नीट-यूजी 2026 विवाद: लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव, छात्रों पर एफआईआर वापसी और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन और मणिक्कम टैगोर बी ने बुधवार, 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस प्रस्तुत किए, जिनमें नीट-यूजी 2026 और यूजीसी-नेट परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं के बाद 23 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य की रक्षा में सरकार की विफलता तथा नई दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज किए जाने पर संसद में तत्काल चर्चा की माँग की गई। दोनों सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को अलग-अलग पत्र लिखकर सदन के सामान्य कामकाज को स्थगित कर इस विषय को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।
मुख्य घटनाक्रम
नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई, जिसमें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के अधिकारी भी संलिप्त पाए गए। इस कारण परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करनी पड़ी। इसी प्रकार यूजीसी-नेट परीक्षा में भी अनियमितताएँ सामने आईं, जिससे देश की केंद्रीय परीक्षा संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए। रिपोर्टों के अनुसार, इस संकट से उपजे तनाव और अनिश्चितता के बीच कई छात्रों के आत्महत्या करने की खबरें सामने आई हैं।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सार्वजनिक रूप से संस्थागत विफलता स्वीकार की है, किंतु आलोचकों का कहना है कि उन्होंने इस्तीफा देकर नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है।
सांसदों की माँगें
सांसद मणिक्कम टैगोर बी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा, 'नीट-यूजी 2026 और यूजीसी-नेट परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं से उत्पन्न लगातार संकट के परिणामस्वरूप छात्रों के बहुमूल्य जीवन का नुकसान, 23 लाख से अधिक छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की रक्षा करने में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और एनटीए की घोर विफलता और इसके बाद दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने पर सदन सामान्य कामकाज को रोककर चर्चा किए जाने की आवश्यकता है।'
उन्होंने तीन प्रमुख माँगें रखीं — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा, परीक्षा अनियमितताओं पर संसद में समय-सीमाबद्ध चर्चा, और विरोध प्रदर्शनों के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर की तत्काल वापसी।
पुलिस कार्रवाई पर विरोध
सांसद हिबी ईडन ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा, 'यह सदन हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की परेशान करने वाली खबरों पर मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता, जो देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में कमियों के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे थे।'
उन्होंने आगे कहा, 'कानूनी और लोकतांत्रिक तरीकों से न्याय की मांग कर रहे छात्रों का सामना दिल्ली पुलिस द्वारा जरूरत से अधिक और गैर-कानूनी बल प्रयोग से हुआ।' उनके अनुसार, केंद्र सरकार की इन घटनाओं पर 'लगातार चुप्पी' ने जनता की चिंता को और गहरा किया है।
आम जनता और छात्रों पर असर
परीक्षा रद्द होने और पुनः आयोजन से 23 लाख से अधिक उम्मीदवारों का समय, धन और करियर-योजना प्रभावित हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब एनटीए पर पहले से ही पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि प्रणालीगत सुधारों के बार-बार आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई निश्चित परीक्षा कैलेंडर, एनटीए का संरचनात्मक सुधार या पीड़ित मुआवजा ढाँचा लागू नहीं किया गया है।
आगे क्या
दोनों स्थगन प्रस्ताव नोटिस लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन हैं। यदि स्वीकृत होते हैं, तो सदन में इस विषय पर विस्तृत बहस का मार्ग प्रशस्त होगा। विपक्ष की एकजुट माँग और छात्रों के जारी आंदोलन को देखते हुए सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह एनटीए सुधार और एफआईआर वापसी पर ठोस कदम उठाए।