29 अगस्त 2026
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नेपाल बाढ़ से जान बचाकर लौटे पश्चिम चंपारण के मजदूर, 3 साथी अब भी लापता

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नेपाल बाढ़ से जान बचाकर लौटे पश्चिम चंपारण के मजदूर, 3 साथी अब भी लापता

सारांश

नेपाल की भीषण बाढ़ से जान बचाकर पश्चिम चंपारण के मजदूर दो दिन की मशक्कत के बाद घर लौटे — हेलीकॉप्टर, सेना के कैंप और सड़क मार्ग से। राहत के बीच दर्द यह है कि तीन साथी अब भी लापता हैं और परिजन उनकी राह देख रहे हैं।

मुख्य बातें

पश्चिम चंपारण के मजदूरों का एक दल नेपाल की भीषण बाढ़ से बचकर 29 अगस्त को बेतिया सुरक्षित लौटा।
बाढ़ का पानी करीब 20 फीट तक ऊपर पहुँच गया था; मजदूरों को चप्पल-कपड़े पहने बिना ही जान बचाकर भागना पड़ा।
समूह के तीन मजदूर अब भी लापता हैं; अगले दिन की तलाश में भी कोई सुराग नहीं मिला।
नेपाली सेना ने मजदूरों को हेलीकॉप्टर से भटार और फिर काठमांडू पहुँचाया।
मजदूर काठमांडू से बीरगंज होते हुए सड़क मार्ग से पश्चिम चंपारण पहुँचे।

पश्चिम चंपारण के मजदूरों का एक दल नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कहर से बचकर 29 अगस्त को सुरक्षित बेतिया लौट आया। करीब दो दिनों की कठिन यात्रा के बाद शुक्रवार देर शाम घर पहुँचते ही परिजनों की आँखों में खुशी के आँसू छलक पड़े। हालाँकि राहत के इस पल में भी परिवारों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई — इन मजदूरों के साथ काम करने वाले तीन साथी अब भी लापता हैं और उनके परिजन सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

बाढ़ का भयावह मंजर

घर लौटे मजदूरों ने नेपाल में तबाही का वह खौफनाक दृश्य बयाँ किया जो उन्होंने अपनी आँखों से देखा। उनके अनुसार बाढ़ का पानी इतनी तेज़ी से आया कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। एक मजदूर ने बताया कि पानी का स्तर करीब 20 फीट तक ऊपर पहुँच गया था — एक ऐसा दृश्य जो उन्होंने इससे पहले कभी नहीं देखा था।

मजदूरों की आपबीती

जबरुल आलम ने बताया कि वे कुछ साथियों के साथ सो रहे थे, तभी अचानक तेज़ आवाज़ सुनाई दी। बाहर निकलकर देखा तो बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ रहा था। दवा लेने गए एक साथी के लौटने के बाद खतरे का अंदाज़ा हुआ और लोगों ने ऊँचाई की ओर भागना शुरू किया। जबरुल ने बताया कि उन्हें चप्पल और कपड़े तक ठीक से पहनने का वक्त नहीं मिला। पानी कुछ कम होने पर करीब एक घंटे बाद वे लापता साथियों को खोजने निकले, लेकिन तीनों का कोई सुराग नहीं मिला। उन्होंने रात एक स्कूल में गुज़ारी और सुबह इलाके में कई शव दिखाई दिए, मगर साथियों का कोई पता नहीं चला।

सलमान आलम ने बताया कि बाढ़ आने से पहले कुछ साथी घूमने गए थे और एक साथी उनके पिता के लिए दवा लेने गया था। रात करीब साढ़े नौ बजे अचानक तेज़ आवाज़ें सुनाई दीं। बाहर निकलने पर धुएँ और पानी का भयावह मंजर दिखा। वे साथियों को लेकर ऊँचाई की ओर भागे। बाद में नीचे उतरे तो घर और सामान सब बह चुका था। सेना के जवान उन्हें वहाँ से निकालकर एक स्कूल ले गए जहाँ भोजन दिया गया। अगले दिन हेलीकॉप्टर से उन्हें भटार पहुँचाया गया और वहाँ से काठमांडू भेजा गया।

नियम मियाँ ने कहा कि नेपाल में उन्होंने इससे पहले कभी इतनी भयानक बाढ़ नहीं देखी। उन्होंने बताया कि हेलीकॉप्टर से झापड़ी बेसी से झुमचे ले जाया गया, फिर सेना के कैंप भटार पहुँचाया गया। अधिकारियों ने सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने का भरोसा दिलाया। काठमांडू में एक रात रिश्तेदार के यहाँ बिताने के बाद वे वाहन से बीरगंज होते हुए पश्चिम चंपारण के लिए रवाना हुए।

लापता मजदूरों की तलाश जारी

घर लौटे मजदूरों ने बताया कि पानी कम होने के बाद उन्होंने अगले दिन भी लापता तीन साथियों की तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। परिजन अब भी उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसूनी बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है और सैकड़ों लोग विस्थापित हुए हैं।

घर वापसी का सफर

बचे हुए मजदूर हेलीकॉप्टर, सेना के काफिले और सड़क मार्ग — तीनों माध्यमों से होते हुए घर पहुँचे। काठमांडू से टाटा सूमो रिज़र्व कर बीरगंज होते हुए पश्चिम चंपारण पहुँचने में करीब दो दिन लगे। इस पूरे सफर में नेपाली सेना और स्थानीय अधिकारियों की मदद अहम रही। आगे भी लापता मजदूरों की तलाश जारी रहने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस बड़े सच की है जो बिहार के हज़ारों प्रवासी मजदूरों की ज़िंदगी में हर मानसून दोहराता है — रोज़ी-रोटी के लिए सीमा पार जाना और प्राकृतिक आपदा में अकेले पड़ जाना। नेपाली सेना ने मदद की, लेकिन तीन लापता मजदूरों के परिजनों तक भारतीय राजनयिक या प्रशासनिक तंत्र की कोई सक्रिय पहुँच की खबर नहीं है। गौरतलब है कि हर साल नेपाल में काम करने वाले बिहारी मजदूर बाढ़ के मौसम में जोखिम उठाते हैं, फिर भी उनके लिए कोई संस्थागत सुरक्षा-तंत्र नहीं है। लापता तीन मजदूरों का मामला यह सवाल उठाता है कि क्या सरकार प्रवासी श्रमिकों के लिए नेपाल जैसे पड़ोसी देशों में आपातकालीन ट्रैकिंग और बचाव प्रोटोकॉल तैयार करेगी।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ से पश्चिम चंपारण के कितने मजदूर सुरक्षित लौटे और कितने लापता हैं?
मजदूरों का एक दल सुरक्षित बेतिया लौट आया है, जबकि उनके समूह के तीन साथी अभी भी लापता हैं। परिजन उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
नेपाल में बाढ़ का पानी कितना ऊँचा उठा था?
मजदूरों के अनुसार बाढ़ का पानी करीब 20 फीट तक ऊपर पहुँच गया था। पानी इतनी तेज़ी से आया कि लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला और उन्हें जान बचाने के लिए तुरंत ऊँचाई की ओर भागना पड़ा।
मजदूर नेपाल से घर कैसे लौटे?
नेपाली सेना ने पहले मजदूरों को हेलीकॉप्टर से झापड़ी बेसी से झुमचे और फिर सेना के कैंप भटार पहुँचाया। वहाँ से काठमांडू गए और टाटा सूमो रिज़र्व कर बीरगंज होते हुए पश्चिम चंपारण पहुँचे — पूरी यात्रा में करीब दो दिन लगे।
लापता मजदूरों की तलाश में क्या हुआ?
पानी कम होने के बाद बचे मजदूरों ने उसी रात और अगले दिन भी लापता तीन साथियों को खोजने की कोशिश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। सुबह इलाके में कई शव दिखाई दिए, लेकिन लापता साथियों का पता नहीं चला।
क्या नेपाल में पहले भी इतनी भयानक बाढ़ आई है?
मजदूर नियम मियाँ के अनुसार उन्होंने नेपाल में इससे पहले कभी इतनी भयानक बाढ़ नहीं देखी थी। नेपाल में मानसून के दौरान बाढ़ आना सामान्य है, लेकिन इस बार पानी का स्तर और रफ्तार असाधारण रही।
राष्ट्र प्रेस
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