भोटेकोशी बाढ़ के बाद महराजगंज अलर्ट: डीएम-एसपी ने वाल्मीकि बैराज और सोहगीबरवा का किया निरीक्षण
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद 27 अगस्त को महराजगंज जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया। गंडक नदी के तटीय क्षेत्रों में राहत-बचाव दल तैनात कर दिए गए हैं और सीमावर्ती गाँवों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल और पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने निचलौल तहसील क्षेत्र के पतलहवा इलाके और वाल्मीकि बैराज का स्थलीय निरीक्षण किया। दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर तैनात अमले को किसी भी आपात स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए।
इसके बाद दोनों अधिकारी जिले के सबसे संवेदनशील गाँव सोहगीबरवा पहुँचे, जो प्रतिवर्ष बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित रहता है। वहाँ उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और राहत-बचाव की तैयारियों का जायजा लिया तथा ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएँ सुनीं।
गंडक नदी की स्थिति
फिलहाल गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है और सामान्य गति से बह रही है। हालाँकि नेपाल में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हुई तबाही को देखते हुए प्रशासन किसी भी स्थिति में ढील देने के पक्ष में नहीं है। तटीय इलाकों में राजस्व विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और एसएसबी की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं।
सीमावर्ती गाँवों में दहशत
ग्रामीणों ने बताया कि नेपाल में बाढ़ की खबर फैलते ही पूरे सीमावर्ती इलाके में भय का माहौल बन गया। बुधवार की रात संभावित बाढ़ की आशंका के चलते सीमा से लगे गाँवों के लोग पूरी रात जागते रहे और अपने घरों का सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोशिश में लगे रहे।
जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। उन्होंने कहा कि नाव, भोजन, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखी गई है और राहत-बचाव टीमें चौबीसों घंटे तैनात हैं।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल में मानसूनी आपदाओं का सिलसिला हर वर्ष उत्तर प्रदेश के तराई जिलों को सीधे प्रभावित करता है — महराजगंज उनमें सबसे अधिक जोखिम वाला जिला माना जाता है।
आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता और नेपाल से आने वाले पानी के प्रवाह पर प्रशासन की नज़र बनी रहेगी।