नीट-यूजी 2024 पेपर लीक: सीबीआई ने संजीव मुखिया को क्लीन चिट दी, 45 अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि विस्तृत और गहन जांच के बाद भी उनके विरुद्ध प्रश्नपत्र चोरी या उसके वितरण में संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं मिला। इसी आधार पर एजेंसी ने इस मामले में संजीव मुखिया के खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की। यह स्पष्टीकरण 23 जुलाई को आया।
मामले की पृष्ठभूमि
वर्ष 2024 में बिहार पुलिस ने नीट-यूजी परीक्षा का प्रश्नपत्र चोरी होने का खुलासा किया था और इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की थी। शुरुआती जांच में संजीव मुखिया पर संदेह जताया गया था, क्योंकि वह कथित तौर पर पहले भी कई परीक्षा प्रश्नपत्र चोरी और लीक मामलों में शामिल पाए गए थे। इसी आधार पर बिहार पुलिस ने उन्हें एफआईआर में आरोपी बनाया था।
बाद में इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। एजेंसी ने जांच के दौरान प्रश्नपत्र चोरी करने, उसे आगे पहुँचाने और उससे लाभ उठाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान की। इसके बाद पटना की सक्षम अदालत में कुल 45 आरोपियों के खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल की गईं।
संजीव मुखिया के विरुद्ध क्या मिला जांच में
CBI के अनुसार, जांच के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया जिससे यह सिद्ध हो सके कि संजीव मुखिया नीट-यूजी 2024 प्रश्नपत्र चोरी या उसके वितरण की साजिश में शामिल थे। एजेंसी ने कहा कि पूरी साजिश और उसमें शामिल सभी लोगों की पहचान कर ली गई है।
जांच के दौरान संजीव मुखिया फरार थे। बाद में उन्हें बिहार पुलिस ने अन्य मामलों में गिरफ्तार किया। नीट-यूजी 2024 मामले की एफआईआर में नाम होने के कारण CBI ने पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया था।
चार्जशीट न दाखिल होने और जमानत का घटनाक्रम
पूछताछ और जांच के बाद भी संजीव मुखिया के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य न मिलने पर CBI ने इस मामले में उनके विरुद्ध चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिसके फलस्वरूप उन्हें इस केस में जमानत मिल गई। हालाँकि, CBI मामले में जमानत मिलने के बाद भी वह बिहार पुलिस द्वारा जांचे जा रहे अन्य मामलों में आरोपी होने के कारण न्यायिक हिरासत में बने रहे।
CBI का आधिकारिक बयान
एजेंसी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले की पूरी जांच संपन्न हो चुकी है और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान सुनिश्चित की जा चुकी है। CBI ने यह भी कहा कि यह स्थिति वर्ष 2024 में ही स्पष्ट कर दी गई थी। एजेंसी ने कहा कि यह दावा करना कि संजीव मुखिया का नाम जानबूझकर जांच से बाहर रखा गया या उन्हें बचाया गया — तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत है।
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 पेपर लीक प्रकरण ने देशभर में चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब CBI की जांच पूरी होने और 45 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के साथ, अदालत में यह मामला अगले चरण में प्रवेश करेगा।