नेपाल आपदा से सुरक्षित लौटे मंडी के ज्ञान सिंह: 'एक पल लगा बचना नामुमकिन है'
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर निवासी ज्ञान सिंह नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन आपदा के बीच एक पावर प्रोजेक्ट में फँसे रहने के बाद 4 सितंबर को सुरक्षित अपने घर लौट आए। नेपाल सेना ने रेस्क्यू अभियान चलाकर उन्हें और उनके साथियों को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। करीब दो दिन और एक रात तक संकट में रहने के बाद घर वापस आए ज्ञान सिंह के परिजनों ने राहत की सांस ली।
आपदा का पहला पल: अचानक बदला सब कुछ
26 अगस्त की सुबह करीब साढ़े नौ से पौने दस बजे के बीच पावर हाउस के अंदर अचानक हवा का तेज झोंका आया और तेज आवाज सुनाई दी। ज्ञान सिंह उस समय हॉल में थे। उन्होंने तत्काल साथियों को बाहर निकलने का निर्देश दिया। बाद में पता चला कि टीआरटी टनल के रास्ते पानी पावर हाउस के भीतर घुस आया था।
पावर हाउस से बाहर निकले कर्मचारियों के कपड़ों और शरीर पर पानी व मिट्टी लगी थी। सभी असेंबली प्वाइंट की ओर दौड़े। बाहर का नज़ारा डरावना था — बाढ़ की दिशा में बड़े-बड़े पत्थर और मलबा बह रहा था। कर्मचारी ऊँचाई पर चले गए और करीब दो-तीन घंटे तक वहीं रुके रहे।
रात को फिर बढ़ा खतरा, 50 मीटर ऊँचाई पर शरण
जब हालात कुछ शांत हुए तो कर्मचारी नीचे उतरे और परियोजना क्षेत्र का जायजा लिया। कैंप, बाजार और आसपास के गाँव का हिस्सा मलबे से बुरी तरह प्रभावित था। पास का एक छोटा प्रोजेक्ट भी क्षतिग्रस्त दिखाई दिया। सभी कंट्रोल बिल्डिंग में पहुँचे, लेकिन उसी रात करीब साढ़े दस बजे दोबारा पानी बढ़ने की चेतावनी मिली।
इसके बाद सभी कर्मचारियों को करीब 50 मीटर की ऊँचाई पर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। कुछ घंटों बाद स्थिति सामान्य होने पर वे वापस कंट्रोल बिल्डिंग पहुँचे। ज्ञान सिंह के अनुसार, करीब 110 कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल सके, लेकिन एक कर्मचारी पावर हाउस के भीतर फँसा रह गया — मलबा भर जाने के कारण उसे खोजना और निकालना मुश्किल हो गया।
नेपाल सेना का रेस्क्यू और काठमांडू तक का सफर
अगले दिन 27 अगस्त की सुबह करीब 10-11 बजे नेपाल सेना की टीम मौके पर पहुँची। जवानों ने कर्मचारियों को सुरक्षित निकालने का भरोसा दिलाया और रेस्क्यू शुरू किया। इसके बाद सभी को बुटवल स्थित आर्मी कैंप में रखा गया। रात करीब नौ बजे उन्हें काठमांडू ले जाया गया, जहाँ कंपनी ने होटल में ठहरने की व्यवस्था की।
आपदा में ज्ञान सिंह का अधिकांश सामान और कपड़े बह गए थे। कंपनी ने उन्हें कपड़े, भोजन और आवास उपलब्ध कराया। 31 अगस्त को कंपनी ने उनके लिए हवाई यात्रा की व्यवस्था की। वे दिल्ली होते हुए चंडीगढ़ पहुँचे और फिर करीब दोपहर एक बजे सुंदरनगर स्थित अपने घर।
परिवार से टूटा संपर्क, बेटे को किया पहला फोन
हादसे वाले दिन सुबह करीब 6:30 बजे ज्ञान सिंह की परिवार से आखिरी सामान्य बातचीत हुई थी। इसके बाद दोपहर और शाम को संपर्क नहीं हो सका। नेपाल में आपदा की खबर मिलने के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई। अगले दिन करीब 11:30 बजे मोबाइल सिग्नल मिलने पर उन्होंने सबसे पहले अपने बेटे को फोन कर सुरक्षित होने की जानकारी दी।
भतीजी रक्षा ने बताया कि आपदा की खबर सुनकर पूरा परिवार बेहद चिंतित हो गया था। ज्ञान सिंह के सुरक्षित होने की सूचना मिलने और फोन पर बात होने के बाद सबने राहत की सांस ली। भाभी पदमा देवी ने भी उनके घर लौटने पर खुशी जताई।
एक साथी अभी भी लापता, रेस्क्यू जारी
ज्ञान सिंह ने बताया कि हिमाचल प्रदेश से इस परियोजना में चार कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें से तीन सुरक्षित वापस लौट आए हैं, जबकि ऊना जिले के सुखविंदर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। उनके डैम क्षेत्र में होने की जानकारी थी। रेस्क्यू अभियान जारी है और परिजन उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
ज्ञान सिंह ने नेपाल सेना और अपनी कंपनी का आभार जताते हुए कहा कि मुश्किल समय में सेना ने साथ दिया और सभी ने एक-दूसरे का हौसला बनाए रखा। आने वाले दिनों में लापता साथियों की खोज के नतीजे तय करेंगे कि इस त्रासदी का अंत राहत के साथ होगा या दुख के साथ।