न हुआ, जहाँ प्रतिदिन 100 से अधिक ट्रेनें और लगभग 70,000 वाहन आवाजाही करते हैं।

फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड क्यों है खास

FSLM तकनीक में पूरे स्ट्रक्चर को एक साथ लॉन्च किया जाता है, जिससे निर्माण कार्य तेज़ी से और अधिक सुरक्षित तरीके से पूरा होता है। पारंपरिक खंड-दर-खंड निर्माण पद्धति की तुलना में यह विधि न केवल समय बचाती है, बल्कि घनी आबादी और यातायात वाले क्षेत्रों में व्यवधान को भी न्यूनतम रखती है। गौरतलब है कि वडसर जैसे व्यस्त कॉरिडोर में इस स्तर की तकनीकी सटीकता से काम करना अपने आप में एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती थी।

परियोजना की मौजूदा प्रगति

508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर अब तक 349 किलोमीटर वायाडक्ट और 443 पियर्स का निर्माण पूरा हो चुका है। इसके अलावा 17 नदी पुल, 5 प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (PSC) ब्रिज और 13 स्टील ब्रिज भी बनकर तैयार हो चुके हैं। ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 5.7 लाख से अधिक नॉइज़ बैरियर्स लगाए जा चुके हैं, जो लगभग 288 किलोमीटर के हिस्से को कवर करते हैं।

ट्रैक और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की स्थिति

ट्रैक बिछाने के मोर्चे पर 374 ट्रैक किलोमीटर (187 रूट किलोमीटर) का RC ट्रैक बेड तैयार हो चुका है और 191 रूट किलोमीटर ट्रैक स्लैब भी निर्मित हो चुके हैं। इनमें से 74 रूट किलोमीटर में ट्रैक स्लैब बिछाकर सीमेंट अस्फाल्ट मोर्टार (CAM) इंजेक्ट किया जा चुका है। इलेक्ट्रिकल सिस्टम के तहत 7,700 से अधिक OHE मास्ट स्थापित किए जा चुके हैं, जो लगभग 179 रूट किलोमीटर को कवर करते हैं। टॉप कंडक्टर स्ट्रिंगिंग का कार्य भी आरंभ हो चुका है, जो ट्रेन के विद्युत संचालन के लिए अनिवार्य है।

टनल निर्माण और स्टेशनों की स्थिति

टनल निर्माण के क्षेत्र में गुजरात की एकमात्र माउंटेन टनल का कार्य पूर्ण हो चुका है। महाराष्ट्र के पालघर जिले में सात टनलों में से दो का ब्रेकथ्रू हासिल किया जा चुका है। मुंबई के निकट बीकेसी और शिलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी टनल में से 5 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है और शेष कार्य टनल बोरिंग मशीनों (TBM) से जारी है। डिपो के मोर्चे पर सूरत रोलिंग स्टॉक डिपो में व्हील लेथ इंस्टॉलेशन पूरा हो चुका है, जबकि साबरमती डिपो में स्टील स्ट्रक्चर का कार्य प्रगति पर है। वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद-नाडियाड, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती — सभी आठ स्टेशनों की नींव पूरी हो चुकी है और फिनिशिंग का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में वैश्विक मानक स्थापित करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहा है। NHSRCL की यह उपलब्धि दर्शाती है कि जटिल शहरी परिस्थितियों में भी हाई-स्पीड रेल निर्माण संभव है। परियोजना की गति को देखते हुए आने वाले महीनों में और अधिक महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल परियोजना की समग्र समयसीमा और लागत का है। मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना शुरुआत से ही भूमि अधिग्रहण विवादों और महाराष्ट्र में धीमी प्रगति के कारण चर्चा में रही है। बीकेसी–शिलफाटा टनल में 21 किमी में से केवल 5 किमी पूरी होना दर्शाता है कि सबसे जटिल हिस्से अभी बाकी हैं। NHSRCL की उपलब्धियाँ प्रभावशाली हैं, परंतु परियोजना की पारदर्शी समयसीमा और वाणिज्यिक परिचालन की तारीख का स्पष्ट खुलासा जनता के विश्वास के लिए आवश्यक है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में वडोदरा गर्डर लॉन्च क्यों खास है?
वडोदरा के वडसर रोड ओवर ब्रिज पर 40 मीटर लंबे गर्डर को FSLM तकनीक से मात्र 2 घंटे 13 मिनट में स्थापित किया गया, जबकि वहाँ रोज़ाना 100 से अधिक ट्रेनें और 70,000 वाहन गुजरते हैं। यह घनी शहरी परिस्थितियों में हाई-स्पीड रेल निर्माण की तकनीकी सफलता का प्रमाण है।
फुल स्पैन लॉन्चिंग मेथड (FSLM) क्या होता है?
FSLM एक निर्माण तकनीक है जिसमें पूरे गर्डर स्ट्रक्चर को एक साथ लॉन्च किया जाता है, न कि खंड-दर-खंड। इससे काम तेज़ी से पूरा होता है, यातायात में व्यवधान कम होता है और निर्माण अधिक सुरक्षित रहता है।
मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की अब तक कितनी प्रगति हुई है?
508 किमी के कॉरिडोर में 349 किमी वायाडक्ट, 443 पियर्स, 17 नदी पुल और सभी 8 स्टेशनों की नींव पूरी हो चुकी है। इसके अलावा 191 रूट किमी ट्रैक स्लैब और 7,700 से अधिक OHE मास्ट भी स्थापित किए जा चुके हैं।
बुलेट ट्रेन की मुंबई टनल का काम कहाँ तक पहुँचा है?
मुंबई के पास बीकेसी और शिलफाटा के बीच 21 किमी लंबी टनल में से 5 किमी का काम पूरा हो चुका है। शेष कार्य टनल बोरिंग मशीनों (TBM) के जरिए जारी है।
बुलेट ट्रेन परियोजना में कौन-से स्टेशन शामिल हैं?
गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद-नाडियाड, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती — इन आठ स्टेशनों की नींव पूरी हो चुकी है और फिनिशिंग का काम प्रगति पर है।
राष्ट्र प्रेस
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