कांग्रेस देश को 1980 के दशक में ले जाना चाहती है: राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता नरेश बंसल ने 30 अक्टूबर 2026 को देहरादून में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कड़े प्रहार किए। बंसल ने कहा कि जब दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है, तब कांग्रेस देश को 1980 के दशक में वापस ले जाने की कोशिश में लगी है — एक ऐसी सोच जो उनके अनुसार जनता की समझ से बाहर है।
EVM बनाम बैलेट पेपर विवाद
विपक्ष की बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग पर सांसद बंसल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस बूथ और मतपेटियाँ लूटा करती थी, अब EVM को लूट नहीं पा रही। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कई विपक्षी दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
बंसल ने उदाहरण देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की राज्य सरकार होने के बावजूद बैलेट पेपर से हुए स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि मतदान-पद्धति नहीं, बल्कि जनता का जनादेश कांग्रेस के विरुद्ध है।
MLC चुनाव के आँकड़े और कांग्रेस की स्थिति
सांसद बंसल ने MLC चुनाव का हवाला देते हुए बताया कि ये चुनाव भी बैलेट पेपर से ही हुए, जहाँ 28 में से मात्र 1 सीट कांग्रेस के खाते में आई। उन्होंने कहा कि यह आँकड़ा स्वयं बोलता है — पार्टी न केवल ईवीएम बल्कि बैलेट पेपर पर भी अपना आधार खो रही है।
बंसल के अनुसार, कांग्रेस का मौजूदा नेतृत्व जनता के हितों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहा, इसीलिए मतदाता पार्टी से दूर होते जा रहे हैं। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे दौर में आया है जब कांग्रेस लगातार कई राज्यों में चुनावी पराजय का सामना कर रही है।
मॉक पार्लियामेंट और 1 नवंबर की रैली पर निशाना
विपक्ष द्वारा मॉक पार्लियामेंट आयोजित करने और 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को लेकर बंसल ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लाल किले के सपने देख रहे हैं, क्योंकि संसद में उनकी कोई प्रभावी भूमिका नहीं रह गई है।
बंसल ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद में अनेक महत्वपूर्ण चर्चाओं में भाग नहीं लेते। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि संसद में न तो वे स्पीकर बन सकते हैं, न ही प्रधानमंत्री — इसीलिए वे 'मॉक पार्लियामेंट' के नाम पर ड्रामेबाज़ी कर रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तेज़ की है। 1 नवंबर की प्रस्तावित विपक्षी रैली से पहले BJP नेताओं की प्रतिक्रियाएँ तेज़ हुई हैं। बंसल के इन बयानों को इसी रणनीतिक पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों की राजनीतिक सक्रियता और बढ़ने की संभावना है।