नेपाल बाढ़ से जान बचाकर लौटे पश्चिम चंपारण के मजदूर, 3 साथी अब भी लापता
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम चंपारण के मजदूरों का एक दल नेपाल में आई भीषण बाढ़ के कहर से बचकर 29 अगस्त को सुरक्षित बेतिया लौट आया। करीब दो दिनों की कठिन यात्रा के बाद शुक्रवार देर शाम घर पहुँचते ही परिजनों की आँखों में खुशी के आँसू छलक पड़े। हालाँकि राहत के इस पल में भी परिवारों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई — इन मजदूरों के साथ काम करने वाले तीन साथी अब भी लापता हैं और उनके परिजन सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
बाढ़ का भयावह मंजर
घर लौटे मजदूरों ने नेपाल में तबाही का वह खौफनाक दृश्य बयाँ किया जो उन्होंने अपनी आँखों से देखा। उनके अनुसार बाढ़ का पानी इतनी तेज़ी से आया कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। एक मजदूर ने बताया कि पानी का स्तर करीब 20 फीट तक ऊपर पहुँच गया था — एक ऐसा दृश्य जो उन्होंने इससे पहले कभी नहीं देखा था।
मजदूरों की आपबीती
जबरुल आलम ने बताया कि वे कुछ साथियों के साथ सो रहे थे, तभी अचानक तेज़ आवाज़ सुनाई दी। बाहर निकलकर देखा तो बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ रहा था। दवा लेने गए एक साथी के लौटने के बाद खतरे का अंदाज़ा हुआ और लोगों ने ऊँचाई की ओर भागना शुरू किया। जबरुल ने बताया कि उन्हें चप्पल और कपड़े तक ठीक से पहनने का वक्त नहीं मिला। पानी कुछ कम होने पर करीब एक घंटे बाद वे लापता साथियों को खोजने निकले, लेकिन तीनों का कोई सुराग नहीं मिला। उन्होंने रात एक स्कूल में गुज़ारी और सुबह इलाके में कई शव दिखाई दिए, मगर साथियों का कोई पता नहीं चला।
सलमान आलम ने बताया कि बाढ़ आने से पहले कुछ साथी घूमने गए थे और एक साथी उनके पिता के लिए दवा लेने गया था। रात करीब साढ़े नौ बजे अचानक तेज़ आवाज़ें सुनाई दीं। बाहर निकलने पर धुएँ और पानी का भयावह मंजर दिखा। वे साथियों को लेकर ऊँचाई की ओर भागे। बाद में नीचे उतरे तो घर और सामान सब बह चुका था। सेना के जवान उन्हें वहाँ से निकालकर एक स्कूल ले गए जहाँ भोजन दिया गया। अगले दिन हेलीकॉप्टर से उन्हें भटार पहुँचाया गया और वहाँ से काठमांडू भेजा गया।
नियम मियाँ ने कहा कि नेपाल में उन्होंने इससे पहले कभी इतनी भयानक बाढ़ नहीं देखी। उन्होंने बताया कि हेलीकॉप्टर से झापड़ी बेसी से झुमचे ले जाया गया, फिर सेना के कैंप भटार पहुँचाया गया। अधिकारियों ने सुरक्षित स्थान तक पहुँचाने का भरोसा दिलाया। काठमांडू में एक रात रिश्तेदार के यहाँ बिताने के बाद वे वाहन से बीरगंज होते हुए पश्चिम चंपारण के लिए रवाना हुए।
लापता मजदूरों की तलाश जारी
घर लौटे मजदूरों ने बताया कि पानी कम होने के बाद उन्होंने अगले दिन भी लापता तीन साथियों की तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। परिजन अब भी उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसूनी बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है और सैकड़ों लोग विस्थापित हुए हैं।
घर वापसी का सफर
बचे हुए मजदूर हेलीकॉप्टर, सेना के काफिले और सड़क मार्ग — तीनों माध्यमों से होते हुए घर पहुँचे। काठमांडू से टाटा सूमो रिज़र्व कर बीरगंज होते हुए पश्चिम चंपारण पहुँचने में करीब दो दिन लगे। इस पूरे सफर में नेपाली सेना और स्थानीय अधिकारियों की मदद अहम रही। आगे भी लापता मजदूरों की तलाश जारी रहने की उम्मीद है।