आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे आत्महत्या मामला: मुंबई क्राइम ब्रांच ने संभाली जांच, डिजिटल सबूत खंगाले जा रहे
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई क्राइम ब्रांच ने आईआईटी बॉम्बे के 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या मामले की जांच 21 सितंबर 2026 को अपने हाथ में ले ली है। जांच अधिकारी वाकोडे के जब्त मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण कर रहे हैं, क्योंकि पवई कैंपस के हॉस्टल नंबर 4 के कमरे में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था। एसीपी रैंक के वरिष्ठ अधिकारी इस जांच की अगुवाई कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
18 सितंबर 2026 की सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच आयोजित मिड-टर्म परीक्षा के दौरान कोर्स इंस्ट्रक्टर और इनविजिलेटर प्रोफेसर सूर्यनारायण डुला ने कथित तौर पर साहिल को स्मार्टफोन और चैटजीपीटी का अनधिकृत उपयोग करते हुए देखा। संस्थान की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रोफेसर डुला ने इस घटना की सूचना तत्काल संस्थान के अधिकारियों को दी। उसी दिन बाद में साहिल को हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया।
जांचकर्ता अब हॉस्टल नंबर 4 के क्राइम सीन की विस्तृत जांच कर रहे हैं और घटना से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्य — संभावित सुसाइड नोट, संदेश और अन्य डेटा — खंगालने में लगे हैं। अधिकारियों से उम्मीद है कि वे जल्द ही एफआईआर में नामजद व्यक्तियों को, जिनमें प्रोफेसर डुला भी शामिल हैं, पूछताछ के लिए समन भेजेंगे।
कानूनी धाराएँ और परिवार के आरोप
यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है। साहिल के माता-पिता का आरोप है कि मृत्यु से कुछ महीने पहले उनके बेटे को संस्थान के फैकल्टी सदस्यों की ओर से जाति-आधारित और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। यह आरोप मामले को महज शैक्षणिक अनुशासन से आगे ले जाकर सामाजिक न्याय के व्यापक प्रश्न से जोड़ता है।
गौरतलब है कि देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों में दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों की आत्महत्या की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले एक दशक में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें जाति-आधारित भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं।
आईआईटी बॉम्बे की माफी और फैकल्टी फोरम का रुख
आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने इस घटना पर खेद जताते हुए माफी माँगी। संस्थान ने अपने बयान में कहा, 'साहिल की मौत से जुड़े हालात के बारे में पिछले बयान में कही गई बातों के लिए हम माफी माँगते हैं। घटना से जुड़ी जानकारी और हालात की जांच संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही है। जांच को देखते हुए उनकी मौत से पहले की घटनाओं के बारे में जानकारी देना या उन्हें किसी तरह का रूप देना अनुचित था, जबकि उन्हें उचित जांच प्रक्रिया के ज़रिए अभी तक पूरी तरह से साबित नहीं किया गया था।'
वहीं, आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने साहिल की मौत पर गहरा दुख जताया, साथ ही प्रोफेसर डुला के साथ पूरी एकजुटता भी दिखाई। फोरम का कहना है कि प्रोफेसर डुला ने संस्थान की सीनेट द्वारा अनुमोदित और वर्तमान में लागू शैक्षणिक नीतियों के अनुसार ही अपनी ड्यूटी निभाई। फोरम ने इस बात पर चिंता जताई कि अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियाँ निभाने वाले एक प्रोफेसर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँच रहा है।
कैंपस में तनाव और विरोध
सोमवार, 21 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे प्रशासन और विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों एवं साहिल के माता-पिता के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखी। प्रदर्शनकारियों और प्रशासन दोनों ने ही इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया है। यह तनाव संस्था के भीतर उस गहरी बेचैनी को दर्शाता है जो शैक्षणिक दबाव, जाति के प्रश्न और संस्थागत जवाबदेही को लेकर लंबे समय से सुलग रही है।
आगे की जांच की दिशा
क्राइम ब्रांच अब मोबाइल फोन से प्राप्त डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगी। समन मिलने के बाद प्रोफेसर सहित एफआईआर में नामजद सभी व्यक्तियों से पूछताछ होने की संभावना है। यह जांच न केवल साहिल की मौत की परिस्थितियाँ स्पष्ट करेगी, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति के छात्रों के साथ व्यवहार को लेकर व्यापक सवाल भी खड़े करती है।