एनसीबी की बड़ी सफलता: कार के स्पीकर में छिपाई 3.65 किलो चरस के साथ पकड़े तीनों तस्करों को 10-10 साल की सजा
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट ने पंजाब के रूपनगर में एक विशेष अदालत से तीन ड्रग तस्करों को दोषी ठहराने में सफलता हासिल की है। इन तस्करों को 1 जुलाई 2021 को कार के डिक्की में लगे स्पीकर के भीतर 3.65 किलोग्राम चरस छिपाकर ले जाते हुए मोरिंडा के पास गिरफ्तार किया गया था। 22 अक्टूबर 2026 को अदालत ने तीनों दोषियों को 10-10 साल के कठोर कारावास और प्रत्येक पर ₹2 लाख जुर्माने की सजा सुनाई।
मुख्य घटनाक्रम
खुफिया सूचना मिलने पर NCB की टीम ने 1 जुलाई 2021 को रूपनगर जिले के मोरिंडा स्थित सरहिंद-पटियाला रोड पर निगरानी तैनात की। संदिग्ध वाहन रोके जाने पर तलाशी में कार की डिक्की के स्पीकर के अंदर चरस के सात पैकेट — गोल और उंगली के आकार के — मिले। जब्त किया गया नशीला पदार्थ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत 'व्यावसायिक मात्रा' की श्रेणी में आता है।
गाड़ी में सवार तीनों — कुलदीप सिंह उर्फ गोलू, संजीव कुमार उर्फ मिठू और अशोक कुमार — को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया।
अदालत का फैसला
21 अक्टूबर 2026 को न्यायाधीश लखविंदर कौर दुग्गल की अध्यक्षता वाली विशेष अदालत ने माना कि एनडीपीएस अधिनियम के अनिवार्य प्रावधानों का पूर्ण रूप से पालन हुआ। अदालत ने तीनों आरोपियों को NDPS अधिनियम की धारा 20(सी) तथा धारा 29 (धारा 20 के साथ पठित) के तहत दोषी ठहराया।
22 अक्टूबर को सजा सुनाते समय अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय की उन टिप्पणियों का हवाला दिया जिनमें नशीले पदार्थों की तस्करी के समाज पर पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभावों को रेखांकित किया गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि कोई दोषी जुर्माना अदा करने में असमर्थ रहता है, तो उसे 2 वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। इसके साथ ही तस्करी में प्रयुक्त वाहन को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी आदेश दिया गया।
आम जनता पर असर और सरकार की प्रतिक्रिया
यह मामला ऐसे समय में आया है जब पंजाब और आसपास के राज्यों में नशे की समस्या को लेकर सामाजिक और राजनीतिक चिंता लगातार बनी हुई है। गौरतलब है कि सरहिंद-पटियाला रोड जैसे प्रमुख मार्ग पहले भी मादक पदार्थों की तस्करी के संदर्भ में सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहे हैं।
NCB ने केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत' अभियान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए आम जनता से अपील की है कि नशीले पदार्थों की तस्करी की सूचना 'मानस' नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 1933 पर दी जाए। सूचना देने वालों की पहचान पूर्णतः गुप्त रखी जाएगी।
क्या होगा आगे
तीनों दोषियों के लिए अपील का विकल्प उच्च न्यायालय में उपलब्ध है। तस्करी में इस्तेमाल वाहन की जब्ती की प्रक्रिया अदालत के निर्देशानुसार अलग से चलाई जाएगी। यह फैसला इस बात का संकेत है कि NCB की चंडीगढ़ यूनिट 'व्यावसायिक मात्रा' वाले मामलों में अधिकतम सजा सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय रहेगी।