नीट री-एग्जाम में सेना तैनाती पर भूपेश बघेल का हमला: 'समस्या मंत्रालय में, समाधान कहीं और'
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शुक्रवार, 29 मई को रायपुर में पत्रकारों से बात करते हुए नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि असली समस्या शिक्षा मंत्रालय में है, लेकिन सरकार समाधान कहीं और तलाश रही है।
सेना तैनाती पर सवाल
भूपेश बघेल ने कहा, 'अगर पेपर की सुरक्षा के लिए अब सेना की मदद ली जा रही है तो इसका मतलब साफ है कि सरकार को अपनी पुलिस पर भरोसा नहीं है।' उनके अनुसार, संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर सेना की तैनाती कोई स्थायी हल नहीं है — यह केवल मूल समस्या से ध्यान भटकाने का प्रयास है। गौरतलब है कि 21 जून को होने वाले री-एग्जाम के लिए सूत्रों के अनुसार संवेदनशील केंद्रों पर सेना की तैनाती पर विचार चल रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान पर इस्तीफे की माँग
बघेल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा, 'धर्मेंद्र प्रधान ने खुद माना है कि परीक्षा में गड़बड़ियाँ हुई हैं। अगर गड़बड़ी स्वीकार है तो उन्हें तुरंत पद से हटा देना चाहिए। अगर वे इस्तीफा नहीं देते तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हें हटाना चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है।
एनटीए के पूर्व अधिकारी पर आरोप
बघेल ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के पूर्व महानिदेशक का उदाहरण देते हुए कहा कि पेपर लीक के दौरान जिनके कार्यकाल में यह घटना हुई, उन्हें बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में प्रधान सचिव बना दिया गया। उन्होंने तीखा सवाल किया, 'बार-बार पेपर लीक होने के बावजूद मंत्री को बचाए रखना क्या न्यायसंगत है?' आलोचकों का कहना है कि यह जवाबदेही की कमी को दर्शाता है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति पर भी निशाना
बघेल ने राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एक विधायक तहसीलदार के दफ्तर में घुसकर मारपीट करता है, फिर भी पीड़ित अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष के खिलाफ मनगढ़ंत मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
री-एग्जाम की तैयारी
देशभर में नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद केंद्र सरकार ने 21 जून को री-एग्जाम कराने का निर्णय लिया है। इस बार किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, संवेदनशील केंद्रों पर सेना की तैनाती पर विचार चल रहा है — एक कदम जो विपक्ष के लिए नई आलोचना का आधार बन गया है। लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा होने के कारण सभी पक्षों की नज़रें 21 जून पर टिकी हैं।